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विद्यार्थी नेताओं ने दलीय संगठन हटाने की योजना के खिलाफ आपत्ति जताई

बालेन शाह के नेतृत्व वाली सरकार ने ६० दिनों के भीतर विद्यालयों और विश्वविद्यालयों से दलीय विद्यार्थी संगठन हटाने की कार्ययोजना सार्वजनिक की है। विद्यार्थी संगठनों ने इसे संविधान के अनुच्छेद १७ के तहत राजनीतिक दल स्थापित करने के अधिकार का उल्लंघन बताते हुए असहमति व्यक्त की है। सरकार ने पाँचवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों के लिए आंतरिक परीक्षाएं बंद कर मनोवैज्ञानिक प्रभाव न पड़ने वाली मूल्यांकन प्रणाली लागू करने का भी निर्णय लिया है। १५ चैत, काठमांडू।

बालेन शाह की सरकार ने ६० दिनों के अंदर विद्यालय और विश्वविद्यालयों से दलीय संगठन हटाने की कार्यसूची जारी की है। इस कदम पर विद्यार्थियों के विभिन्न संगठनों ने असहमति जताई है। प्रधानमंत्री बालेन शाह के नियुक्ति के बाद १३ चैत को हुई मंत्री परिषद की बैठक में १०० कार्यक्रमों की सूची स्वीकृत की गई थी, जिसमें शैक्षिक गुणवत्ता में गिरावट को रोकने के उपाय के रूप में दलीय संगठन हटाने का प्रस्ताव भी शामिल था।

‘शिक्षा क्षेत्र में दलीय हस्तक्षेप, विद्यार्थी आवाज की उपेक्षा एवं शैक्षिक गुणवत्ता गिरावट की समस्या को समाप्त करने हेतु ६० दिनों के भीतर विद्यालय और विश्वविद्यालयों से दलीय विद्यार्थी संगठनों की संरचनाएं हटाई जाएंगी और ९० दिनों के भीतर विद्यार्थी परिषद या वॉइस ऑफ स्टूडेंट्स जैसे संयंत्र बनाए जाएंगे,’ योजना में इस प्रकार उल्लेख है। दलीय संगठनों की जगह विद्यार्थी परिषद लगाने के प्रस्ताव को छात्र संगठनों द्वारा अस्वीकार किया गया है।

विद्यार्थी नेताओं का कहना है कि यह योजना संविधान के अनुच्छेद १७ में निहित राजनीतिक दल स्थापित करने के अधिकार का उल्लंघन करती है। नविसंघ के प्रवक्ता सुरज सेजुवाल ने कहा, ‘यह एक अलोकतांत्रिक और अपरिपक्व निर्णय है। संविधान की समीक्षा किए बिना इसे लागू किया गया है। राजनीतिक विचार रखने का मौलिक अधिकार है। वर्तमान स्ववियु संरचना को हटाना उचित नहीं है। इसे अधिनायकवादी शैली में प्रबंधित नहीं किया जाना चाहिए।’

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