
भोटेकोशी-त्रिशूली बाढ़: नेपाल की पूर्वसूचना प्रणाली में कमज़ोरी और सुधार की संभावना
भोटेकोशी-त्रिशूली क्षेत्र में आई विनाशकारी बाढ़ ने नेपाल की पूर्वसूचना प्रणाली की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कई लोगों का मानना है कि यदि समय पर पूर्वसूचना मिलती तो मानव क्षति को कम किया जा सकता था। लेकिन अधिकारियों के अनुसार, नेपाल वर्तमान में केवल मानसून के बाद आने वाली बाढ़ का पूर्वानुमान करने में सक्षम है। चूंकि यह बाढ़ वर्षा से उत्पन्न नहीं हुई, इसलिए पूर्वसूचना प्रणाली इसके लिए तैयार नहीं थी, यह तथ्य अधिकारियों ने भी स्वीकार किया है। जल तथा मौसम विज्ञान विभाग के बाढ़ पूर्वानुमान महाशाखा के प्रमुख विनोद पराजुली ने कहा, “हम वर्षा से उत्पन्न बाढ़ का पूर्वानुमान करते हैं, लेकिन हिमताल विस्फोट और हिमपहाड़ी से आई बाढ़ के लिए हमारी पूर्वसूचना प्रणाली तैयार नहीं थी।” पराजुली ने यह भी बताया कि भोटेकोशी-त्रिशूली क्षेत्र में बुधवार को आई बाढ़ से बचने के लिए उपयुक्त पूर्वसूचना केंद्रों का अभाव था।
लगभग सभी पुलों को सुरक्षित मानते हुए वहां पूर्वसूचना उपकरण स्थापित किए गए थे। उन्होंने कहा, “इस बाढ़ में रसुवागढ़ी, स्याफ्रुबेंसी, बेतरा, फलांखु और मलेखु में स्थित पांच पूर्वसूचना केंद्र क्षतिग्रस्त हो गए हैं। इससे हमारी प्रणाली की सीमाएं स्पष्ट हुई हैं।” वर्तमान में देशभर में २५० स्वचालित पूर्वसूचना केंद्र बाढ़ मापन के लिए सक्रिय हैं। कोशी, गंडकी, कर्णाली, महाकाली, वाग्मती, पश्चिम राप्ती, बबई, कंकाई सहित अन्य मुख्य जलाधारों व उनकी शाखा नदियों के केंद्रों में से बुधवार को आई बाढ़ ने पांच केंद्र बहा दिए हैं। मुग्लिन और देवघाट के मापन केंद्र सुरक्षित हैं, और वहां से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर बाढ़ के स्तर तथा विशेषताओं का अध्ययन जारी है।
पराजुली के अनुसार, तिब्बत से नेपाल की ओर बाढ़ के प्रवेश की सूचना सबसे पहले रसुवा प्रशासन कार्यालय को मिली और वह सूचना पूर्वानुमान महाशाखा तक भी पहुँच गई। लेकिन टीम ने पुष्टि के लिए स्याफ्रुबेंसी के कर्मचारियों से संपर्क किया, जो समस्या के कारण फोन पर संपर्क में असमर्थ रहे। इसके बाद भी स्याफ्रुबेंसी से प्राप्त जानकारी के आधार पर सूचना प्रणाली सक्रिय कर दी गई थी। विपद् जोखिम न्यूनीकरण तथा व्यवस्थापन प्राधिकरण के प्रमुख धर्मराज उप्रेती ने बताया कि निचले क्षेत्रों में सात लाख एसएमएस भेजे गए थे। उस सूचना के प्राप्त होते ही गृह मंत्रालय को तुरंत सूचित किया गया और पाँच से सात मिनट के भीतर व्यापक एसएमएस अलर्ट जारी कर दिया गया। एसएमएस भेजे जाने के कुछ मिनटों बाद ही बेतरावती में भीषण बाढ़ आई, लेकिन लोगों ने गंभीरता नहीं ली, जो समस्या बनी। उप्रेती ने कहा, “इरादा होने के बावजूद बाढ़ के स्तर और संभावित नुकसान की स्पष्टता न होने के कारण लोगों तक इसका गंभीर प्रभाव पूरी तरह नहीं पहुंच पाया।”