
नेपाल बार एसोसिएशन: सरकार ने गैरकानूनी निर्णय लिया
नेपाल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. विजयप्रसाद मिश्र ने पूर्वप्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और पूर्वगृहमंत्री रमेश लेखक को गिरफ्तार करने के सरकार द्वारा लिए गए निर्णय को अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर बताया है। मिश्र ने कार्की आयोग की रिपोर्ट को पूर्वाग्रही करार देते हुए कहा कि कैबिनेट के पास इस निर्णय को लागू करने का अधिकार नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कैबिनेट को मुकदमा चलाने का अधिकार नहीं है और कानून का प्रयोग पक्षपातपूर्ण तरीके से नहीं होना चाहिए।
१५ चैत, काठमाडौं। पूर्वप्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और पूर्वगृहमंत्री रमेश लेखक को गिरफ्तार करने के लिए सरकार के निर्णय को नेपाल बार एसोसिएशन ने पूर्वाग्रही बताया है। रविवार को काठमाडौं में आयोजित एक संवाद कार्यक्रम में बार के अध्यक्ष डॉ. विजयप्रसाद मिश्र ने कहा कि इस प्रकार के निर्णय लेने का अधिकार मंत्री परिषद के पास नहीं है।
उन्होंने कहा कि कार्की आयोग की रिपोर्ट स्वयं में ही पूर्वाग्रही है और इसे लागू करने के लिए कैबिनेट द्वारा निर्णय लेना सरकार के क्षेत्राधिकार में नहीं आता। उन्होंने बताया कि सरकार के पास जो अधिकार नहीं है, उसे प्रयोग कर आयोग की रिपोर्ट को लागू कराने की कोशिश करना गलत है।
उन्होंने कहा, ‘कैबिनेट का कार्य नीति निर्धारण, बजट प्रबंधन और राज्य की शांतिपूर्ण व्यवस्था को बनाए रखना है। किसी शिकायत के मामले में पुलिस प्रारंभिक जांच करती है और रिपोर्ट सरकारी वकील के कार्यालय भेजती है। इसके बाद सरकारी वकील फैसला करता है कि मुकदमा चलाना है या नहीं। कैबिनेट के पास ऐसा निर्णय लेने का अधिकार नहीं है। इसलिए यह एक पूर्वाग्रह है। कानूनी प्रणाली का उपयोग किसी को हमेशा दबाव में रखने या जोखिम में डालने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। यह रिपोर्ट खंडित और अस्वीकार्य है।’
अध्यक्ष मिश्र ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार के पास किसी भी आयोग की रिपोर्ट को अदालत की अनुमति के बिना लागू करने का कोई कानूनी प्रावधान नहीं है।