
अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने आप्रवासियों को तीसरे देशों में भेजने का मार्ग प्रशस्त किया
१४ असोज, वाशिंगटन। अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन को तृतीय देशों में आप्रवासियों को तेज़ी से निर्वासित करने का रास्ता अस्थायी रूप से खोल दिया है। मंगलवार को जारी एक पृष्ठ के आदेश के माध्यम से सर्वोच्च न्यायालय ने निचली अदालत द्वारा रोकी गई तीसरे देश में निर्वासन नीति को अस्थायी पुन: लागू करने की अनुमति दी है। हालांकि, सर्वोच्च न्यायालय ने इस नीति की वैधता पर अंतिम निर्णय नहीं दिया है। अदालत ने इस मामले की जल्द सुनवाई का निर्णय लेते हुए आगामी दिसंबर तक मौखिक बहस करने का ऐलान किया है। इसके बाद अगली वर्ष इस विषय पर अंतिम फैसला आने की उम्मीद है।
इस मुद्दे ने राष्ट्रपति के आप्रवासन और निर्वासन संबंधी अधिकारों के दायरे पर महत्वपूर्ण संवैधानिक सवाल भी उठाए हैं। अदालत के मंगलवार के आदेश में न्यायाधीशों की मत संख्या उल्लेखित नहीं है, तथा आदेश पर कोई हस्ताक्षर नहीं हैं, जो ऐसे आकस्मिक मामलों में सर्वोच्च न्यायालय की सामान्य प्रथा है। दिसंबर में होने वाली सुनवाई में ट्रम्प प्रशासन का सवाल होगा कि क्या वे आप्रवासियों को उस तीसरे देश में भेज सकते हैं, जिनका उनके अपने देश से कोई संबंध नहीं है। प्रशासन ने इससे पहले लाइबेरिया, इक्वेटोरियल गिनी, कोस्टारिका, होंडुरास और मध्य अफ्रीकी गणराज्य जैसे देशों में आप्रवासियों को भेजा था।
इन देशों में कुछ पर मानवाधिकार उल्लंघन के भी आरोप लगते रहे हैं। इसलिए, तीसरे देशों में भेजे गए आप्रवासियों को उत्पीड़न या यातना का खतरा हो सकता है, इस वजह से इस नीति का विरोध हो रहा है। सर्वोच्च न्यायालय के तीन उदारवादी न्यायाधीशों ने सरकार के अनुरोध को खारिज करने की वकालत की है। दिसंबर में होने वाली सुनवाई के लिए अदालत ने दोनों पक्ष के वकीलों को मुख्य रूप से दो मुद्दों पर केंद्रित होने का निर्देश दिया है। पहला, क्या निचली अदालत के न्यायाधीशों को तेज निर्वासन पर रोक लगाने का अधिकार था या नहीं। दूसरा, क्या तीसरे देश में निर्वासन नीति अमेरिकी संविधान और यातना-प्रतिबंधक अंतरराष्ट्रीय कानूनी संरक्षण के अनुरूप है या नहीं।
सरकार के समर्थन में, अमेरिकी होमलैंड सिक्योरिटी विभाग के मुख्य कानूनी अधिकारी जेम्स पर्सिवल ने इस आदेश को प्रशासन की “जीत” बताया है। उन्होंने कहा कि यह दिन अपराध में संलग्न आप्रवासियों और “खुले सीमा” समर्थकों के लिए खराब है। साथ ही उन्होंने उन आप्रवासियों के लिए सरकारी योजना की ओर संकेत किया, जो स्वेच्छा से अमेरिका छोड़ना चाहते हैं, जिसमें 3,000 डॉलर और घर लौटने के लिए हवाई टिकट प्रदान किए जाते हैं। परंतु आप्रवासियों के पक्ष में लड़ने वाली नेशनल इमिग्रेशन लिटिगेशन एलायंस की वकील ट्रिना ए. रियलमुटो ने इस आदेश को “विनाशकारी परिणाम” बताया है। उनके अनुसार यह आदेश प्रशासन को उन तृतीय देशों में लोगों को वापस भेजने की अनुमति देता है जहाँ उत्पीड़न या यातना का खतरा हो। फिर भी, रियलमुटो का कहना है कि मंगलवार का आदेश इस नीति की वैधता का निर्णय नहीं करता। उनका कहना है कि नीति की वैधता पर विस्तृत बहस दिसंबर में होगी और तभी इस मामले का अंतिम नतीजा सामने आएगा।