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ट्रंप ने साझेदार देशों को कड़ी चेतावनी दी, ईरान की सैन्य ताकत बढ़ने पर चिंता जताई

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका के साझेदार देशों के लिए नई शर्तें निर्धारित की हैं। उन्होंने उन देशों को चेतावनी दी है जो एक क्षेत्र में विरोध करते हैं, उन्हें दूसरे क्षेत्र में इसके परिणाम भुगतने होंगे। ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल में अमेरिकी सहयोगी देशों पर दबाव बढ़ाया है। उन्होंने इन देशों के नेताओं का अपमान किया है और दशकों पुराने सुरक्षा संबंधों को अपने व्यक्तिगत और राजनीतिक हितों के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। ईरान युद्ध ने ट्रंप की इस प्रवृत्ति को और तेज कर दिया है। इस संघर्ष से दूरी बनाए रखने वाले सहयोगी देशों पर ट्रंप काफी नाराज हैं और जो युद्ध समाप्ति प्रयासों में संलग्न हैं, उन्हें दंडित कर रहे हैं।

दक्षिण कोरिया को कुछ समय पहले रक्षा मंत्री पिट हेगसेथ द्वारा एक उत्कृष्ट सहयोगी के रूप में सराहा गया था। लेकिन ट्रंप के बदले की रणनीति में दक्षिण कोरिया एक अजीब और नया शिकार बन गया है। रविवार को ट्रंप ने पेंटागन को वार्षिक “उल्ची फ्रिडम शील्ड” सैन्य अभ्यास को काफी कम करने का आदेश दिया। उन्होंने इस अभ्यास की लागत को बहुत अधिक बताया। ट्रंप ने उत्तर कोरिया के किम जोंग उन के साथ अच्छे संबंध होने का भी दावा किया। यह संयुक्त सैन्य अभ्यास लगभग आधे शताब्दीयों से अमेरिका और सियोल द्वारा परमाणुशक्ति संपन्न उत्तर कोरिया से रक्षा के लिए मुख्य आधार रहा है। ट्रंप ने अपने “ट्रुथ सोशल” पर लिखा, ‘मैंने हाल ही में दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति से ईरान के नाभिकीय कार्यक्रम को समाप्त करने में सहयोग करने का आग्रह किया था, उन्होंने कहा, धन्यवाद, हम ऐसा नहीं कर सकते।’

सोमवार को पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने बताया, ‘खासतौर पर जोक सहयोग नहीं करते हम हमेशा उनकी रक्षा नहीं कर सकते।’ यूरोप लंबे समय से अमेरिकी गठबंधन पर ट्रंप के हमलों का सामना कर रहा है। ईरान युद्ध ने इन संबंधों को और बिगाड़ दिया है। ट्रंप का दबाव अभियान अब व्यवस्थित रूप ले चुका है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, पेंटागन ने नाटो सहयोगी देशों को एक प्रश्नावली भेजी है। पेंटागन ट्रंप की विदेश नीति के प्रति उन देशों की निष्ठा का परीक्षण कर रहा है। इसी आधार पर अमेरिका निर्णय करेगा कि कहां सैन्य बल बनाए रखना है या हटाना है। इस प्रश्नावली में अमेरिकी सैन्य परिचालन और हथियार खरीद से संबंधित विषय शामिल हैं, जहां प्रमुख रूप से यह पूछा गया है कि क्या प्रत्येक देश ट्रंप प्रशासन की विदेश नीति का समर्थन कर रहा है या नहीं।

यह दबावपूर्ण रवैया अस्वीकार करने वाले सहयोगी देशों को पहले ही कीमत अदा करनी पड़ी है। जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मेर्ज ने ट्रंप की ईरान रणनीति की सार्वजनिक रूप से कड़ी आलोचना की थी। इसके बाद पेंटागन ने मई में जर्मनी से लगभग 5,000 अमेरिकी सैनिकों की वापसी का निर्णय लिया। स्पेन ने भी ईरान पर हमला करने के लिए अमेरिकी सैन्य बेस का उपयोग करने से मना कर दिया। इसके बाद ट्रंप ने स्पेन के साथ सभी व्यापार रोकने की धमकी दी। कुछ हफ्तों में पेंटागन के अधिकारियों ने स्पेन को नाटो से निलंबित करने का प्रस्ताव भी रखा। ओमान, जो हर्मुज समझौते को मध्यस्थता करवा रहा है, अब ट्रंप के निशाने पर है। अगर ईरान के साथ समझौता टूटता है तो ओमान के खिलाफ सख्त कार्रवाई की धमकी ट्रंप ने सोमवार को दी। इस युद्ध ने अमेरिकी सैन्य शक्ति की सीमाओं को भी उजागर किया है।

ट्रंप और ईरान ने अंतिम शांति समझौते के लिए 60 दिनों की समय सीमा तय की थी, जो सोमवार को बिना किसी समझौते के समाप्त हो गई। जून में समझौते पर हस्ताक्षर के वक्त से दोनों पक्ष और भी दूर हो चुके हैं। अमेरिकी सैन्य और आर्थिक दबावों के बावजूद स्ट्रेट ऑफ हर्मुज विवादित बना हुआ है। ट्रंप ने इस जलमार्ग को खुला और अमेरिकी क्षेत्र बनाने का दावा किया है। बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी नौसेना पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र से यूएसएस जॉर्ज वाशिंगटन को हटा रही है, जिससे लंबे समय से तैनात यूएसएस अब्राहम लिंकन को राहत मिलेगी। इस कदम से एशिया क्षेत्र कुछ समय के लिए अमेरिकी विमानवाहक पोतों से वंचित रहेगा। व्हाइट हाउस की प्रवक्ता एना केली ने बयान में कहा, ‘राष्ट्रपति ट्रंप ने अमेरिका को फिर से सम्मान दिलाया है। इसके परिणाम सभी के सामने हैं। नौ युद्ध समाप्त हुए हैं, गाजा से बंदी मुक्त हुए हैं, व्यापार समझौते अधिक न्यायसंगत हुए हैं। अब ईरान को कभी भी परमाणु हथियार बनाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।’ उन्होंने दावा किया कि ट्रंप ने अमेरिका के प्रति अन्याय दूर कर दशकों पुराने कूटनीतिक संबंधों को द्विपक्षीय और बराबरी का बनाया है। ट्रंप अपने साझेदार देशों को यह सिखा रहे हैं कि जरूरत पड़ने पर वाशिंगटन हमेशा उनके साथ नहीं हो सकता। इससे वे अमेरिका पर निर्भरता कम करने के रास्ते तलाशेंगे, जो वर्षों से अमेरिकी शक्ति को मजबूत बनाता आया संबंधों के ताने-बाने को धीरे-धीरे कमजोर करेगा।