Skip to main content

साइबर ठगी के खिलाफ कंबोडिया की क़दम तेज करने की प्रतिबद्धता

७ असोज, नोम पेन्ह (रासस/एएफपी) । कंबोडिया के प्रधानमंत्री हुन मानेट ने बुधवार स्पष्ट किया कि उनका देश साइबर ठगी के लिए कभी भी ‘सुरक्षित आश्रयस्थल’ नहीं बनने देगा। उन्होंने ऑनलाइन ठगी के खिलाफ सरकार द्वारा क़दम तेज किए जाने का दावा किया। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय साझेदारों ने कानून के क्रियान्वयन में हुई प्रगति की सराहना करते हुए कहा कि अभी भी कई काम बाक़ी हैं। दक्षिणपूर्वी एशिया में, विशेषकर कंबोडिया और युद्धग्रस्त म्यांमार, ऑनलाइन ठगी संचालित करने वाले आपराधिक नेटवर्क के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित हुए हैं। उन केंद्रों में मौजूद ठगों में से कुछ स्वेच्छा से आए होते हैं, तो कुछ मानव तस्करी के माध्यम से वहां लाए गए हैं। ये ठग नकली प्रेम संबंध और क्रिप्टोकरेन्सी निवेश योजनाओं के ज़रिए इंटरनेट उपयोगकर्ताओं को ठगते हैं।

राजधानी नोम पेन्ह में आयोजित ऑनलाइन ठगी विरोधी सम्मेलन में हुन मानेट ने कहा, “कंबोडिया ऑनलाइन ठगी के लिए कभी सुरक्षित आश्रयस्थल नहीं होगा।” उन्होंने पिछले वर्ष से शुरू की गई उच्चस्तरीय कार्रवाई के तहत कंबोडियाई अधिकारियों ने “छोटे या बड़े सभी ठगी केंद्रों को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया” होने का दावा किया। इस अभियान का उद्देश्य केवल जनसंपर्क नहीं, बल्कि आपराधिक नेटवर्क को स्थायी रूप से समाप्त करना और पुनः संचालन को रोकना बताया गया। कंबोडिया पर दशकों से ठगी केंद्रों को बढ़ावा देकर वार्षिक अरबों डॉलर के अवैध मुनाफ़े में सहायता करने का आरोप लगता रहा है।

चीन और अमेरिका के बढ़ते दबाव के बाद सरकार ने कार्रवाई तेज की है। जांचकर्ताओं के अनुसार ठगी करने वाले समूह छोटे और कम चर्चित स्थानों में छिपे हुए हैं। कई बार सुरक्षा बलों की छापेमारी से पहले ही ठगी केंद्र संचालक को सूचना मिल जाती है। अरबों डॉलर के कारोबार पर संयुक्त राष्ट्र के लागुऔषध एवं अपराध कार्यालय (यूएनओडीसी) की क्षेत्रीय प्रतिनिधि डेल्फिन शांट्ज ने कंबोडिया के प्रयासों की प्रशंसा करते हुए कहा कि राष्ट्रीय, क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर “अधिक काम करने की आवश्यकता और संभावना” बनी हुई है।

चीन के सार्वजनिक सुरक्षा उपमंत्री याङ वेलिन ने भी कंबोडिया के साथ सहयोग की सराहना की और कहा कि कोई भी देश इस समस्या से अलग या अकेले नहीं निपट सकता। उन्होंने टेलिकॉम ठगी के लिए अनुकूल माहौल अभी पूरी तरह समाप्त नहीं होने की चेतावनी दी। अमेरिकी संघीय जांच ब्यूरो (एफबीआई) के अधिकारी स्टेफन फ्लोरेस ने कानून के क्रियान्वयन संबंधी साझेदारी को विश्वास और साझा प्रतिबद्धता पर आधारित होने का ज़ोर दिया। अमेरिका के अनुमान के अनुसार, २०२५ तक दक्षिणपूर्वी एशिया के अंतर-देशीय आपराधिक संगठन साइबर ठगी के ज़रिये अमेरिकी नागरिकों से कम से कम १८.२ अरब डॉलर की ठगी कर चुके हैं। जुलाई में नोम पेन्ह के दौरे पर एफबीआई निदेशक काश पटेल ने ऑनलाइन ठगी को उच्च प्राथमिकता बताते हुए ठगी के उच्चस्तरीय संचालकों को जवाबदेह बनाने और इसमें शामिल अधिकारियों के बारें में सूचना आदान-प्रदान बढ़ाने का आग्रह किया था। विश्लेषकों के अनुसार ठगी व्यवसाय चलाने वाले समूहों को अभी उच्चस्तरीय संरक्षण और आवश्यक वित्तीय एवं भौतिक संसाधन उपलब्ध हैं, जिससे संचालक पुनः संगठित होने का खतरा बना हुआ है।