
यूएई में 20 साल बिताने के बाद भेड़पालन में लाभकारी व्यवसाय शुरू किए हिमबहादुर छन्त्याल
म्याग्दी के धवलागिरि गाउँपालिका–5 मल्कवाङ के हिमबहादुर छन्त्याल ने 20 साल विदेश में रहने के बाद अपने जन्मस्थान वापसी कर भेड़पालन में हाथ आजमाना शुरू किया है। हिमबहादुर ने लगभग एक करोड़ रुपए का निवेश कर मल्कवाङ भेड़पालन फार्म संचालित कर रहे हैं और तीन लोगों को रोजगार भी प्रदान किया है। धवलागिरि गाउँपालिक ने भेड़पालन को प्रोत्साहित करते हुए टहरा निर्माण और नि:शुल्क टीकाकरण की व्यवस्था की है, हालांकि चराई क्षेत्र की कमी और जंगली जानवरों के हमलों जैसे चुनौतियों ने भेड़पालन को प्रभावित किया है।
नए अवसर और रोजगार की तलाश में 50 वर्षीय हिमबहादुर छन्त्याल ने 20 साल विदेश बिताने के बाद शहर की सुविधाजनक जीवनशैली छोड़कर अपनी जन्मभूमि लौटकर भेड़पालन शुरू किया है। सुविधाएं, अवसर और रोजगार के लिए गांव से शहर और विदेश तक प्रवास का चलन जारी रहकर भी, मल्कवाङ जैसे दूरदराज और कठिन क्षेत्र में उन्होंने भेड़पालन करके अपने ही क्षेत्र में जंगल की ओर कदम बढ़ाया है। ‘‘यूएई में 20 साल काम करके एकत्रित पूंजी से तो पोखरा में परिवार के साथ आरामदायक जीवन जी सकते थे,’’ उन्होंने कहा, ‘‘पर जन्मभूमि में कुछ करने की सोच लेकर गांव लौटे और व्यावसायिक रूप से भेड़पालन शुरू किया।’’
हिमबहादुर ने विदेश में प्राप्त अनुभव और पूंजी का सदुपयोग करते हुए अपने जन्मस्थान पर ‘मल्कवाङ भेड़पालन फार्म’ चलाया है। उनके परिवार और रिश्तेदार पोखरा में बसते हैं। वे करीब 600 भेड़ों को चराते हैं और सर्दियों में बेसी के मैदानों तथा बारिश के मौसम में हिमालय की घाटियों में घुम्ती गोठ चलाते हैं। ‘‘असोज के महीने में जो भेड़ें बेसी में हैं, वे सर्दियों में मल्कवाङ के खालीखोला के मैदानों में रखी जाती हैं,’’ उन्होंने बताया, ‘‘वैशाख से गोठ को नीचे की ओर ले जाकर साउन-भदौ में धवलागिरि हिमालय के बुकी पाटन तक पहुंचाया जाता है।’’
शहर के कोलाहल, प्रदूषण और तनाव से दूर भेड़पालन करते हुए लेक-बेसी करने का अनुभव हिमबहादुर के अनुसार आनंददायक रहा है। वे सालाना लगभग 300 भेड़-बकरियों की बिक्री करते हैं और स्वरोजगार कायम रखे हुए हैं। गांव के तीन लोगों को रोजगार भी दिया गया है। लगभग एक करोड़ रुपए निवेश कर फार्म चलाकर वार्षिक 30 से 40 लाख रुपए की आय होती है। मांस और पूजा-आज के लिए गोठ से ही भेड़ों के बछड़ों की बिक्री होती है और आवश्यक उत्पादन में बाज़ार में किसी प्रकार की समस्या नहीं होती, उनका कहना है।
धवलागिरि गाउँपालिक ने भेड़पालन को प्रोत्साहित करते हुए टहरा निर्माण का कार्य किया है, इसका विवरण वडाध्यक्ष अमर छन्त्याल ने दिया। पशुभवन अस्पताल और पशु सेवा केंद्र आंतरिक एवं बाहरी परजीवी और महामारी से बचाव के लिए नि:शुल्क टीकाकरण उपलब्ध करा रहे हैं। हिमबहादुर ने घुम्ती गोठ की सुरक्षा के लिए पांच कुत्ते और आहार ढुलाई के लिए दो घोड़े पालकर संरक्षण किया है। चराई के क्षेत्र की कमी, जंगली जानवरों के हमले और जलवायु परिवर्तन ने भेड़पालन के सामने एक नई चुनौतियाँ खड़ी की हैं, उन्होंने बताया।