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विद्युत् महसुल में छूट, पर १३ प्रतिशत भ्याट का बोझ बरकरार

समाचार सारांश

संपादकीय समीक्षा के साथ।

  • सरकार ने सिंचाई और पेयजल के विद्युत् महसूल पर भी १३ प्रतिशत मूल्यवर्धित कर (भ्याट) लगाया है।
  • आंतरिक राजस्व विभाग ने घरेलू उपभोक्ताओं के अलावा सभी पर १३ प्रतिशत भ्याट लागू होने की पुष्टि की है।
  • पेयजल एवं स्वच्छता उपभोक्ता महासंघ ने सरकार से आधारभूत सेवा में लगाए गए इस कर को हटाने की मांग की है।

२२ साउन, काठमाडौं। सरकार ने किसान और जनता को लाभ पहुंचाने के लिए विद्युत महसूल में छूट दी है, लेकिन सिंचाई और पेयजल महसूल पर १३ प्रतिशत भ्याट लागू किया गया है।

किसानों का खर्च कम करने और कृषि उत्पादन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सरकार सहुलियत दर पर विद्युत उपलब्ध कराती है। सिंचाई हेतु उपयोग होने वाले विद्युत पर डिमांड शुल्क नहीं लगता और प्रति यूनिट २ रुपये ५० पैसे की सहुलियत दर है। विद्युत खपत के आधार पर महसूल में ५० प्रतिशत तक अनुदान दिया जाता है, जो नेपाल विद्युत प्राधिकरण के माध्यम से अर्थ मंत्रालय द्वारा प्रदान किया जाता है।

इसके अतिरिक्त, विभिन्न प्रदेश और स्थानीय तह भी सिंचाई के विद्युत महसूल में अनुदान देते हैं। पेयजल के विद्युत महसूल पर भी सहुलियत लागू है। सामुदायिक पेयजल में उपयोग होने वाले विद्युत पर डिमांड शुल्क छूट है और प्रति यूनिट ४ रुपये २० पैसे ही चार्ज लिया जाता है।

तथापि, सरकार द्वारा दी गई ये सहुलियत के बावजूद सिंचाई और पेयजल महसूल पर १३ प्रतिशत भ्याट लगाया गया है। साउन १ से घरेलू उपभोक्ताओं पर ५ प्रतिशत भ्याट और अन्य सभी पर १३ प्रतिशत भ्याट लागू है। आंतरिक राजस्व विभाग ने विद्युत और पेयजल महसूल पर यह भ्याट लागु होने की पुष्टि की है।

आर्थिक ऐन के अनुसार आंतरिक राजस्व विभाग ने मूल्यवर्धित कर नियमावली में संशोधन किया है और विद्युत विषयक भ्याट कार्यविधि बनाई है। ५० यूनिट तक खपत करने वाले घरेलू उपभोक्ताओं पर ५ प्रतिशत भ्याट लागू है, जबकि अन्य सभी पर १३ प्रतिशत भ्याट लगेगा, विभाग के निदेशक प्रकाश पौडेल ने बताया।

नेपाल विद्युत प्राधिकरण कृषि और सिंचाई के लिए प्रति यूनिट २ रुपये ५० पैसे पर विद्युत प्रदान करता है। सिंचाई हेतु उपयोग होने वाले विद्युतीय मोटर और पंपों पर अन्य ग्राहकों के मुकाबले कम महसूल लगता है, जिससे किसान डिजेल और पेट्रोल से संचालित सिँचाई की बजाय विद्युत सिँचाई को अपनाने लगे हैं।

घरेलू उपभोक्ताओं के ५० यूनिट से ऊपर खपत पर ५ प्रतिशत भ्याट लगने के बावजूद गैर-घरेलू, औद्योगिक और कृषि/सिंचाई हेतु विद्युत उपयोग पर १३ प्रतिशत भ्याट लागू है।

विशेष रूप से तराई और मधेश के जिलों में भूमिगत पानी निकाल कर सिंचाई करने वाले किसान विद्युत पंपों का व्यापक उपयोग कर रहे हैं। अतिरिक्त कर लगने से उनकी मासिक खर्च बढ़ेगी। पहाड़ी क्षेत्र में भी लिफ्ट सिंचाई का प्रचलन बढ़ रहा है।

सरकार ने विद्युत सिंचाई को बढ़ावा देकर डिजेल का उपयोग कम करने की नीति अपनाई है, लेकिन उसी क्षेत्र में कर का बोझ बढ़ाना नीति में विरोधाभास दिखाता है। वर्षा ऋतु में विद्युत खपत बढ़ाने की नीति के दौरान सिंचाई क्षेत्र में कर बढ़ाने से विद्युत उपयोग प्रोत्साहन प्रभावित हो सकता है।

देश भर के हजारों किसान विद्युत पंप के माध्यम से सिंचाई कर रहे हैं। खासकर धान, सब्जी और नगदी फसल उत्पादन वाले क्षेत्रों में विद्युत सिंचाई महत्वपूर्ण आधार बन चुका है। किसानों का कहना है कि छूट वाले महसूल पर भी भ्याट लगने से उत्पादन लागत बढ़ेगी और इसका असर कृषि उत्पाद के मूल्य पर पड़ेगा।

सरकार ने भ्याट लगाने के बाद ऊर्जा, जलस्रोत तथा सिंचाई मंत्रालय विद्युत महसूल संरचना की पुनर्समीक्षा की तैयारी कर रहा है। ५० यूनिट तक भ्याट सीमा बढ़ाकर १०० से १५० यूनिट तक पहुंचाने का भी योजना है। परंतु इस स्थिति में भी सिंचाई और पेयजल पर १३ प्रतिशत भ्याट लागू रहेगा।

इससे विद्युत खपत बढ़ाने और उपभोक्ताओं को राहत देने दोनों असर पड़ेगा, ऊर्जा मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है। वर्षा और सूखा ऋतुओं के लिए अलग-अलग महसूल दर निर्धारित कर उपभोक्ताओं को राहत देने विषय पर भी चर्चा चल रही है।

पेयजल एवं स्वच्छता उपभोक्ता महासंघ ने भ्याट और महसूल में छूट देने की मांग की है। महासंघ के अध्यक्ष राजेन्द्र अर्याल ने बताया कि वर्तमान में पेयजल उपभोक्ता समितियों एवं प्रबंधन बोर्डों पर १३ प्रतिशत भ्याट लागू है, जबकि इन संस्थाओं को विद्युत महसूल में भी छूट मिलनी चाहिए।

महासंघ ने प्रधानमंत्री और ऊर्जा मंत्री को ज्ञापन भी सौंपा है, जिसमें पेयजल एवं स्वच्छता उपभोक्ता संस्थाओं से लिए गए विद्युत महसूल पर १३ प्रतिशत भ्याट हटाने और छूट की व्यवस्था करने की अपील की गई है।

महासंघ ने संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा २८ जुलाई २०१० को पेयजल और स्वच्छता को मानव अधिकार घोषित किए जाने का उल्लेख करते हुए कहा कि नेपाल संविधान की धारा ३५(४) के तहत प्रत्येक नागरिक को स्वच्छ पेयजल और स्वच्छता तक पहुंच का अधिकार है, इसलिए सरकार को भ्याट नहीं लगाना चाहिए।

गैर-लाभकारी सामुदायिक संस्थाओं द्वारा पेयजल उत्पादित कर वितरित करने वाली समितियों एवं समूहों को वाणिज्यिक संस्थाओं की तरह मानकर १३ प्रतिशत भ्याट लगाने पर महासंघ ने आपत्ति जताई है।

महासंघ ने कहा कि महंगे विद्युत महसूल और भ्याट के कारण पेयजल एवं स्वच्छता उपभोक्ता संस्थाएं गंभीर रूप से प्रभावित हैं। इसलिए महासंघ ने पेयजल विद्युत महसूल में भ्याट छूट देने, महसूल सिंचाई से कम करने तथा सुरक्षित, पर्याप्त और सुलभ पेयजल प्रबंधन के लिए सरकार से मांग की है। वर्तमान में देश भर में ४५ हजार पेयजल एवं स्वच्छता उपभोक्ता संस्थाएं सक्रिय हैं।