
अर्थ मंत्रालय ने विराटनगर जुट मिल को संग्रहालय में बदलने और पुनः संचालन के प्रयास शुरू किए
सरकार ने १७ साल पहले बंद किए गए विराटनगर जुट मिल को पुनः संचालन या औद्योगिक संग्रहालय के रूप में विकसित करने के विभिन्न विकल्पों का अध्ययन शुरू किया है। अर्थ मंत्रालय ने इस उद्योग को निजी क्षेत्र को प्रबंधकीय अनुबंध पर देने, संग्रहालय बनाने या स्मार्ट औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने के प्रस्ताव रखे हैं। उद्योग, वाणिज्य एवं आपूर्ति मंत्रालय के सहसचिव संयोजन में गठित कार्यदल मिल की संपत्ति, दायित्व और संभावित रणनीतिक विकल्पों पर एक महीने के भीतर रिपोर्ट देगा। २८ साउन, काठमाडौं। १७ वर्ष पहले मंत्रिपरिषद् ने लगातार घाटे में चल रहे विराटनगर जुट मिल को बंद करने का निर्णय ले चुका था, लेकिन अब सरकार इसे औद्योगिक संग्रहालय बनाने के प्रस्ताव के साथ पुनः संचालित करने की तैयारी में है। नेपाल सरकार ने २०६६ साल में विराटनगर जुट मिल को लिक्विडेशन प्रक्रिया में ले जाने का निर्णय लिया था। लिक्विडेशन में कंपनी रजिस्टार कार्यालय से पत्राचार भी हो चुका था। हालांकि, कुछ सरकारों ने बीच-बीच में मिल पुनः संचालित करने के प्रयास भी किए थे। २०७२ साल से यह उद्योग पूरी तरह बंद है। अर्थ मंत्रालय ने इसे औद्योगिक संग्रहालय के रूप में विकसित करने की सिफारिश की है। मंत्रालय के अनुसार, पुनः उद्योग संचालित करने में महंगा खर्च आने के कारण सरकार तैयार नहीं है, इसलिए इसे दीर्घकालीन लीज या प्रबंधकीय अनुबंध में निजी क्षेत्र को देने का प्रस्ताव रखा है। नेपाल का पहला उद्योग होने के कारण इसे बंद कर प्रदेश सरकार एवं विराटनगर महानगरपालिका के सहयोग से औद्योगिक संग्रहालय के रूप में विकसित करने का विकल्प भी मंत्रालय ने रखा है। सम्मेलन के बाद मिल की जमीन पर हरित विशेष आर्थिक क्षेत्र विकसित कर स्वच्छ हरित ऊर्जा आधारित स्मार्ट उद्योग संचालित करने की संभावना भी दूसरे विकल्प में शामिल है। तीसरे विकल्प में रणनीतिक साझेदार के माध्यम से जुट मिल पुनः संचालित कर नई तकनीक और पूंजी निवेश करने की योजना है। मगर पिछली बार प्रबंधकीय अनुबंध और लीज के माध्यम से संचालित करने में विफलता के कारण संग्रहालय और स्मार्ट औद्योगिक क्षेत्र विकास विकल्प अधिक उपयुक्त समझा जा रहा है। प्रधानमंत्री कार्यालय के साथ भी उद्योग संचालन पर चर्चा हुई है। उद्योग की स्थिति, संपत्ति एवं दायित्व अस्पष्ट हैं, अर्थ मंत्रालय द्वारा तैयार संक्षिप्त रिपोर्ट के अनुसार मिल की संपत्ति और दायित्वों की स्थिति स्पष्ट नहीं है। मशीनरी, उपकरणों की स्थिति ज्ञात नहीं है और जुट बाजार की संभावनाओं का विस्तृत अध्ययन नहीं होने के कारण पुनः संचालन निर्णय लेना कठिन हो रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि “मशीनरी और उपकरणों की संचालन स्थिति अनिश्चित है, जमीन और भौतिक संपत्तियों के सटीक विवरण नहीं हैं, बकाया ऋण, कर और अन्य दायित्वों की पुष्टि नहीं हो सकी है।” जुट उत्पादन के उद्देश्य से १३ जुलाई १९३६ को विराटनगर जुट मिल्स लिमिटेड की स्थापना हुई थी। २०५० साल तक यह लाभ में चला लेकिन बाद में घाटे में चला गया और सुचारु न होने की वजह स्पष्ट नहीं है। उद्योग संचालन के लिए खराब स्थिति में उपकरणों और संरचनाओं के विषय में उद्योग, वाणिज्य एवं आपूर्ति मंत्रालय के सहसचिव के संयोजन में अध्ययन कार्यदल बनाया गया है। कार्यदल मिल की संरचना, मशीनरी, संपत्ति और दायित्वों की स्थिति एवं पूर्व निर्णयों का समीक्षा करेगा। कार्यदल को जुट मिल पुनः संचालन के संभावित विकल्प तथा रणनीतियों के साथ रिपोर्ट एक माह के भीतर प्रस्तुत करने को कहा गया है। तीन दशक से निजीकरण और पुनः संरचना प्रयास विराटनगर जुट मिल के निजीकरण और पुनः संरचना में तीन दशक से प्रक्रिया जारी है। २९ मंसिर २०५२ को निजीकरण समिति ने अगली निजीकरण चरण में विराटनगर जुट मिल्स लिमिटेड को चुना था। इसके बाद उद्योग को प्रबंधकीय अनुबंध पर देने का काम शुरू हुआ। २४ असार २०५४ को जुट मिल्स ने अर्थ मंत्रालय के निजीकरण इकाई को पत्र लिखकर बताया कि मिल को १३ असार २०५३ से प्रबंधकीय अनुबंध पर दिया गया है। घाटे में चलने के कारण २०६६ साल में मंत्रिपरिषद् ने इसे लिक्विडेशन में ले जाने का निर्णय लिया और छह महीने में प्रक्रिया पूरी करने के लिए कंपनी रजिस्टार कार्यालय के माध्यम से लिक्विडेटर नियुक्त किया। निजी निवेशकों को लिक्विडेशन खर्च में भागीदारी और संपत्ति को गिरवी रख ऋण उपलब्ध कराने का निर्णय भी लिया गया। उद्योग मंत्रालय ने २३ फागुन २०६६ को कंपनी रजिस्टार कार्यालय को पत्र लिखा। सरकार ने १५ असार २०६७ को मिल की देखरेख सशस्त्र प्रहरी बल, सीमा सुरक्षा कार्यालय मोरङ को सौंपने का निर्णय लिया। उद्योग मंत्रालय ने १७ माघ २०६६ को कर्मचारियों को वेतन कटौती (पे-ऑफ) हेतु ऋण निवेश का प्रस्ताव रखा। मंत्रिपरिषद ने २० माघ २०६६ को कर्मचारियों को सेवामुक्त करने का भी निर्देश दिया। अर्थ मंत्रालय ने २०६६ पुस तक के वेतन और सुविधाओं के लिए ५५ करोड़ ९२ लाख १९ हजार ११० रुपये ऋण मंजूर किया। मंत्रिपरिषद की आर्थिक अवसंरचना समिति ने विराटनगर जुट मिल की जमीन, संरचना और कारखाना उद्योग मंत्रालय के नाम स्थानांतरित करने का निर्णय लिया। उद्योग मंत्रालय ने १८ पुस २०६८ को अर्थ मंत्रालय से सहमति मांगते हुए मिल को पूरी तरह लिक्विडेशन में ले जाने के लिए पत्राचार किया। लेकिन १७ फागुन २०६८ को मंत्रिपरिषद ने इस निर्णय की पुनरावृत्ति कर निजी क्षेत्र को प्रबंधकीय अनुबंध में देने का प्रस्ताव रखा। २८ फागुन २०६८ को मंत्रिपरिषद की आर्थिक अवसंरचना समिति की बैठक में लिक्विडेशन निर्णय रद्द कर निजी क्षेत्र को लीज पर देने का निर्देश उद्योग मंत्रालय को दिया। इसके अनुसार सरकार ने ३ मंसिर २०६९ को भारतीय कंपनी विनसम इंटरनेशनल लिमिटेड को जिम्मेदारी दी। इस कंपनी ने वार्षिक १ करोड़ ३५ लाख रुपये सरकार को देने की शर्त पर जुट मिल को लीज पर लिया। उसने ११ महीने १८ दिन उद्योग संचालित किया। २०७१ में विद्युत आपूर्ति में समस्या से उद्योग बंद हो गया और पुनः नहीं चला। २०७३ असोज ४ को जुट मिल ने भारतीय कंपनी को लीज समझौता समाप्त करने का पत्र लिखा और दो दिन बाद बोर्ड ने भी समझौता रद्द करने का निर्णय लिया। लीज रद्द होते ही अर्थ मंत्रालय ने १५ मंसिर २०७३ को कारखाना संचालन और किराए संबंधी सूचना मांगी। जवाब में उद्योग ने कहा कारखाना संचालन में नहीं है, संपत्ति की स्थिति बताई और किराया भुगतान व लेखा जांच संपूर्ण किया। तत्कालीन उद्योग मंत्री महेश बस्नेत ने सरकार के शेयर ६८ प्रतिशत से घटाकर ३२ प्रतिशत करने की योजना बनाई थी, जिसे नियुक्त अध्यक्ष वसंत वन एवं प्रबंध निदेशक निलहरी काफ्ले के माध्यम से किया जाना था। लेकिन भ्रष्टाचार निरोधक विभाग के सतर्कता के कारण यह योजना सफल नहीं हो सकी।