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सड़क के गड्ढे भरने के लिए 5 वर्षों में 69 अरब का बजट आवंटित, आधा भी खर्च नहीं, समस्या जस की तस

समाचार संक्षेप

समीक्षा किए गए आंकड़ों के साथ।

  • महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट के अनुसार पिछले 5 वर्षों में सड़क मरम्मत के लिए आवंटित 68 अरब 74 करोड़ में से केवल 37 अरब 90 करोड़ ही खर्च हुआ है।
  • रणनीतिक सड़क मरम्मत के लिए आवंटित 56 अरब 36 करोड़ में से 30 अरब 14 करोड़ खर्च हुए हैं और आवधिक मरम्मत तथा पुनर्निर्माण की प्रगति कम रही है।
  • महालेखा परीक्षक ने सड़क मरम्मत, बजट, भार क्षमता, पुल संरक्षण और सड़क सुरक्षा में कानूनी क्रियान्वयन, समन्वय एवं जनशक्ति सुधार करने का सरकार को सुझाव दिया है।

4 भाद्र, काठमांडू। नेपाल में सड़क मरम्मत के लिए हर साल बड़ा बजट आवंटित किया जाता है, लेकिन लक्षित काम न होने के कारण गुणवत्ता में कोई खास सुधार नहीं हुआ है।

महालेखा परीक्षक कार्यालय के लेखा परीक्षण रिपोर्ट के अनुसार पिछले 5 वर्षों में सड़क बोर्ड ने रणनीतिक और स्थानीय सड़क मरम्मत के लिए कुल 68 अरब 74 करोड़ रुपये आवंटित किए थे।

जिसमें से 55 अरब 96 करोड़ निकासी हुई और खर्च लगभग 37 अरब 90 करोड़ हुआ।

अर्थात् सड़क बोर्ड को आवंटित बजट का 81.40 प्रतिशत निकासी हुआ, लेकिन खर्च केवल 67.72 प्रतिशत रहा।

महालेखा परीक्षक कार्यालय के अनुसार सड़क नेटवर्क के विस्तार के कारण बजट घाटे में है और आवंटित बजट का खर्च न होना बड़ी समस्या है।

संबंधित निकायों के बीच समन्वय की कमी, कम बजट, योजना की स्वीकृति में देरी, ठेका प्रक्रिया और भुगतान में विलंब के कारण बजट लक्षित अनुसार खर्च नहीं हो सका है, रिपोर्ट में उल्लेख है।

सड़कों की नियमित मरम्मत न होने के कारण सड़कों की हालत खराब हो रही है और पुनर्निर्माण का बोझ बढ़ रहा है, जिससे दुर्घटना का जोखिम भी बढ़ता है, महालेखा ने बताया।

सड़क मरम्मत के लिए बजट आवंटन और संबंधित निकायों के बीच समन्वय से योजनाओं का प्रभावी संचालन करने के लिए महालेखा ने सरकार को निर्देश दिया है।

सरकार ने पिछले 5 वर्षों में सड़क उपयोग और मरम्मत शुल्क से 75 अरब 33 करोड़ रुपये एकत्र किए, लेकिन रिपोर्ट संकलित आंकड़ों के अनुसार इसका केवल आधा हिस्सा ही मरम्मत में खर्च हुआ है।

रणनीतिक सड़कों पर खर्च कमजोर

सरकार सड़क मरम्मत को रणनीतिक एवं स्थानीय दो भागों में बांटकर कार्य करती है। सड़क विभाग ने रणनीतिक सड़क मरम्मत के लिए पिछले 5 वर्षों में 56 अरब 36 करोड़ रुपये बजट आवंटित किया था।

जिसमें से 49 अरब 74 करोड़ निकासी हुई और खर्च केवल 30 अरब 14 करोड़ रहा, जो कि बजट का 60.59 प्रतिशत है।

सड़क विभाग और इसके अधीन महाशाखाएं, संघीय सड़क निगरानी एवं पर्यवेक्षण कार्यालय, सड़क डिवीजन कार्यालय, हेवी इक्विपमेंट डिवीजन तथा यांत्रिक कार्यालय आदि ने सड़क बोर्ड के माध्यम से यह बजट प्राप्त किया है।

रणनीतिक सड़क मरम्मत करने वाले कार्यालयों की संख्या 63 हो गई है, लेकिन खर्च अपेक्षित स्तर से कम होने के कारण चिंता बनी हुई है।

महालेखा ने सड़क की वास्तविक स्थिति और आवश्यकता के आधार पर बजट की पर्याप्तता की पुनः समीक्षा, बजट वृद्धि और खर्च बढ़ाने का सुझाव सरकार को दिया है।

 

महालेखा के अनुसार स्थानीय सड़क मरम्मत में हुए खर्च का विवरण सड़क बोर्ड ने कार्यालय को उपलब्ध नहीं कराया है। हालांकि स्थानीय सड़क मरम्मत का समय पर न होना स्थिति को कमजोर कर रहा है।

इसका नकारात्मक प्रभाव यातायात सेवा और जनसुरक्षा पर पड़ता है और सार्वजनिक संसाधनों का प्रभावी उपयोग नहीं हो पा रहा है।

कार्यालय ने योजना तथा बजट की तैयारी को यथार्थवादी बनाने, पूर्वतयारी पूर्ण योजनाओं को ही कार्यक्रम में शामिल करने, खरीद-निकासी प्रक्रिया को सरल बनाने, कार्यान्वयन निकाय की क्षमता बढ़ाकर बजट को प्रभावी रूप से लागू करने के सुझाव दिए हैं।

आवधिक मरम्मत और पुनर्निर्माण को प्राथमिकता नहीं

नेपाल में सड़क मरम्मत को नियमित, पटके, आवधिक, पुनर्स्थापना, पुनर्निर्माण, विशेष, आकस्मिक और सड़क सुरक्षा से वर्गीकृत किया गया है। इनमें सड़क की आयु बढ़ाने के लिए आवधिक और पुनर्निर्माण सबसे महत्वपूर्ण हैं।

लेकिन इन दोनों प्रकार की मरम्मत की प्रगति काफी कमजोर रही है। पिछले 5 वर्षों में नियमित और पटके मरम्मत लक्ष्य के अनुसार हो रही है।

पर आवधिक मरम्मत में 42 से 73 प्रतिशत और पुनर्स्थापना, पुनर्निर्माण में 21 से 75 प्रतिशत प्रगति ही हुई है।

महालेखा ने आवधिक मरम्मत को प्राथमिकता देने और योजनाओं को प्रभावी बनाने निर्देश दिए हैं। आगामी वित्तीय वर्ष 2081/82 में 7,938 किलोमीटर सड़क की नियमित मरम्मत हुई।

पटके मरम्मत की दूरी 3,929 किलोमीटर रही। आवधिक मरम्मत का लक्ष्य 550 किलोमीटर था, जिनमें से केवल 369 किलोमीटर हुआ और पुनर्निर्माण का लक्ष्य 75 किलोमीटर था, जिसमें केवल 39 किलोमीटर पूरा हुआ।

कानूनी व्यवस्थाओं का प्रभावी कार्यान्वयन कमजोर

महालेखा के अध्ययन के अनुसार सड़क मरम्मत से जुड़े कानूनी प्रावधानों का प्रभावी क्रियान्वयन न हो पाना सबसे बड़ा कमजोर पक्ष है।

मरम्मत खर्च को कम करने के लिए योजना बनाना, सड़क सुरक्षा के लिए कोष का प्राथमिकता से उपयोग, वाहन भार मापन, अनुसंधान, नियम उल्लंघन पर जुर्माना लगाने की व्यवस्था लागू नहीं है।

जनशक्ति की कमी

सड़क बोर्ड के पास स्थायी पदों की संख्या मात्र 27 है। संघीयता के कारण स्थानीय निकायों की संख्या बढ़ने और कार्यभार बढ़ने के बावजूद कर्मचारी संख्या यथावत् है।

सीमित जनशक्ति होने के कारण अधिक कार्यभार पड़ता है और अपेक्षित काम पूरा नहीं हो पा रहा है।

महालेखा ने सड़क मरम्मत के लिए योजना चयन में सुधार हेतु एकीकृत वार्षिक योजना स्वचालित ऑनलाइन प्रणाली लागू करने का सुझाव दिया है।

सड़क भार क्षमता पर कड़ाई नहीं

महालेखा ने त्रिभुवन राजपथ, महेन्द्र राजमार्ग सहित अन्य राजमार्गों पर अत्यधिक भारवाहक वाहन चलने का उल्लेख किया है, जिससे सड़क जल्दी खराब हो रही है।

भारी वाहनों के कारण सड़क की सतह पर दरार, धंसाव और गड्ढे बनने की समस्या सामने आ रही है।

भार मापन प्रणाली को प्रभावी बनाने और सम्बंधित निकायों के बीच समन्वय कर सड़क भार क्षमता मापन एवं कार्यान्वयन को मजबूत करने का महालेखा ने आग्रह किया है।

पुल संरक्षण की उपेक्षा

सड़क बोर्ड नियमावली के अनुसार पुल मरम्मत के लिए अलग कार्यक्रम होना चाहिए, लेकिन इसका अनुपालन नहीं है।

डिवीजन कार्यालय में नियमित बजट न होने के कारण पुल की मरम्मत नहीं हो पा रही है।

मरम्मत न होने से पुलों में संरचनात्मक क्षति, आयु में कमी, वाहन और यात्रियों की सुरक्षा खतरे में, यातायात बाधित होने व आर्थिक-सामाजिक प्रभाव होने के साथ-साथ आपदा प्रतिरोध क्षमता कम होने का खतरा है।

कम बजट के कारण सड़क सुरक्षा कमजोर

हर वर्ष सड़क मरम्मत के बजट का केवल एक छोटा हिस्सा सड़क सुरक्षा के लिए आवंटित किया जाता है।

अप्रभावी बजट उपयोग से सड़क दुर्घटना का जोखिम बढ़ रहा है, महालेखा ने बताया है।

सड़क मरम्मत की समस्याओं के समाधान के लिए महालेखा के सुझाव

· वर्तमान कानूनों की कमजोरियां परिवर्तित कर संविधान के अनुसार उनका क्रियान्वयन और सड़क मरम्मत के लिए विशेष कानून तैयार करना होगा।

· बोर्ड के उद्देश्यों के अनुसार स्पष्ट कार्य क्षेत्र सुनिश्चित कर कर्मियों का प्रबंधन, बजट निकासी व्यवस्था और कार्ययोजना बनाकर खर्च कम से कम कर प्रभावशीलता बढ़ानी होगी।

· नियमित, पटके, आकस्मिक और आवधिक मरम्मत सभी को प्राथमिकता देकर क्रियान्वयन पर जोर देना चाहिए।

· बोर्ड के कार्य और कर्तव्य स्पष्ट कर निकायों के बीच समन्वय और प्रक्रियाओं को एकीकृत करना होगा।

· नियमावली के अनुसार आवधिक कार्यविधि बनाते समय स्वचालित ऑनलाइन प्रणाली अपनानी चाहिए।

· सड़क सुरक्षा और गुणवत्ता को उच्च प्राथमिकता देते हुए पर्याप्त बजट आवंटित करें, तकनीकी आधार पर योजना का चयन करें, प्रभावी निगरानी और समन्वय को मजबूत बनाएं।

· मरम्मत कार्य की समय सीमा बढ़ाए जाने पर प्रभाव का मूल्यांकन कर ठेका प्रबंधन करें।

· खर्च कम करने के लिए स्पष्ट योजना बनाकर प्रभावी क्रियान्वयन, निगरानी एवं समन्वय सुनिश्चित करें।