
सरकार की १०० दिन की कार्ययोजना में वैदेशिक रोजगार क्षेत्र की उपेक्षा
समाचार सारांश की समीक्षा की गई है। बालेन साह के नेतृत्व वाली सरकार ने १०० दिनों के भीतर सम्पन्न करने वाले अपने १०० कार्यों की सूची में वैदेशिक रोजगार क्षेत्र को सीधे रूप से शामिल नहीं किया है। सरकार ने वैदेशिक रोजगार से संबंधित सेवा सुविधाओं को सहज बनाने और भ्रष्टाचार नियंत्रण करने के विषयों को अप्रत्यक्ष रूप से सूचीबद्ध किया है। मध्य पूर्व के घटनाक्रम का नेपाल पर पड़ने वाले प्रभावों का मूल्यांकन करने के लिए एक अंतरमंत्रालयीय अध्ययन कार्यदल गठित करने की योजना है।
१५ चैत्र, काठमांडू। बालेन साह नेतृत्व वाली सरकार ने अपनी १०० दिन की कार्यसूची जारी करते हुए वैदेशिक रोजगार क्षेत्र की उपेक्षा की है। सरकार की १०० दिन के भीतर की १०० कार्यसूची में राज्य द्वारा प्रदान की जाने वाली सेवा सुविधाओं को सरल बनाने जैसे विषय शामिल हैं। लेकिन, लगभग ७५ प्रतिशत परिवारों से जुड़ा हुआ वैदेशिक रोजगार क्षेत्र सीधे तौर पर सूची में नहीं है। घोषित सूची में श्रम तथा वैदेशिक रोजगार क्षेत्र को अप्रत्यक्ष रुप से शामिल किया गया है, पर ३० लाख से अधिक वैदेशिक रोजगार में संलग्न श्रमिकों के अधिकारों और सुरक्षा के विषय स्पष्ट रूप से नहीं दर्शाए गए हैं।
श्रम एवं आप्रवासन विशेषज्ञ रामेश्वर नेपाल ने बताया कि वैदेशिक रोजगार क्षेत्र को सीधे तौर पर सूची में उल्लेख नहीं किया गया। उन्होंने कहा, ‘अगर एक चार-पांच शब्दों में इस क्षेत्र में व्याप्त विकृतियों पर कड़ी कार्रवाई की बात होती तो बेहतर होता। ऐसा लगता है कि इस क्षेत्र को नजरअंदाज किया गया है।’ उन्होंने कार्यसूची में ‘हम इसका आरंभ करेंगे’ जैसे शब्दों में कंजूसी का भी उल्लेख किया। ‘मर्निंग शोज द डे’ कार्यक्रम के मुताबिक वैदेशिक रोजगार क्षेत्र में अपेक्षित सुधार अभी तक नहीं हुआ है। उन्होंने कहा, ‘वॉइसलेस कम्युनिटी और माइग्रेंट पॉपुलेशन सामाजिक दृष्टि से प्रभावशाली हैं, जो विदेश से राजनीतिक संदेश भी भेजते हैं, लेकिन इन्हें भुलाया गया लगता है।’
सरकार की १०० दिन की कार्यसूची में वैदेशिक रोजगार क्षेत्र में मौजूद विकृतियों और विसंगतियों को सुधारने की ओर भी संकेत मिले हैं। रोजगार सृजन, कौशल विकास और उद्यमशीलता को एकीकृत और सशक्त बनाने के लिए शिक्षा मंत्रालय के सीटीईवीटी, श्रम मंत्रालय के व्यावसायिक एवं कौशल विकास संगठनों और उद्योग मंत्रालय के औद्योगिक व्यवसाय विकास संस्थान को एकीकृत कर ६० दिनों के भीतर ‘रोजगार, कौशल तथा उद्यमशीलता केंद्र’ में विकसित करने की योजना है। यह केंद्र बेरोजगारों के पंजीकरण, सार्वजनिक रोजगार योजनाओं, स्थानीय कौशल की मांग का नक्शानिर्माण, प्रशिक्षण समन्वय, उद्यमशीलता सहकारिता और वैदेशिक रोजगार से लौटे मजदूरों के पुनः एकीकरण के कार्य करेगा।
इसी के साथ मध्य पूर्व में घटित घटनाक्रम के कारण नेपाल और नेपाली लोगों पर पड़ने वाले आर्थिक, वैदेशिक रोजगार, आपूर्ति शृंखला, ऊर्जा और सामाजिक प्रभावों का अध्ययन करने के लिए भी एक कार्यदल बनाया जाएगा। यह अंतरमंत्रालयीय उच्चस्तरीय कार्यदल ७ दिनों के भीतर अल्पकालीन, मध्यकालीन और दीर्घकालीन नीतिगत एवं कार्यक्रमगत उपायों के साथ रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा।
कार्यसूची की विभिन्न बिंदुओं जैसे १०, १३, १६, १८, १९, २१, २२, २३, २४, २६, २९, ३१, ३२, ३४, ३६, ४३, ५९ और ९५ में श्रम और वैदेशिक रोजगार क्षेत्र के विषयों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से संबोधित किया गया है। वैदेशिक रोजगार क्षेत्र सीधे नहीं दिखा, फिर भी भ्रष्टाचार नियंत्रण और सुशासन के बिंदुओं के माध्यम से इसे शामिल किया गया है, जो सरकार का दावा है।
बिंदु संख्या १० में सेवा प्रवाह को सरल और तेज़ बनाने का विषय है। वैदेशिक रोजगार जाने वाले मजदूर वर्तमान में पासपोर्ट से लेकर श्रम स्वीकृति प्राप्त करने तक विभिन्न परेशानियों का सामना कर रहे हैं, जिससे उनकी सेवा को सरल बनाना संभव होगा। इसी प्रकार, बिंदु संख्या १३ में कर्मचारियों को अनुशासित और उत्तरदायी बनाने का लक्ष्य रखा गया है, जो वैदेशिक रोजगार से जुड़े कर्मियों पर भी लागू होगा।
बिंदु १६ के अनुसार कर्मचारी मूल्यांकन को परिणाम से जोड़ना, सरकारी कार्यालयों के मानकों में सुधार, डिजिटल प्रोफाइल निर्माण, नागरिक सेवा केंद्र स्थापित करना, सेवा प्रक्रियाओं का पुनर्गठन, २४ घंटे शिकायत प्रणाली को सुदृढ़ बनाना और सभी सेवाओं को एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराना जैसे कदम वैदेशिक रोजगारियों को बेहतर सेवा देने में मदद करेंगे। श्रम विशेषज्ञ रामेश्वर नेपाल के अनुसार ये बिंदु उन परेशानियों को समाप्त करने की उम्मीद देते हैं जो सेवा प्राप्त करने के दौरान झेलनी पड़ती हैं।
श्रम मंत्रालय अतिरिक्त १० योजनाओं पर भी कार्य कर रहा है जो श्रम, रोजगार और वैदेशिक रोजगार क्षेत्र से संबंधित हैं। श्रम, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता पिताम्बर घिमिरे ने बताया कि १०० दिन की कार्यसूची में शामिल नहीं किए गए विषयों पर भी योजनाएं तैयार की जा रही हैं। वे कहते हैं कि सूची में शामिल विषयों को तुरंत आगे बढ़ाया जाएगा और अन्य अंतरमंत्रालयीय विषयों पर भी कार्रवाई की जाएगी।
प्रवक्ता घिमिरे ने कहा, ‘अन्य मंत्रालयों से जुड़े विषयों पर चर्चा चल रही है और मंत्रीजी भी इस विषय पर आगे चर्चा कर रहे हैं।’