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ईरान युद्ध: मध्य पूर्व तेल संकट ने भारत की उच्च आर्थिक वृद्धि को झटका दिया

खाना पकाने वाले गैस सिलेंडर

तस्वीर स्रोत, Getty Images

तस्वीर का शीर्षक, कच्चा तेल का विश्व का तीसरा सबसे बड़ा आयातक भारत अपनी आवश्यक प्राकृतिक गैस का 60% और खाना पकाने में उपयोग होने वाली LPG का 90% आयात करता है

भारत के केंद्रीय बैंक रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने देश में कम मुद्रास्फीति और उच्च वृद्धि की वर्तमान स्थिति को “अभूतपूर्व समय” कहा है।

मगर मध्य पूर्व में जारी युद्ध और उससे तेल बाजार में हुए व्यवधान के कारण भारत की विशेष आर्थिक वृद्धि को अप्रत्याशित झटका लगा है और इससे यह स्थिति क्षणिक परिवर्तनीय हो गई है।

इसका क्या प्रभाव हुआ?

सबसे गंभीर प्रभाव भारतीय मुद्रा रुपये पर पड़ा है। भारतीय रुपये ने अब तक का सबसे बड़ा अवमूल्यन झेला है। पिछ्ले वर्ष की तुलना में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये 10% कम मूल्यवान हो चुका है।

केंद्रीय बैंक ने हस्तक्षेप कर क़ुछ राहत दि है, परन्तु वह संभवतः अस्थायी होगी। युद्ध के लंबे समय तक चलने की संभावना से आगे भी रुपये का और अवमूल्यन हो सकता है, विशेषज्ञों का अनुमान है।

यदि स्थिति अत्यंत खराब हुई और युद्ध सन् 2026 तक जारी रहा तो भारतीय रुपये की स्थिति ‘विनाशकारी’ हो सकती है, और प्रति डॉलर मूल्य 110 रुपये (नेरू 176) या उससे अधिक पहुंच सकता है, बर्नस्टीन का अनुमान है। युद्ध समाप्त भी हो गया तो इसका असर लम्बे समय तक बना रहेगा।

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