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भारत समुद्री कटान रोकने के लिए क्या कर रहा है?

१३ असोज, करियाचल्ली (भारत) (रासस/एएफपी) । समुद्री सतह बढ़ने के कारण भूभाग घटते भारत के दक्षिणी तट पर स्थित करियाचल्ली द्वीप को बचाने के लिए कृत्रिम चट्टान, प्रत्यारोपित कोरल और समुद्री घास का उपयोग किया जा रहा है। समुद्री कटान की गति को कम करते हुए द्वीप और मुख्य भूभाग को बढ़ती समुद्री सतह से बचाने का उद्देश्य इस संरक्षण अभियान का है। तमिलनाडु के दक्षिणी क्षेत्र में स्थित २१ द्वीपों की शृंखला में जुड़ा करियाचल्ली ने पिछले आधे शताब्दी में ८० प्रतिशत से अधिक भूभाग खो दिया है। सरकारी अनुमान के अनुसार, १९६९ में २०.८५ हेक्टेयर क्षेत्रफल वाला यह द्वीप पिछले वर्ष ३.१४ हेक्टेयर तक सीमित हो गया था। यदि समुद्री कटान को नियंत्रित न किया गया तो २०३६ तक यह द्वीप पूरी तरह समुद्र में विलीन हो सकता है।

वरिष्ठ राज्य अधिकारी सुप्रिया साहू ने बताया कि प्राकृतिक प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने पर तूफानों, चक्रवातों, समुद्री सतह वृद्धि और समुद्री कटान के जोखिम बढ़ जाते हैं। मन्नार की खाड़ी के कोरल चट्टान, समुद्री घास और छोटे द्वीप समुद्री लहरों के प्रभाव को सोख कर प्राकृतिक अवरोध का काम करते हैं, ऐसा समुद्री वैज्ञानिकों का मत है। इस क्षेत्र में दशकों से मानवीय गतिविधियां, प्रदूषण, अत्यधिक मछली पकड़ना और समुद्र के तापमान में वृद्धि के कारण कोरल चट्टान कमजोर हो रही हैं। करियाचल्ली के आसपास कोरल चट्टानों का क्षेत्रफल २००५ में लगभग ५०० हेक्टेयर था जो २०२१ में घटकर १९७ हेक्टेयर रह गया।

लगभग ४.७९ मिलियन अमेरिकी डॉलर के संरक्षण कार्यक्रम के तहत करियाचल्ली के आसपास आठ हजार पांच सौ कृत्रिम चट्टान संरचनाएं स्थापित की जा रही हैं। समुद्री सतह, धाराओं और लहरों के अध्ययन पर आधारित ये संरचनाएं लहरों की शक्ति को कम करने के साथ-साथ कोरल वृद्धि के लिए नए आधार उपलब्ध कराने की उम्मीद हैं। समुद्री घास मिट्टी और बालू को स्थिर रखने के साथ-साथ समुद्री जीवों के लिए प्रजनन और विकास का क्षेत्र प्रदान करती है। हालांकि, समुद्र के तापमान में वृद्धि कोरल पुनर्स्थापन में चुनौती बढ़ा रही है। २०२४ में इस क्षेत्र में आए गंभीर कोरल ब्लिचिंग की वजह से बड़े पैमाने पर कोरल मरे थे।

वैज्ञानिक भविष्य की समुद्री गर्मी की लहरों को सहन करने योग्य ताप में प्रतिरोधी कोरल प्रजाति की खोज भी कर रहे हैं। मन्नार की खाड़ी के अन्य द्वीपों में पुनर्स्थापन प्रयासों से अच्छे परिणाम मिले हैं। भान द्वीप पर करीब दस हजार कृत्रिम चट्टान संरचनाएं लगाए जाने के बाद खोया हुआ कुछ भूभाग पुनः प्राप्त करने में मदद मिली है। सिंगल द्वीप में प्रत्यारोपित कोरल भी २०२४ के ब्लिचिंग के प्रभावों को पुराने कोरल की तुलना में बेहतर तरीके से सह रहा था। वन्यजीव वार्डन अखिल थम्पी ने बताया कि भान द्वीप के पुनर्स्थापन के सकारात्मक परिणामों को देखते हुए करियाचल्ली में भी इसी तरह के प्रयास किए जा रहे हैं। समुद्री घास संरक्षण में लगे २९ वर्षीया मार्टिना ने कहा कि समुद्री घास बढ़ने से मछलियों के प्रजनन और समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण के साथ स्थानीय लोगों के जीवनयापन में सुधार होगा।