
धर्म गौतम ने ‘बीपी और विद्रोह के वो दिन’ पुस्तक का अनावरण किया
इलाम के धर्म गौतम ने पञ्चायती व्यवस्था के विरुद्ध बीपी कोइराला द्वारा आह्वान किए गए सशस्त्र संघर्ष की कथा समाहित पुस्तक ‘बीपी और विद्रोह के वो दिन’ का सार्वजनिक अनावरण किया है। पब्लिशर्स की सीईओ कल्पना ढकाल के अनुसार, इस पुस्तक में गौतम ने अपने व्यक्तिगत एवं राजनीतिक संस्मरणों को प्रमुखता से शामिल किया है। 2029 साल में भारत निर्वासन गए गौतम सशस्त्र संघर्ष के दौरान हथियारों के साथ गिरफ्तार हुए थे, जबकि स्वदेश लौटने के दौरान भी उन्होंने चार वर्ष का बंदी जीवन बिताया।
२२ साउन, काठमाडौं। पञ्चायती व्यवस्था के विरुद्ध बीपी कोइराला द्वारा आवाज़ित सशस्त्र संघर्ष की कथा को समेटते हुए इलाम के धर्म गौतम ने ‘बीपी और विद्रोह के वो दिन’ नामक पुस्तक लॉन्च की है। बीपी ने मेलमिलाप की नीति अपनाते हुए 2033 साल में स्वदेश लौटने से पहले अपनी तीन विश्वसनीय साथियों को नेपाल भेजा था, जिनमें से एक धर्म गौतम इलाम के थे। उन्होंने प्रकाशक किताब पब्लिशर्स की सीईओ कल्पना ढकाल को अपनी व्यक्तिगत व राजनीतिक स्मृतियों को पुस्तक में सम्मिलित करने की जानकारी दी।
गौतम बीपी कोइराला के निकटस्थ थे, जब वे 2029 साल में भारत निर्वासन गए थे। बीपी द्वारा पञ्चायती व्यवस्था के अन्त के लिए आह्वान किए गए सशस्त्र संघर्ष में वे भी भागीदार थे। इसी क्रम में भारत के पूर्णिया में हथियारों के साथ उन्हें गिरफ्तार किया गया। बीपी के निर्देशानुसार 2033 के कार्तिक में स्वदेश लौटते समय फिर गिरफ्तार होने पर उन्होंने लगभग चार वर्ष बंदी जीवन व्यतीत किया। गौतम ने इलाम से आरंभ हुई अपनी राजनीतिक यात्रा कैसे भारत के नक्सलबाड़ी, बनारस, बिहार होते हुए काठमांडू तक पहुँची, इसकी घटनाओं का प्रकाशन पुस्तक में किया है।