
कंचनजंघा क्षेत्र में पर्यटकों की चहल-पहल तेजी से बढ़ रही है
५ वैशाख, ताप्लेजुंग। ताप्लेजुंग में स्थित विश्व की तीसरी सबसे ऊँची पर्वत शृंखला कंचनजंघा क्षेत्र में पर्यटकों का आगमन शुरू हो गया है। मौसम अनुकूल होने के कारण यहां आंतरिक एवं विदेशी पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। कंचनजंघा क्षेत्र का यात्रा हेतु सबसे उपयुक्त समय चैत्र के पहले सप्ताह से ज्येष्ठ के तीसरे सप्ताह तक माना जाता है। कंचनजंघा संरक्षण क्षेत्र प्रबंधन परिषद, घुन्सा चेकपोस्ट के पर्यटन सहायक तांसीचिरिंग शेर्पा के अनुसार, पिछले एक माह में १६५ विदेशी पर्यटकों ने भ्रमण किया है। इस क्षेत्र में साल में दो मुख्य पर्यटन मौसम होते हैं, प्रथम चैत्र से ज्येष्ठ तक और द्वितीय आश्विन से मंसिर तक, उन्होंने जानकारी दी। पिछले वर्ष के प्रथम मौसम में ही ७५० विदेशी पर्यटक यहां आए थे, यह जानकारी घुन्सा चेकपोस्ट ने दी।
कंचनजंघा आधार शिविर पहुंचने के लिए दो प्रमुख पदमार्ग संचालित हैं। एक मार्ग पाँचथर के गणेशचोक से होकर सिरिजंघा गाउँपालिका तक जाता है, जबकि दूसरा काठमांडू से हवाई मार्ग से सुकटार हवाई अड्डे होकर फक्ताङलुङ गाउँपालिका से होकर जाता है। पर्यटकों के लिए लक्ष्यित करते हुए कंचनजंघा पदमार्ग में छोटे-बड़े कुल ५२ होटल संचालित हैं, ऐसा कंचनजंघा संरक्षण क्षेत्र प्रबंधन परिषद ने बताया। फक्ताङलुङ गाउँपालिका-६ ग्याप्ला में लगभग सात करोड़ रुपए से अधिक निवेश के साथ ‘सिंगी नामजोंग होटल’ संचालित हो चुका है। समुद्र तल से ३५०० से ४५०० मीटर ऊंचाई तक एक करोड़ रुपए से अधिक निवेश के साथ चार होटल संचालित हैं, घुन्सा चेकपोस्ट के पर्यटन सहायक शेर्पा ने जानकारी दी।
सदरमुकाम फुङ्लिङ बाजार में भी पर्यटकों के लक्षित बड़े निवेश वाले होटल खुल चुके हैं। पर्यटकों की संख्या बढ़ने के साथ यहां के पर्यटन एवं होटल व्यवसायी उत्साहित हैं। कंचनजंघा संरक्षण क्षेत्र के स्थानीय समुदाय की मुख्य जीविका पर्यटन, होटल व्यवसाय और पशुपालन पर आधारित है। घुन्सा, फले और याम्फुदिन क्षेत्रों के अधिकांश परिवार सीधे तौर पर पर्यटन से जुड़े हुए हैं, पर्यटन सहायक शेर्पा ने बताया। उनके अनुसार कुछ लोग होटल संचालित कर स्वरोजगार हुए हैं, जबकि कुछ पर्यटक मार्गदर्शक या सहायक के रूप में आय अर्जित कर रहे हैं। खेती की संभावनाएं कम होने के कारण युवा वर्ग पशुपालन की बजाय पर्यटन व्यवसाय की ओर आकर्षित हो रहा है, उन्होंने कहा।
सन् १९५५ के २५ मई को कंचनजंघा की पहली आरोहण की ऐतिहासिक घटना हुई थी। पूर्व काल में फुङ्लिङ से पैदल यात्रा में लगभग २४ दिन लगते थे, जबकि अब इस क्षेत्र की यात्रा का समय घटकर ११ से १६ दिन के भीतर दोनों आधार शिविर तक पहुंचकर वापस लौटना संभव हो गया है। यहाँ चैत्र, वैशाख, ज्येष्ठ तथा आश्विन, कार्तिक व मंसिर में पर्यटकों का दबाव अधिक रहता है। हिमाल आरोहण मुख्य रूप से वैशाख और ज्येष्ठ में होता है, पर्यटन सहायक शेर्पा ने बताया। यहां जापान, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन, नीदरलैंड, कनाडा, स्विट्जरलैंड, बेल्जियम, फिलीपींस, स्पेन, स्वीडन सहित विभिन्न देशों से पर्यटक आते हैं। इसके अलावा भारत और चीन से भी कम संख्या में पर्यटक भ्रमण व आरोहण के लिए आते हैं।