
संपत्ति जांच आयोग की कार्यप्रणाली क्या है?
सरकार ने सार्वजनिक पदों पर नियुक्त व्यक्तियों की संपत्ति जाँच के लिए सर्वोच्च के पूर्व न्यायाधीश राजेन्द्रसिंह भण्डारी की अध्यक्षता में पाँच सदस्यों का एक न्यायिक आयोग गठित किया है। यह आयोग २०६२/६३ से २०८२/८३ तक के सार्वजनिक पदों पर रह चुके प्रमुख राजनीतिक पदाधिकारियों और उच्च पदस्थ कर्मचारियों की संपत्ति की जांच करेगा। आयोग केवल जांच करता है, कार्रवाई नहीं कर सकता; इसके लिए इसकी सिफारिश अभियोजन प्राधिकरण को भेजी जाएगी। यदि गैरकानूनी संपत्ति अधिग्रहण की पुष्टि होती है तो एक से तीन वर्ष तक की कैद और जुर्माने का प्रावधान है।
२ वैशाख, काठमाडौं। सरकार ने सार्वजनिक पदों पर कार्यरत व्यक्तियों की संपत्ति की जांच के लिए न्यायिक आयोग गठन करने का निर्णय लिया है। बुधवार को हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में सर्वोच्च अदालत के पूर्व न्यायाधीश राजेन्द्रसिंह भण्डारी की अध्यक्षता में पाँच सदस्यीय आयोग बनाने का निश्चय किया गया। आयोग में पुनरावेदन अदालत से सेवानिवृत्त न्यायाधीश पुरुषोत्तम पराजुली और चण्डीराज ढकाल सदस्य हैं। नेपाल पुलिस के पूर्व डिप्टी आईजी गणेश केसी और चार्टर्ड एकाउंटेंट प्रकाश लम्साल भी आयोग के सदस्य नियुक्त किए गए हैं।
सरकार ने प्रधानमंत्री तथा मंत्रिपरिषद कार्यालय के अधीन एक संपत्ति जांच समिति बनाने की योजना बनाई थी, लेकिन बुधवार को मंत्रिपरिषद ने पूर्व की तरह एक मजबूत जांच आयोग स्थापना का निर्णय लिया। यह आयोग २०६२/६३ से २०८२/८३ के बीच सार्वजनिक पदों पर रहे व्यक्तियों की संपत्ति का विवरण जांचेगा। सरकार की सौ-फेज़ीय कार्ययोजना के तहत संपत्ति जांच दो चरणों में होगी; पहले चरण में २०६२/६३ से २०८२/८३ की अवधि की संपत्ति की जांच होगी।
दूसरे चरण में २०४८ से २०६२/६३ के जनआन्दोलन तक की संपत्ति की जांच करने का प्रावधान है। आयोग को आवश्यक दस्तावेज, विवरण और अभिलेख एकत्रित कर विश्लेषण करने तथा सिफारिश करने का अधिकार प्राप्त होगा। इस आयोग की अधिकार सीमा गौरीबहादुर कार्की की अध्यक्षता में गठित आयोग के बराबर होगी, जो जेएनजिई आन्दोलन में हुए दमन और विध्वंस की भी जांच करता है।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, २०५९ सार्वजनिक पदों पर कार्यरत लोगों को गैरकानूनी संपत्ति अर्जित करने से रोकता है। कानून के विरुद्ध संपत्ति जुटाने या असामान्य जीवनशैली अपनाने वालों के खिलाफ गैरकानूनी संपत्ति अर्जन का मामला चलाया जाता है। हालांकि, गैर-सार्वजनिक पद के व्यक्तियों पर यह कानून लागू नहीं होता, लेकिन यदि उनकी असामान्य संपत्ति मिलती है और अन्य अपराध सिद्ध होते हैं तो संपत्ति शुद्धिकरण के आरोप में भी जाँच हो सकती है।
गैरकानूनी संपत्ति के प्रमाण मिलने पर आरोपित को एक से तीन वर्ष कैद, जुर्माना और क़ुर्बानी देना पड़ सकता है। ऐसे मामलों में गैरकानूनी संपत्ति जब्त करने का प्रावधान भी है। वर्तमान में न्यायाधीश और सैनिकों की जांच नहीं की जा सकती, लेकिन वे सेवानिवृत्त होने के बाद अभियोजन प्राधिकरण जांच कर सकता है।
राजेन्द्रसिंह भण्डारी ने २०२२ में प्रशासन सेवा में शाखा अधिकृत के रूप में प्रवेश किया था और २०६४ में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश से सेवानिवृत्त हुए। गठित आयोग सार्वजनिक पदाधिकारियों की संपत्ति जांच करेगा लेकिन स्वयं मुक़दमा चलाने या कार्रवाई करने में सक्षम नहीं होगा, इसके लिए अलग से सिफारिश करनी होगी।
पहली बार तत्कालीन देउवा सरकार ने २०५८ फाल्गुन २० को ‘२०४७ के बाद सरकारी सेवा में आए लोगों की संपत्ति जांच’ के लिए आयोग बनाया था। उस आयोग के अध्यक्ष बहाल न्यायाधीश भैरव लम्साल थे, और सदस्य पूर्व न्यायाधीश उदयराज उपाध्याय तथा ज्ञाइन्द्रबहादुर श्रेष्ठ थे। उस आयोग की रिपोर्ट के आधार पर अनेक मंत्री और सार्वजनिक पदाधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले दर्ज किए गए।
राजेन्द्रसिंह भण्डारी प्रशासन सेवा में शाखा अधिकृत के रूप में २०२२ में शामिल हुए थे और २०६४ में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के पद से सेवानिवृत्त हुए। उन्होंने जिला, अंचल, विशेष और पुनरावेदन अदालतों में कार्यरत रहने के बाद सर्वोच्च अदालत तक अपनी न्यायिक यात्रा पूरी की। २०६१ से २०६४ तक सर्वोच्च अदालत के न्यायाधीश रहे भण्डारी सेवानिवृत्ति के बाद पाँच जांच आयोगों का नेतृत्व कर चुके हैं। माओवादी शांति प्रक्रिया में कोटेश्वर के व्यापारी रामहरि श्रेष्ठ हत्या के मामले की जांच करने वाले आयोग की अध्यक्षता उन्होंने की थी।
अन्य आयोगों में पुलिस की गोली से प्रदीपकुमार खड्का मृत्यु, खिलाड़ी निर्मल पन्त और पुष्कर डंगोल हत्या, तथा केंद्रीय कारागार में गोलीबारी की जांच भी शामिल है। इस्लामिक महासंघ के महासचिव फैजान अहमद की हत्या की जांच भी उनके नेतृत्व में हुई है। पूर्व न्यायाधीश फोरम के सक्रिय सदस्य भण्डारी सर्वोच्च न्यायालय में मेलमिलापकर्ता और मध्यस्थ (आर्बिटरेटर) के रूप में भी कार्यरत हैं।