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भारतीय संसद्‍मा बालेन सरकारको ‘माफी’ चर्चा – Online Khabar

भारतीय संसद में बालेन सरकार के ‘माफी’ प्रस्ताव पर चर्चा

नेपाल सरकार ने प्रधानमंत्री बालेन शाह के नेतृत्व में दलित और सीमांत समुदायों से औपचारिक माफी मांगने की घोषणा की है। इस ऐतिहासिक कदम ने भारतीय मीडिया में भी महत्वपूर्ण चर्चा पाई है। भारतीय सांसद चंद्रशेखर आजाद ने इस पहल को उदाहरण बताते हुए भारत सरकार से दलित समुदाय से माफी मांगने का आग्रह किया है। २३ चैत्र, काठमांडू।

नेपाल के इतिहास में संभवतः पहली बार राज्य ने दलित और ऐतिहासिक रूप से सीमांत समुदायों से औपचारिक माफी मांगने की तैयारी की है। नव निर्वाचित प्रधानमंत्री बालेन शाह के नेतृत्व वाली सरकार ने मंत्रिपरिषद की पहली बैठक में १०० बिंदुओं वाली शासन सुधार एजेंडा पारित करते हुए १५ दिन के अंदर माफी मांगने की घोषणा की है। माफी के साथ ही सामाजिक न्याय, समावेशी पुनर्स्थापना और ऐतिहासिक मेल-मिलाप के लिए विशेष सुधार कार्यक्रम लागू किए जाने की बात कही गई है।

इस कदम को दलित आंदोलन के कार्यकर्ताओं ने ‘ऐतिहासिक’ बताया है और इसने दक्षिण एसियाई देशों में जातीय भेदभाव पर नई बहस को जन्म दिया है। भारतीय लोकसभा में भी इस विषय पर चर्चा हुई है। सांसद चंद्रशेखर आजाद ने नेपाल के निर्णय को उदाहरण देते हुए भारत सरकार और संसद से दलित एवं सीमांत समुदायों के प्रति औपचारिक माफी मांगकर ऐतिहासिक अन्याय की नैतिक जिम्मेदारी उठाने का आह्वान किया।

भारत में जाति प्रथा हजारों वर्ष पुरानी है और यह भारतीय जीवन और राजनीति में गहरा प्रभाव रखती है। १९५० में भारतीय संविधान ने जाति भेदभाव पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया था, फिर भी बड़े शहरों को छोड़कर देशभर में जातीय भेदभाव विभिन्न रूपों में जारी है। दलित समुदाय अक्सर भेदभाव का सामना करता है। नेपाल में भी नेपाली समाज हिन्दू वर्ण व्यवस्था पर आधारित है। रास्वपा अध्यक्ष रवि लामिछाने ने दलित समुदाय से माफी मांग चुके हैं। इस घटना ने नेपाल-भारत के साझा सामाजिक एवं सांस्कृतिक मुद्दों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उजागर किया है।

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