
टीकापुर साहित्य महोत्सव का तृतीय संस्करण सफलतापूर्वक संपन्न
टीकापुर में ‘टीकापुर साहित्य महोत्सव २०८२’ का तृतीय संस्करण चैत १३ से १५ तारीख तक सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। यह महोत्सव टीकापुर साहित्य समाज एवं सुदूरपश्चिम प्रज्ञाप्रतिष्ठान के संयुक्त आयोजन में रविवार को संपन्न हुआ। आयोजकों ने बताया कि महोत्सव में भाषा, साहित्य, कला, संस्कृति, शिक्षा, सामाजिक विकास से जुड़े विभिन्न विषयों को समाहित किया गया। महोत्सव के संस्थापक समन्वयक महेशविक्रम शाह के अनुसार, तृतीय संस्करण ‘थारू साहित्य तथा सांस्कृतिक उत्सव’ की विशेष सोच पर केंद्रित था।
महेशविक्रम शाह ने कहा, “हमारा प्रयास सुदूरपश्चिम प्रदेश की साहित्यिक और सांस्कृतिक पहचान को और मजबूत एवं स्थायी बनाते हुए बहुभाषिक-बहुसांस्कृतिक सहअस्तित्व का संदेश प्रवाहित करना रहा।” महोत्सव के दौरान २१ विशेष सत्र आयोजित किए गए, जिनमें भाषा, साहित्य, कला, संगीत, स्थानीय जनजीवन, इतिहास, पहचान, राजनीति, समाज और समसामयिक मुद्दों पर गहन चर्चा एवं अंतरक्रिया हुई। महोत्सव में देश के प्रतिष्ठित भाषाविद्, साहित्यकार, कलाकार, सामाजिक विचारक, चिकित्सक, पत्रकार, शोधकर्ता, संस्कृतिविद्, विकास विशेषज्ञ तथा पर्यटन कार्यकर्ताओं की भागीदारी रही।
महोत्सव की पहली श्रृंखला में कर्णाली नदी में जल विहार एवं थारू सांस्कृतिक नृत्य प्रस्तुत किये गए। दूसरी श्रृंखला में सड़क नाटक प्रदर्शन, लेखन कार्यशाला और प्रदेश स्तरीय कविता महोत्सव के कार्यक्रम संपन्न हुए। तृतीय श्रृंखला के अंतर्गत नाटक मंचन, थारू समुदाय की लोकसंस्कृति प्रदर्शन, बौद्धिक संवाद, काव्य श्रवण, ग़ज़ल श्रवण, संगीत कार्यक्रम तथा सुदूरपश्चिम का देउड़ा प्रस्तुत सहित विविध गतिविधियाँ आयोजित की गईं। चौथी श्रृंखला में थारू लोकसंस्कृतियों की महत्वपूर्ण विरासत लुप्तप्राय ‘रामलीला नाच’ का प्रदर्शन हुआ।
महोत्सव में साहित्य, कला और सामाजिक क्षेत्र के स्थापित व्यक्तित्वों के ज्ञान, अनुभव एवं सृजनात्मक यात्रा के प्रत्यक्ष संवाद ने स्थानीय पक्ष को लाभान्वित किया है, ऐसा महेशविक्रम शाह ने दावा किया। उन्होंने कहा, “हमारा प्रयास टीकापुर नगर को साहित्यिक एवं सांस्कृतिक केंद्र के रूप में स्थापित करने में मददगार साबित होगा।” महोत्सव से स्थानीय पर्यटन संवर्द्धन, आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि और सांस्कृतिक जागरूकता पर सकारात्मक प्रभाव की अपेक्षा की जा रही है।