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गोर्खा भर्ती मामले में भारत की नीति: नेपाल से बिना बातचीत चुप्पी साधे रहना

खुकुरी हाथ में लिए और काले पोशाक और सैनिक रुमाल सिर पर बांधे गोर्खा सैनिक कतार में

तस्वीर स्रोत, Getty Image

भारतीय सेना के एक सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि नई दिल्ली गोर्खा भर्ती के मुद्दे को नेपाल के सामने अपनी तरफ से नहीं उठाएगा और “काठमांडू की नीति पर इस मुद्दे का निर्भर रहना अब तय है।” यह टिप्पणी इस मुद्दे की जटिलता को दर्शाती है।

भारतीय सेना में नई भर्ती प्रक्रिया के तहत पांच साल पहले ‘अग्निपथ योजना’ शुरू करने के बाद नेपाली नागरिक भी इसमें शामिल होने लगे। लेकिन नेपाल ने इस भर्ती प्रक्रिया से असहमति जताते हुए अपनी तरफ से भारतीय गोर्खा भर्ती को रोक दिया था।

लगभग डेढ़ महीने पहले बीबीसी से बातचीत में विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने कहा था कि नेपाल, ब्रिटेन और भारत के बीच गोर्खा भर्ती पर त्रिपक्षीय संधि के प्रति प्रतिबद्ध हैं और यदि इस संधि को पुनः समीक्षा की आवश्यकता हो तो भारत से औपचारिक प्रस्ताव आने पर चर्चा के लिए नेपाल तैयार है।

नेपाल में पूर्व भारतीय गोर्खा सैनिक संगठनों ने नेपाली नागरिकों के लिए भारतीय गोर्खा सेना में भर्ती की मांग सरकार से करते आ रहे हैं।

शनिवार को भारतीय सेना के पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) अनिल चौहान ने कहा कि अग्निवीर योजना लागू होने के बाद भारतीय नागरिकों के समान व्यवहार नेपाली गोर्खाओं के साथ भी होना चाहिए। नेपाली और भारतीयों के लिए अलग-अलग व्यवहार अस्वीकार्य है।