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बिस्केट जात्राको तैयारी तेजी से आगे बढ़ रही है

समाचार सारांश

AI द्वारा निर्मित। संपादकीय समीक्षा की गई।

  • भक्तपुर में नौ दिन आठ रात तक चलने वाले ऐतिहासिक बिस्केट जात्रा की तैयारी तेजी से चल रही है।
  • चैत्र २७ से शुरू होने वाले जात्रा में भैरव और भद्रकाली के रथ निर्माण कार्य चैत्र २६ तक पूरा किए जाएंगे, यह जानकारी प्रेम सिल्पकार ने दी।
  • जात्रा के अंतिम दिन वैशाख ५ को, भैरव के रथ को दो सौ फुट लंबी चार-चार डोरियों से बांधकर टोल के निवासी दोनों तरफ से तान कर अपने-अपने टोलों में लेकर उत्सव मनाने की परंपरा है।

२० चैत्र, काठमांडू। भक्तपुर में नौ दिन आठ रात तक आयोजित होने वाली ऐतिहासिक बिस्केट जात्रा की तैयारी तेजी से आगे बढ़ रही है।

जात्रा के लिए भक्तपुर के टौमढी में स्थित पाँचतले मंदिर प्रांगण में भैरव और भद्रकाली के रथ निर्माण का कार्य तेजी से चल रहा है।

हर नए वर्ष भक्तपुरवासी परंपरागत तांत्रिक विधि अनुसार नौ दिन आठ रात तक मनाने वाली बिस्केट जात्रा इस वर्ष चैत्र २७ से प्रारंभ होगी।

नए वर्ष के चार दिन पूर्व भैरव के रथ को तानकर शुरू होने वाली जात्रा मुख्य रूप से चैत्र के अंत में इन्द्रध्वज सहित लिंगो उठाने की परंपरा से जुड़ी है और वैशाख १ को लिंगो जात्रा लासिंग्खेल में मनाने के बाद शाम को लिंगो तोड़कर जात्रा का समापन किया जाता है।

जात्रा के लिए भैरव और भद्रकाली के रथ निर्माण कार्य चैत्र २६ तक पूरा किया जाएगा, यह जानकारी रथ निर्माता प्रेम सिल्पकार ने दी है।

चैत्र २७ की दोपहर तांत्रिक विधि अनुसार भैरवनाथ के रथ पर खड़्ग, तरवार और निशान स्थापित होने के बाद अपराह्न से रथ तानने की परंपरा चलती है।

वैसे ही, वैशाख ५ को जात्रा के अंतिम दिन, शुरुआती दिन की तरह प्रसिद्ध पाँचतले मंदिर के टौमढी टोल से भैरव के रथ को दो सौ फुट लंबी चार-चार डोरियों से बांधकर निचले और ऊपरी टोल के निवासी दोनों तरफ से तानकर अपने-अपने टोलों में लेकर जाने की परंपरागत उत्सव मनाई जाती है।

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