
रसुवागढी नाका का भविष्य अनिश्चित, अरबों के निवेश में नुकसान
गत आर्थिक वर्ष २०७२/८३ में रसुवागढी नाका से कुल विदेशी व्यापार का २.१८ प्रतिशत आयात हुआ है। २४ असार २०७२ को भोटेकोशी बाढ़ ने रसुवागढी नाका को ६ महीने के लिए बंद कर दिया और १५ कर्मचारी अभी भी संपर्क विहीन हैं। बाढ़ के कारण मितेरी पुल, सुख्खा बंदरगाह और आसपास की संरचनाओं को बड़ा नुकसान पहुंचा है, जिससे नाका का भविष्य अनिश्चित हो गया है।
१६ भदौ, काठमांडू । गत वित्तीय वर्ष २०७२/८३ में कुल विदेशी व्यापार का २.१८ प्रतिशत यानी वस्तुएं रसुवागढी नाका से आयात की गई थीं। तुलना में आयात मात्रा कम थी। इसका कारण यह है कि २४ असार २०७२ को नेपाल-चीन सीमा पर बहने वाली भोटेकोशी (ल्हेन्दे) नदी में आई बाढ़ ने इस नाका को छह महीने बंद करना मजबूर किया। १७ पुष २०७२ को चीन ने बेलिब्रिज का संचालन शुरू करने के बाद व्यापार पुनः शुरू हुआ।
पिछले छह महीनों में रसुवागढी से ४५ अरब ७३ करोड़ रुपये के बराबर वस्तु आयात हुई जबकि निर्यात ८९ करोड़ ४६ लाख रुपये के बराबर था। नेपाल-चीन अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए वर्तमान में तीन नाके संचालित हैं, जिनमें रसुवागढी सबसे सुविधाजनक और नजदीकी नाका माना जाता है।
पिछले वर्ष तातोपानी नाका से ४७ अरब ४८ करोड़ रुपये के वस्तु आयात हुए, पर निर्यात शून्य था। दोनों नाकों के विकल्प के रूप में मुस्ताङ में स्थित कोरला नाका से पिछले वर्ष १४ अरब ४० करोड़ रुपये के वस्तु आयात हुए और निर्यात २० करोड़ ५५ लाख रुपये था। कोरला नाका में व्यापार वृद्धि का मुख्य कारण पिछले वर्ष असार में आई बाढ़ की वजह से रसुवागढी नाका का बंद होना था।
२०७१/७२ में रसुवागढी नाका से ८५ अरब २३ करोड़ रुपये के आयात और २ अरब ४ करोड़ के निर्यात हुए, जिसने कुल आयात का ४.७२ प्रतिशत और निर्यात का ०.७४ प्रतिशत हिस्सा रखा था।
भन्सार विभाग के निदेशक और सूचना अधिकारी किशोर बर्तौल के अनुसार रसुवागढी नेपाल-चीन व्यापार का सबसे विश्वसनीय व्यापारिक स्थल है। २०७२ पूर्व चीन ने तातोपानी को मुख्य भन्सार केंद्र बनाया था। उसके बाद तातोपानी नाका लंबे समय तक बंद रहा। अभी यह नाका पूरी तरह संचालित नहीं है। चीनी पक्ष विभिन्न कारण दिखाकर इस नाके के पूर्ण संचालन में इच्छुक नहीं दिखाई देता। इसी कारण रसुवागढी नेपाल-चीन अंतरराष्ट्रीय व्यापार का मुख्य आधार बन गया है।
२०७२ साल असार २४ की सुबह ३ बजे अचानक आई बाढ़ ने १८ से अधिक लोगों को अग्निहोत्रि बना दिया था। मितेरी पुल समेत अन्य मुख्य भौतिक संरचनाओं को बड़ा नुकसान हुआ था। प्रतिनिधि सभा विकास समिति के सभापति तथा तत्कालीन नेपाल इंटरमोडल विकास समिति के कार्यकारी निदेशक आशिष गजुरेल कहते हैं, ‘पिछले वर्ष बाढ़ ने इस भन्सार नाके सहित आसपास के गांवों को कड़ी चेतावनी दी थी, शायद हमने इसे गंभीरता से नहीं लिया।’
उन्होंने आगे कहा, १० भदौ २०७३ को यह दिन एक त्रासदीपूर्ण काला दिन के रूप में स्थापित हो गया, जिसने हजारों लोगों को ही नहीं, राज्य के अरबों और निजी क्षेत्र के खरबों निवेश को भी संकट में डाल दिया।
रसुवागढी नाका काठमांडू से गल्छी तक १३२ किलोमीटर दूर है। जिसमें रसुवा की ओर ४० किलोमीटर सड़क पूरी तरह बह गई है, इसका अनुमान पूर्वाधार विकास मन्त्रालय ने लगाया है। सड़क विभाग ने सड़क के विभिन्न हिस्सों का अध्ययन शुरू कर दिया है। मितेरी पुल से लेकर गल्छी तक लगभग २७ सड़क पुल बह चुके हैं, जिससे रसुवागढी नाका के भन्सार और आवागमन कार्यों की अनिश्चित स्थिति पैदा हुई है।
भन्सार विभाग के निदेशक बर्तौल ने कहा, ‘सरकार इस नाके का भविष्य निर्धारित करने का निर्णय लेगी। यह एक अंतरराष्ट्रीय प्रमुख व्यापारिक नाका है, इसलिए सरकार सभी पक्षों का अध्ययन करके निर्णय लेगी और विभाग उसी के अनुसार काम करेगा।’
विभाग के अनुसार इस भन्सार में कार्यरत १५ से अधिक कर्मचारी अभी संपर्क विहीन हैं। विभाग की प्राथमिकता फिलहाल संपर्क विहीन कर्मचारियों की खोज और उद्धार है। उन कर्मचारियों की स्थिति पता लगाने के लिए विभिन्न टीमों को लगाया गया है।
रसुवागढी नाका भन्सार का ७० वर्ष का इतिहास है। प्राचीन काल से यह नाका नेपाल और तिब्बत के बीच व्यापार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का प्रमुख मार्ग रहा है। राजस्व परिचालन के उद्देश्य से २०१३ साल में रसुवागढी में रसुवा भन्सार कार्यालय स्थापित किया गया था।
चीन सरकार ने रसुवागढी को २०७५ में ही अन्तरराष्ट्रीय नाका का दर्जा दिया, जिससे इसकी महत्ता अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और बढ़ गई। इस नाके के माध्यम से नेपाल मुख्य रूप से विद्युत सामग्री, तैयार वस्त्र, जूते-चप्पल, निर्माण सामग्री, कृषि उत्पादन, दूरसंचार उपकरण, वाहन और औद्योगिक मशीनरी आयात करता है।
नेपाल से गलैंचा, हस्तशिल्प सामग्री, ऊनी कपड़ा, जड़ी-बूटी, चाउचाउ, तांबे के बर्तन और कृषि उत्पाद चीन की ओर निर्यात किए जाते थे। यह नाका हाल ही में भारतीय तीर्थयात्रियों के लिए कैलाश मानसरोवर यात्रा का सुविधाजनक मार्ग भी रहा है। इस बार यात्रा कर रहे सैकड़ों पर्यटक बाढ़ के कारण संपर्क विहीन हो गए हैं।
रसुवागढी नाका नेपाल की अर्थव्यवस्था और रोजगार सृजन का महत्वपूर्ण केंद्र है। होटल, परिवहन, कंटेनर लोड-अनलोड, भन्सार एजेंट और अन्य छोटे व्यवसायों के माध्यम से इस नाके ने हजारों नागरिकों को रोजगार दिया है।
पिछले वर्ष की बाढ़ में रसुवागढी में मौजूद सुख्खा बंदरगाह भी बह गया। २०७२ की बाढ़ ने नव निर्मित भन्सार भवन को ८१ लाख ५९ हजार रुपये का नुकसान पहुंचाया, जबकि सुख्खा बंदरगाह को ९१ करोड़ २० लाख रुपये का नुकसान हुआ। भन्सार कार्यालय, यार्ड में रखे माल, वाहन, कंटेनर और मशीनरी उपकरणों को लगभग ७० करोड़ ५१ लाख रुपये का नुकसान हुआ माना जाता है।
विकास समिति के सभापति आशिष गजुरेल के अनुसार टिमुरे सुख्खा बंदरगाह कुल ३ अरब रुपये की परियोजना थी, जिसमें २ अरब रुपये खर्च हो चुके थे। अधिकांश संरचनाएं तैयार हो चुकी थीं और फिनिशिंग चरण में जाने की योजना थी। लेकिन पिछली बाढ़ ने बड़ा नुकसान पहुंचाने के बाद अतिरिक्त निवेश नहीं हो सका।
अब ये संरचनाएं राज्य के लिए बड़ी रकम के नुकसान और कर्मचारियों के लापता होने का कारण बनी हैं। निजी निवेश की हानि का लेखा-जोखा अभी बाकी है। इसलिए इस ऐतिहासिक सीमा और भन्सार केंद्र को पुनः जीरो से शुरू करना पड़ेगा।