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नेपाल-तिब्बत बाढ़: जलवायु परिवर्तन की ‘महत्वपूर्ण भूमिका’, अन्य कारण क्या हो सकते हैं?

त्रिशूली में आई बाढ़ को देखते हुए लोग

तस्वीर स्रोत, NurPhoto via Getty Images

प्रकाशित

पढ़ने का समय: ४ मिनट

नेपाल और तिब्बत के सीमावर्ती क्षेत्र में विनाशकारी बाढ़ और चट्टानों सहित हिमस्खलन की घटना में जलवायु परिवर्तन ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, यह एक वैज्ञानिक अध्ययन में पता चला है।

अध्ययन की सहलेखिका और इम्पीरियल कॉलेज लंदन की जलवायु वैज्ञानिक डॉ. फ्रीडरिक ओटो ने कहा, “इस आपदा के लिए मानव-निर्मित जलवायु परिवर्तन ने निस्संदेह भूमिका निभाई है।”

वर्ल्ड वेदर एट्रिब्यूशन द्वारा किए गए अध्ययन के अनुसार यह आपदा बढ़ती हुई तापमान, सिकुड़ती हिमनदियों, पिघलता पर्माफ्रॉस्ट (गहरा जमा हुआ ठंडा जमिन) और पूर्व से मौजूद भौगर्भिक कमजोरियों के संयोजन से उत्पन्न “मिश्रित घटना” है।

नेपाली अधिकारियों ने तिब्बत होते हुए भोटेकोशी और निचले त्रिशूली नदी क्षेत्र में आई बाढ़ में लापता लोगों की संख्या संशोधित कर 6,150 कर दी, इसी बीच यह निष्कर्ष प्रकाशित किया गया।

पहले सरकारी एजेंसियों ने लापता लोगों की संख्या केवल 5,179 बताई थी। नेपाली सरकार के आंकड़ों के अनुसार मृतकों की संख्या लगभग 1,400 है। हजारों लोग विस्थापित हो चुके हैं।