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बालेनको शपथग्रहणमा बाबुराम- आफ्नै १२ वर्ष पहिलेको अग्रलेख सम्झिएँ

बालेन्द्र शाह के शपथ ग्रहण समारोह में बाबुराम ने 12 साल पुराना लेख याद किया

१३ चैत्र, काठमाडौं। पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. बाबुराम भट्टराई ने प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह (बालेन) के शपथ ग्रहण समारोह में अपने 12 साल पुराने एक लेख को याद किया है। शुक्रवार शाम फेसबुक पर लंबा अभिव्यक्ति साझा करते हुए भट्टराई ने २०७० चैत्र में नेपाल साप्ताहिक में प्रकाशित अपने लेख को याद किया। ‘आज से ठीक 12 साल पहले अर्थात् २०७० चैत्र में तत्कालीन प्रतिष्ठित पत्रिका नेपाल साप्ताहिक में मेरा अग्रलेख– ‘नयाँ शक्तिको खाँचो’ प्रकाशित हुआ था,’ बालेन ने लिखा। उस समय संविधान सभा से संविधान बन रहा था और वह तत्कालीन माओवादी पार्टी के उच्च नेतृत्व में थे, उन्होंने उल्लेख किया।
‘मैंने राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय परिस्थितियों का विश्लेषण करते हुए संविधान बनने के बाद नए युग का नया कार्यभार पूरा करने के लिए देश में पुराने दल और नेतृत्व के विकल्प में नए विचार, नीति, πρόγραμμα, नेतृत्व सहित नई शक्ति की आवश्यकता की वकालत की थी,’ उन्होंने लिखा। आज जब नया दल राष्ट्रिय स्वाभिमान पार्टी (रास्वपाका) की ओर से बालेन प्रधानमंत्री बने तो वह बात उन्हें याद आई। उन्होंने कहा, ‘उनका शपथ ग्रहण करते हुए बधाई देते हुए मेरा मन-मस्तिष्क उस लेख की यादों से जगमगा उठा।’ इसी तरह, उन्होंने उस समय कार्ल मार्क्स की चर्चित कृति ‘The Eighteenth Brumaire of Louis Bonaparte’ के एक अंश को भी याद किया, जिसमें कहा गया है, ‘मनुष्य अपना इतिहास स्वयं बनाते हैं, लेकिन अपनी इच्छा अनुसार ही नहीं, बल्कि स्वयं चुनें हुए परिस्थिति के अनुसार बनाते हैं, और जो स्थिति वे सीधे सामना कर रहे होते हैं, जो वर्तमान या अतीत से आए हुए होते हैं, उसी के अनुसार ही इतिहास बनाते हैं।’ भट्टराई ने कहा। ‘क्या नेपाल की वर्तमान स्थिति भी ऐसी नहीं है?’ उन्होंने सवाल उठाया।

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