
एनसेल का बयान: व्यवसायियों पर कार्रवाई से निवेशकों में डर पैदा हुआ है
एनसेल के अधिकारियों ने अर्थमंत्री डा. स्वर्णिम वाग्ले के साथ हुई बैठक में कहा कि व्यवसायियों पर हो रही कार्रवाई और फौजदारी मामलों ने निवेशकों में डर उत्पन्न कर दिया है। एनसेल ने कर निर्धारण प्रक्रिया और आयकर अधिनियम की धारा ५७ के प्रावधानों की पुनः समीक्षा के लिए सरकार से अनुरोध किया है। कंपनी ने फ्रीक्वेंसी वितरण और विदेशी मुद्रा सटही सुविधा में प्रतिस्पर्धी कंपनियों के समान व्यवहार सुनिश्चित करने के लिए भी सरकार को आग्रह किया है। २५ साउन, काठमांडू।
बहुराष्ट्रीय कंपनी के प्रतिनिधि और अर्थमंत्री डा. स्वर्णिम वाग्ले के बीच हुई बैठक में एनसेल ने व्यवसायियों पर हो रही कार्रवाई पर प्रश्न उठाया। बैठक में एनसेल की ओर से मुख्य कॉर्पोरेट एवं नियामक अधिकारी डिल्लीराम श्रेष्ठ उपस्थित थे। उन्होंने अर्थमंत्री को बताया, “व्यवसायियों पर कार्रवाई से सुरक्षा संबंधी सवाल उठे हैं। हम भी इस विषय में प्रभावित पक्ष हैं। एक बैंक और वित्तीय संस्थान द्वारा संचालित लिलाम प्रक्रिया में शामिल होने के कारण हमारे निवेशकों पर कार्रवाई और फौजदारी मामले चलाए जाने की खबरें आई हैं।”
एनसेल ने निवेश प्रोत्साहन हेतु पूर्वानुमान योग्य कर प्रणाली लागू करने का सरकार से आग्रह किया है। कंपनी ने कर अधिकारियों की सिफारिश के अनुसार कर निर्धारण प्रक्रिया को चार वर्षों की बजाय एक वर्ष के लिए सीमित करने की मांग की है। श्रेष्ठ ने कहा, “आयकर अधिनियम की धारा ५७ में ऑफशोर निवेश को अवैध नहीं मानने या उसकी समीक्षा किए जाने की हमारी सलाह हम ने अर्थमंत्री को दी है।”
एनसेल ने २० अरब रुपये का परमिट नवीनीकरण शुल्क लगातार जमा कर रहा है, जबकि अन्य सेवा प्रदाताओं को केवल तीन लाख रुपये का शुल्क जमा करना पड़ता है, इस विषय को भी श्रेष्ठ ने याद दिलाया। उन्होंने कहा, “फ्रीक्वेंसी शुल्क का भुगतान करने के बावजूद हमें फ्रीक्वेंसी उपलब्ध नहीं कराई गई है,” उन्होंने बताया।