
कांग्रेस हरित रंग में अपनी शक्ति और पहचान तलाश रही है
समाचार संक्षेप की समीक्षा के पश्चात तैयार किया गया। चित्रकारों ने हरित रंग को सकारात्मक ऊर्जा, मानसिक शांति, प्रकृति के साथ आत्मीय संबंध और जलवायु परिवर्तन के प्रति जागरूकता का प्रतीक बताया है। नेपाली कांग्रेस ने अपने चुनाव चिन्ह पेड़ के साथ हरित रंग को पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन की जिम्मेदारी का संदेश देने के लिए राजनीतिक पहचान के रूप में प्रस्तुत किया है। कांग्रेस ने ‘द ग्रीन टेबल’ और ‘ग्रीन रन’ जैसे रचनात्मक कार्यक्रमों के माध्यम से पारंपरिक राजनीतिक बहसों से बाहर निकलकर पर्यावरण और सतत विकास के मुद्दों को प्राथमिकता दी है। १२ साउन, काठमांडू। हरित रंग को बहुत से लोग प्रकृति का रंग मानते हैं, लेकिन कलाकारों की दृष्टि में इसका अर्थ उससे कहीं अधिक है। हरित रंग लोगों को मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और प्रकृति के साथ गहरा संबंध महसूस कराता है। वरिष्ठ चित्रकार किरण मानन्धर बताते हैं कि आमतौर पर शांति का प्रतीक नीला रंग माना जाता है, फिर भी हरित रंग भी समान रूप से ठंडक और संतुलन का अनुभव कराता है। वे कहते हैं, ‘हरियाली मन को शांति देती है, ऊर्जा प्रदान करती है और प्रकृति से चो ने वाला संबंध गहरा करती है।’ मानन्धर के अनुसार, हरित रंग को केवल दृश्य सौंदर्य के रूप में देखना पर्याप्त नहीं है; यह सकारात्मक सोच, जीवन शक्ति और प्रकृति के प्रति जुड़ाव को भी अभिव्यक्त करता है। वे बताते हैं कि नेपाल की पहचान भी हरियाली के साथ घनीभूत है। ‘नेपाल की पहचान भी हरियाली से गहराई से जुड़ी है। ‘‘हरियो वन नेपाल को धन’’ यह कहावत प्रचलित है,’ मानन्धर कहते हैं, ‘जो हरित रंग और नेपाल की प्राकृतिक संपदा के बीच के संबंध को दर्शाता है।’ एक अन्य चित्रकार महेश आचार्य हरित रंग को आध्यात्मिक और दार्शनिक अर्थों में भी देखते हैं। उनके अनुसार, बौद्ध धर्म में प्रयुक्त प्रार्थना ध्वज के पाँच रंग ब्रह्माण्ड के पाँच तत्वों का प्रतिनिधित्व करते हैं। इनमें हरित रंग पृथ्वी, प्रकृति और जीवन से विशेष जुड़ा होता है। ‘पंचतत्व से पृथ्वी की सृष्टि मानी जाती है। बौद्ध प्रार्थना ध्वज में नील, सफेद, हरित, लाल और पीला रंग होते हैं,’ आचार्य कहते हैं, ‘ये सभी रंग ब्रह्माण्ड के पाँच तत्वों का संकेत हैं, जिनमें हरित रंग प्राकृतिक, पृथ्वी और जीवन से जुड़ा है।’ उनकी दृष्टि में आज विश्व को जलवायु परिवर्तन जैसी गंभीर समस्या का सामना करना पड़ रहा है, जिसके प्रमुख कारणों में वन्य क्षेत्र के विनाश और हरियाली की कमी भी शामिल है। आचार्य कहते हैं, ‘आज विश्व जो जलवायु परिवर्तन झेल रहा है, उसके पीछे वन-वनस्पति की कटाई और हरियाली की कमी सबसे बड़े कारणों में से एक है। इसलिए हरित रंग केवल एक रंग नहीं, पृथ्वी को बचाने की चेतना का प्रतीक बन गया है।’ आज हरित रंग केवल एक रंग के रूप में सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रकृति, जीवन, आशा और धरती के भविष्य के प्रति जिम्मेदारी का संकेत देता है। जलवायु परिवर्तन के खतरों के बीच पूरी दुनिया के लिए समग्र पर्यावरण की रक्षा मानवता की साझा जिम्मेदारी बन गई है। इस परिवर्तित संदर्भ को स्वीकारते हुए नेपाली कांग्रेस ने हाल ही में हरित रंग को अपनी ‘दृश्य पहचान’ के रूप में अपनाया है। कांग्रेस ने पार्टी के कार्यक्रमों और नई अवधारणाओं के जरिए हरित रंग को केवल चुनाव चिन्ह से परे प्रकृति और जलवायु परिवर्तन से जोड़ने का प्रयास किया है। कांग्रेस ने कुछ महीने पहले केन्द्रीय नीति, अनुसंधान एवं प्रशिक्षण विभाग के माध्यम से ‘द ग्रीन टेबल’ नामक निरंतर अंतःक्रियाओं को संचालित करना शुरू किया है। पार्टी के संस्थापक नेता बीपी कोइराला की ४४वीं स्मृति दिवस पर ६ साउन को कांग्रेस ने ‘ग्रीन रन’ नामक दौड़ प्रतियोगिता भी आयोजित की। कांग्रेस उपसभापति विश्वप्रकाश शर्मा इसे केवल राजनीतिक ब्रांडिंग नहीं, बल्कि समय की आवश्यकता के रूप में देखते हैं। उनका कहना है कि विश्व जलवायु परिवर्तन की मार झेल रहा है, जहां हिमालय, नदियाँ, वनस्पति सहित समग्र प्रकृति संरक्षण मानव जाति की साझा जिम्मेदारी बन गई है। ‘आज जलवायु परिवर्तन के प्रभाव से पूरी दुनिया जूझ रही है। इस परिस्थिति में प्रकृति संरक्षण, हिमालय, नदियाँ, वन और पर्यावरण की रक्षा मानव जाति की साझा जिम्मेदारी है,’ कांग्रेस उपसभापति विश्वप्रकाश शर्मा कहते हैं, ‘इसी संदेश को केंद्र में रखते हुए हमने प्रकृति के प्रतीक के रूप में हरित रंग चुना है।’ वे कहते हैं कि केवल कांग्रेस के चुनाव चिन्ह से हरित रंग को जोड़कर देखना उचित नहीं। लगभग ६५-६६ साल पहले जननायक बीपी कोइराला ने चुनाव चिन्ह के रूप में पेड़ क्यों चुना, इसे उस दृष्टिकोण से समझने की जरूरत है। ‘उनकी दूरदर्शिता वहाँ निहित है। वन-वनस्पति का राष्ट्रीयकरण, पेड़ को चुनाव चिन्ह बनाना और प्रकृति को महत्व देना आज जलवायु परिवर्तन के संदर्भ में और भी प्रासंगिक हो गया है,’ उपसभापति शर्मा कहते हैं। वे हरित रंग की ब्रांडिंग को राजनीतिक नजरिए से अधिक पर्यावरण संरक्षण और प्रकृति की जिम्मेदारी के रूप में समझने पर जोर देते हैं। ‘जंगल हरा है, पेड़ हरे हैं और हमारा चुनाव चिन्ह भी हरा पेड़ है। आज जलवायु परिवर्तन से लड़ने के लिए विश्व को हरियाली की आवश्यकता है,’ वे कहते हैं, ‘इसलिए इसे राजनीतिक कोण से देखने के बजाय पर्यावरण संरक्षण और प्रकृति की जिम्मेदारी के रूप में समझना चाहिए।’ महामंत्री प्रदीप पौडेल भी हरित रंग को केवल चुनाव चिन्ह तक सीमित न मानते हुए इसे पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन से जुड़ा विषय बताते हैं। उसी के अनुसार कांग्रेस ने जलवायु परिवर्तन को विशेष प्राथमिकता दी है। ‘हरित रंग केवल चुनाव चिन्ह तक सीमित नहीं है, यह पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन से जुड़ा विषय भी है,’ महामंत्री पौडेल कहते हैं, ‘इसी लिए हमने जलवायु परिवर्तन को विशेष प्राथमिकता दी है।’ चित्रकार आचार्य ने भी बातचीत में कांग्रेस के संस्थापक नेता बीपी कोइराला की सोच को याद किया। बीपी के लेखन और विचारों में वन, प्रकृति और हरियाली के प्रति संवेदनशीलता देखी गई है। ‘बीपी कोइराला ने अपने कई कार्यों और विचारों में वन, प्रकृति और हरियाली के प्रति गहरा लगाव दिखाया है,’ चित्रकार आचार्य कहते हैं, ‘इसलिए हरित रंग को केवल रंग न मानकर, जीवन, ऊर्जा, प्रकृति और नेपाल की पहचान से जुड़ा प्रतीक समझा जाना चाहिए।’ कांग्रेस महामंत्री पौडेल के अनुसार, कांग्रेस ने राजनीति को रचनात्मक दिशा में ले जाने का प्रयास किया है। वे पारंपरिक राजनीतिक बहसों से बाहर होकर नई रचनात्मक गतिविधियों और विषयगत वार्तालाप को प्राथमिकता देना चाहते हैं। ‘हम राजनीति को रचनात्मक दिशा में ले जाना चाहते हैं। इसके लिए पारंपरिक राजनीतिक बहसों से बाहर निकलकर नई रचनात्मक क्रियाओं और विषयगत चर्चा को प्राथमिकता देना हमारा उद्देश्य है,’ पौडेल कहते हैं। ‘द ग्रीन टेबल’ के माध्यम से समसामयिक विषयों पर विशेषज्ञों के साथ चर्चा कर जानकारी प्राप्त करना और उसके आधार पर नीतियाँ एवं योजनाएँ बनाना पार्टी की सोच है। ‘द ग्रीन टेबल कांग्रेस की नई पहचान भी है। यह न केवल हमारे चुनाव चिन्ह पेड़ से सम्बंध स्थापित करता है,’ महामंत्री पौडेल कहते हैं, ‘बल्कि जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी देता है।’ हरित रंग को शांति, शालीनता, समृद्धि, हरियाली और सकारात्मक सोच का प्रतीक बताते हुए उन्होंने इसे निराशा नहीं, बल्कि आशा, विकास और भविष्य के प्रति विश्वास का चिन्ह माना है। महामंत्री पौडेल ने कहा कि वे हरित रंग को कांग्रेस की विशिष्ट पहचान के रूप में स्थापित करने का प्रयास कर रहे हैं। ‘चुनाव चिन्ह हरा पेड़ है इसलिए हरित रंग को हमारी विशेष पहचान के तौर पर स्थापित करने का प्रयास कर रहे हैं,’ उन्होंने कहा, ‘यह हमारे चुनाव चिन्ह और राजनीतिक पहचान से सीधे जुड़ा है।’