
पाकिस्तान की मध्यस्थता में अमेरिका-ईरान युद्ध रोकने में सफलता
अप्रैल २०२६ में पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच होने वाले युद्ध को दो सप्ताह के लिए रोकने में सफलता हासिल की। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ और सैन्य प्रमुख आसिम मुनीर ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से युद्ध स्थगित करने का अनुरोध किया, जिसके बाद ट्रंप ने हमला दो सप्ताह के लिए स्थगित कर दिया। इस्लामाबाद समझौते में तत्काल युद्धविराम, होर्मुज जलमार्ग के पुनः संचालन और इस्लामाबाद में प्रत्यक्ष वार्ता की व्यवस्था सम्मिलित है। २५ चैत, काठमाडौँ।
विश्व राजनीति में ऐसे दुर्लभ क्षण बहुत कम देखने को मिलते हैं, जब एक छोटा देश विश्व की महाशक्तियों के बीच होने वाले विनाशकारी युद्ध को रोकने में सक्षम होता है। अप्रैल २०२६ के पहले सप्ताह में विश्व ने एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक घटना देखी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार की रात ईरान पर तत्काल सैन्य हमला करने की घोषणा की थी और चेतावनी दी थी कि यह हमला ‘‘पूरी सभ्यता को समाप्त कर देगा’’। इस खबर ने विश्व को स्तब्ध कर दिया और ईरान के करोड़ों नागरिकों को पूरी रात जागते रहने को मजबूर कर दिया।
इतने जटिल और भयावह परिस्थिति में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर के निरंतर कूटनीतिक प्रयासों ने उस आक्रमण को टालने में सफलता पाई। इसके फलस्वरूप, ईरान और अमेरिका के बीच दो सप्ताह के लिए युद्धविराम की घोषणा हुई और इस घटना ने इस्लामाबाद को विश्व शांति का केंद्र बनने का अवसर प्रदान किया। इसी अवधि में, दक्षिण एशिया के बड़े लोकतंत्र और स्वयं को ‘विश्वगुरु’ बताने वाले भारत के सामने अपने पुराने प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान ने यह बड़ी कूटनीतिक सफलता हासिल की।