
एक वर्ष नबितते ही एक और आपदा, रसुवा बाढ़ की क्षति का बीमाक अनुमान सामने आया
समाचार सारांश: रसुवा बाढ़ के कारण सैंकड़ों वाहन, जलविद्युत परियोजनाएं, मकान, बैंक शाखाएं और कंटेनर क्षतिग्रस्त हुए हैं। इसके चलते बीमा कंपनियों की जिम्मेदारी, उनसे अनुमानित दायित्व से कहीं अधिक होने की संभावना प्रबल हो गई है। नेपाल विद्युत प्राधिकरण के अनुसार, बाढ़ ने १२ चालू और १५ निर्माणाधीन जलविद्युत तथा सोलर परियोजनाओं को नुकसान पहुंचाया है। निर्जीवन बीमक संघ के महासचिव सुनिलबल्लभ पन्त ने बताया कि क्षति का विस्तृत आंकलन आने में ४ से ५ दिन का समय लगेगा और बीमित संपत्तियों का भुगतान करना आवश्यक होगा।
१२ भदौ, काठमाडौं। एक साल पहले रसुवा में आई बाढ़ और २३-२४ भदौ को हुए आंदोलन के कारण बीमा कंपनियों को भारी दायित्व उठाना पड़ा था। अब बुधवार सुबह रसुवा बाढ़ से हुए नुकसान में बीमा कंपनियों पर जो दायित्व आएगा, वह उनके पूर्वानुमान से कहीं अधिक होने की संभावना जाहिर हो रही है। इस बाढ़ ने सैकड़ों वाहन, आयातित सामग्री, जलविद्युत परियोजनाएं, निजी मकान, नौ बैंक शाखाएं तथा लाखों माल वाहक कंटेनर बहाकर नष्ट कर दिए। वर्तमान में कृषि और पशु बीमा से वंचित लोगों की वजह से उससे जुड़ा कुछ दायित्व भी सामने आया है।
नेपाल विद्युत प्राधिकरण ने बताया कि बाढ़ ने संचालनरत १२ जलविद्युत और एक सोलर परियोजना को गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त किया है, वहीं निर्माणाधीन १५ परियोजनाओं पर भी गहरा प्रभाव पड़ा है। कुल मिलाकर ९०० मेगावाट क्षमता की ये परियोजनाएं प्रभावित हुई हैं। इतना ही नहीं, भन्सार यार्ड, यात्रा में चल रहे सैकड़ों वाहन, निजी मकान, होटल आदि भी बाढ़ की चपेट में आए।
निर्जीवन बीमक संघ के महासचिव सुनिलबल्लभ पन्त के अनुसार, पूर्ववर्ती आपदाओं की तुलना में रसुवा बाढ़ में बीमा संपत्तियों को अधिक क्षति पहुंची है। सरकारी अध्ययन के मुताबिक गत भदौ २४ को जनजीवन आन्दोलन से ८४ अरब रुपये से अधिक का नुकसान हुआ था, जिसमें से बीमा दावा लगभग २३ अरब ४५ करोड़ रुपये का आया था। जनजीवन आन्दोलन में भले ही कई सरकारी संपत्तियां क्षतिग्रस्त हुईं, पर वे बीमित नहीं थीं, इसलिए बीमा कंपनियों की जिम्मेदारी कम थी। वर्ष २०७२ के वैशाख १२ के भूकंप में करीब ९ खरब का नुकसान हुआ था, लेकिन बीमा कंपनियों का कुल दायित्व लगभग १७ अरब ही था, क्योंकि उस समय व्यक्तिगत संपत्ति बीमित कम थी। परंतु रसुवा बाढ़ में सिर्फ सार्वजनिक संपत्तियां ही नहीं, बल्कि परियोजनाएं, वाहन, मकान-जमीन सहित कई वस्तुएं बीमित हैं, जिनसे बीमा कंपनियों की जिम्मेदारी बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं।
पन्त ने बताया कि बीमा दावे की राशि निश्चित करने का समय अभी नहीं आया है। वे कहते हैं, “बाढ़ से क्षतिग्रस्त बीमित संपत्तियां काफी हैं, जल विद्युत परियोजनाएं और वाहन बह गए हैं। बीमा क्षेत्र में अब बड़ा नुकसान आने की संभावना है।” उन्होंने बताया कि क्षति के आंकड़े आने में अभी ४ से ५ दिन लगेंगे। स्थानीय स्तर पर संपत्तियों का मूल्यांकन कर बीमा कंपनियां भुगतान करेंगी। जलविद्युत परियोजनाएं डूबने और बहने की स्थिति में हैं, जिससे स्थिर रूप से क्षति मापना कठिन होगा। बैंक शाखाओं की संपत्तियों के मूल्यांकन में भी समय लगेगा। उन्होंने बताया, “बैंक की संपत्ति, नकद और धितो में मौजूद सोने के मूल्य निर्धारण में कठिनाई है, जिसके कारण नुकसान बड़ा दिख रहा है।” उन्होंने आगे कहा, “हमें लगता है कि यह बीमा दावा भूकंप और जनजीवन आन्दोलन की तुलना में भी बड़ा हो सकता है।”
बीमा कंपनियों को कितना दायित्व संभालना है और कितना जोखिम लेना है, इस पर उनका ध्यान देना जरूरी है। कंपनियों की जोखिम क्षमता अलग-अलग होने के कारण इसे निश्चित करना आसान नहीं है। फिलहाल बीमा प्राधिकरण और बीमक संघ के बीच प्रबंधन से जुड़े विषयों पर बातचीत चल रही है। दंगे और हड़ताल जैसी घटनाओं में बीमा कंपनियां ३५ प्रतिशत जोखिम स्वयं उठाती हैं, जबकि बाढ़ और जलविद्युत परियोजनाओं की घटनाओं में यह अनुपात अलग होता है और अभी तक यह निश्चित नहीं किया जा सका है। उन्होंने सुझाव दिया है कि बीमा कंपनियों को नुकसान प्रबंधन के लिए बेहतर तैयारी करनी चाहिए।
नेपाल बीमा प्राधिकरण के कार्यकारी निर्देशक सुशील देव सुवेदी ने रसुवा बाढ़ के बीमित संपत्तियों के भुगतान में कोई बाधा नहीं आने की बात कही है। उनका कहना है, “क्षति का सही मूल्यांकन करना जरूरी होगा, क्योंकि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में जाकर सटीक मूल्यांकन करना चुनौतीपूर्ण होगा।” निर्जीवन बीमा क्षेत्र का आकार वर्तमान में लगभग ३ खरब है और क्षति के बाद दावा भुगतान में कोई समस्या नहीं होगी, वे कहते हैं। जलविद्युत परियोजनाओं के संदर्भ में प्रत्यक्ष अवलोकन जरूरी होगा। उन्होंने कहा कि चुनौतियों के बावजूद बीमा क्षेत्र अच्छा जवाब देगा। जलविद्युत परियोजनाओं में बीमा कंपनियां अपनी क्षमता के अनुसार कम जोखिम लेती हैं, इसलिए बड़ी जिम्मेदारी नहीं आएगी। उन्होंने कहा, “जलविद्युत परियोजनाओं में पुनर्बीमा कंपनियों को ज्यादा दायित्व उठाना पड़ सकता है।”
बीमा क्षेत्र में कुशल कर्मी के अभाव के कारण समय पर मूल्यांकन करना कठिन होगा, इससे दावा भुगतान में देरी हो सकती है। पूर्वाधार मंत्री सुनिल लम्साल ने कहा था कि रसुवा बाढ़ से दो खरब से अधिक भौतिक क्षति हुई है, और पुल तथा सड़कों को ही ४० अरब का नुकसान पहुँचा है। २०७२ के भूकंप में भी १९ जलविद्युत परियोजनाएं प्रभावित हुई थीं। स्वतंत्र उर्जा उत्पादक संस्थान ने भूकंप के बाद इन परियोजनाओं को लगभग २ अरब ३० करोड़ का नुकसान होने का दावा किया था, जब ८० मेगावाट विद्युत उत्पादन प्रभावित हुआ था।