
तीज पर्व में पुरुषों की बढ़ती भागीदारी
समाचार सारांश: हरितालिका तीज भाद्रशुक्ल प्रतिपदा से शुरू होकर ऋषिपञ्चमी पूजा के साथ समाप्त होने वाला नेपाली महिलाओं का अत्यंत लोकप्रिय पर्व है। तीज के पहले दिन दर खाने की परंपरा है जबकि दूसरे दिन महिलाएं निराहार व्रत रखकर शिवजी की पूजा करती हैं। पुरुषों की तीज पर्व में भागीदारी दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है।
तीज नेपाली महिलाओं का एक अत्यंत लोकप्रिय पर्व है। वैदिक पात्रो के अनुसार यह पर्व भाद्रशुक्ल प्रतिपदा से शुरू होकर पंचमी पूजा के साथ समाप्त होता है। तीज पारंपरिक रूप से नेपाली और विशेषकर हिन्दू महिलाओं का पवित्र पर्व है। इस पर्व में मिठाई भोजन, व्रत रखना, गीत गाना, नृत्य करना, आभूषण धारण करना, सफाई, उपवास तथा ऋषिमुनियों की पूजा की जाती है।
सामाजिक परिवर्तन के साथ तीज में भी समय के अनुसार कुछ बदलाव आए हैं। तेजस्वी गीत, उत्तेजक नृत्य, विचित्र पोशाकें और अनावश्यक खान-पान व खर्च जैसे कुछ विकृतियाँ देखी गई हैं। माइतीघर के पास तीज जुड़ी हुई है। जो महिलाएं वर्ष भर मायके नहीं जा पातीं, वे तीज पर पिता एवं भाई के साथ मायके जाती हैं, मीठे पकवान खाती हैं, सुख-दुख की बातें साझा करती हैं एवं गीतों के माध्यम से अपनी पीड़ाएं बांटती हैं। आधुनिक युग में इन प्रथाओं में कुछ कमी आई है।
तीज के मुख्य चार दिन
तीज पर्व मुख्य रूप से चार दिन विभिन्न परंपराओं के साथ मनाया जाता है।
- पहला दिन (दर खाने का दिन): पहला दिन तीज से एक दिन पहले होता है। विवाहित और अविवाहित बहनें परिवार के सदस्यों के साथ बैठकर भाइयों से दर (भोज) खाती हैं। मासू, दूध, दही, घी, फल आदि विभिन्न व्यंजन दर कहलाते हैं। रात भर नृत्य और उत्सव होता है। विभिन्न संघ-संस्थाएं भी दर कार्यक्रम आयोजित करती हैं। हालांकि अत्यधिक खर्च और अस्वाभाविक खान-पान से तीज में कुछ विकृतियां देखने को मिली हैं।
- दूसरा दिन (हरितालिका तीज): यह सबसे पवित्र व्रत का दिन होता है। महिलाएं निराहार या निर्जला व्रत रखती हैं। दिन भर नृत्य करती हैं और शाम को शिवजी की पूजा करती हैं। धार्मिक कथाओं के अनुसार यह दिन सतीदेवी, पार्वती और शिवजी से जुड़ा होता है। विवाहित महिलाएं पति के सुख के लिए और अविवाहित अच्छी शादी के लिए व्रत रखती हैं।
- तीसरा दिन (गणेश चतुर्थी): तीज के अगले दिन गणेश चतुर्थी होती है। यह भगवान गणेश का जन्मदिन माना जाता है। पार्वती ने शिवजी के आशीर्वाद से भगवान गणेश को गर्भाधान और प्रसव विना जन्म दिया, ऐसा विश्वास है। महिलाएं इस दिन भगवान गणेश की पूजा करती हैं।
- चौथा दिन (ऋषिपञ्चमी): तीज का अंतिम दिन ऋषिपञ्चमी पर्व मनाया जाता है। महिलाएं उपवास रखकर सप्तऋषि की पूजा करती हैं। सुबह स्नान, सफाई, पंचगव्य सेवन कर सप्तऋषियों की पूजा के साथ नृत्य-गीत करते हुए हरितालिका तीज का समापन होता है।
तीज पर्व में पुरुषों की भागीदारी
परंपरागत रूप से तीज महिलाओं का पर्व माना जाता है, परंतु अब पुरुष भी उत्सव, नृत्य-गीत और भोजन में सक्रिय रूप से हिस्सा ले रहे हैं। पुरुष महिलाएं तीज में सहायता करते हैं, मिलन-जुलन का अवसर देते हैं तथा घरेलू कार्यों में सहयोग करते हैं। साथ ही पुरुष व्यंजन बनाने, सफाई में मदद करने, उपहार देने, मंदिर तक साथ जाने और कुछ पुरुष तीज का व्रत भी रखते हैं। संगीत क्षेत्र में पुरुष तीज गीत निकालकर बाजार में उत्साह बढ़ाते हैं और नृत्य-गीतों में सम्मिलित होते हैं। आर्थिक रूप से कपड़े और आभूषण खरीदने में भी पुरुषों की व्यापक भागीदारी देखी जाती है।
अंत में, तीज को धार्मिक और पौराणिक रूप से सम्मानपूर्वक मनाना आवश्यक है। विकृतियों को कम करना और धर्म, संस्कृति तथा परंपरा के संरक्षण के प्रति सजग रहना जरूरी है। तीज ही नहीं, अन्य त्योहारों में भी विकृति और पश्चिमी संस्कृति के प्रभाव को घटाकर त्योहारों को सरल, सादगीपूर्ण और लागत-मित्र बनाना विशेष ध्यान देने योग्य है।
हरितालिका तीज २०८३ के अवसर पर सभी नेपाली बहनों को हार्दिक शुभकामनाएं।
(डा. नरनाथ पाण्डे, नवरपुर कावासोती स्थित मध्यविन्दु बहुमुखी कैम्पस के प्राध्यापक)