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प्रधानमन्त्री कार्की – Online Khabar

प्रधानमंत्री सुशीला कार्की का राष्ट्र के नाम संबोधन

समाचार सारांश

AI द्वारा उत्पन्न। सम्पादकीय समीक्षा की गई।

  • प्रधानमंत्री सुशीला कार्की ने पद छोड़ने से पहले राष्ट्र के नाम संबोधन में भाद्र २३ और २४ के जेन्जी आन्दोलन की याद दिलाई।
  • उन्होंने जेन्जी आन्दोलन में शहीद और घायलों को याद करते हुए कहा, ‘आज मैं आप सभी के समक्ष उपस्थित होकर मेरा मन थोड़ा भारी महसूस कर रहा है।’
  • प्रधानमंत्री कार्की ने तोड़फोड़ और आगजनी से हुए नुकसान पर दुःख जताते हुए सभी को एकजुट होकर फिर से उठने का आह्वान किया।

१२ चैत, काठमांडू। प्रधानमंत्री सुशीला कार्की ने पद छोड़ने से एक दिन पहले राष्ट्र के नाम एक संबोधन किया है।

उन्होंने भाद्र २३ और २४ को हुए जेन्जी आन्दोलन के दौरान भय और अनिश्चितता के बीच सत्ता संभालने की बात याद की है।

उन्होंने जेन्जी आन्दोलन में शहीद और घायल हुए लोगों को याद करते हुए कहा, ‘‘आज जब मैं आप सभी के सामने उपस्थित हूँ तो मेरा मन कुछ भारी भी हुआ है। मैं याद कर रही हूँ – वे नन्हे बच्चे जिन्हें भाद्र २३ और २४ की घटनाओं में अपनी जान गंवानी पड़ी, वे युवा जो आजीवन विकलांगता से जूझ रहे हैं, जिन्होंने परिवार, सपने और सहारा खोया है।’’

उन्होंने आन्दोलन में जान गंवाने वालों को अकेला महसूस न करने का भरोसा दिलाया।

‘‘सभ्य और न्यायपूर्ण शासन की पुकार करते हुए, मैं जिंदगी की कुर्बानी देने वाले सभी शहीदों को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करती हूँ। घायलों योद्धाओं के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना करती हूँ,’’ उन्होंने कहा, ‘‘जो परिवार सहारा खो चुके हैं, मैं कहना चाहती हूँ – आप अकेले नहीं हैं। तोड़फोड़ और आगजनी से ऐतिहासिक धरोहरों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और निजी संपत्तियों को हुए नुकसान पर गहरा दुख व्यक्त करती हूँ।’’

उन्होंने आगे कहा, ‘‘हम फिर से उठेंगे। मैं सभी से एकजुट होने का आह्वान करती हूँ। जब मैंने भाद्र २७ को यह जिम्मेदारी संभाली थी, तो मेरे मन में डर और असमंजस था। लेकिन देश संकट में था, इसलिए आशा की एक लौ जलाने का आत्मविश्वास लेकर मैं यहाँ आई थी।’’

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