Skip to main content

चलचित्र पत्रकारिता में सुधार की आवश्यकता पर चर्चा

चलचित्र निर्माता अविरल थापाने सामाजिक मीडिया पर चलचित्र पत्रकारिता की मौजूदा स्थिति पर सवाल उठाए हैं। उनके अनुसार, चलचित्र पत्रकारिता को प्रचार से अधिक सच्चाई प्रस्तुत करने पर केंद्रित होना चाहिए, लेकिन वर्तमान में अधिकतर पब्लिसिटी पर ध्यान दिया जा रहा है। चलचित्र पत्रकार महासंघ के दसवें महासभा में नेतृत्व से पत्रकारिता की गुणवत्ता सुधारने और आत्म-अनुशासन पर जोर देने की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। पिछले वर्ष फिल्म ‘भुठान’ के रिलीज के दौरान उन्होंने सामाजिक मीडिया पर एक गंभीर प्रश्न उठाया था – ‘क्या नेपाली चलचित्र पत्रकारिता सही दिशा में आगे बढ़ रही है?’ फिल्मों के रिलीज के संवेदनशील समय में उन्होंने यह सवाल उठाना स्वयं में महत्वपूर्ण था।

चलचित्र पत्रकारों के व्यवहार और गतिविधियों से निराश होकर उन्होंने इस प्रकार की प्रतिक्रिया दी। उनका स्टेटस सार्वजनिक होने के कुछ ही दिनों बाद लभिं मल में उसी फिल्म के ट्रेलर रिलीज कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। वहां उपस्थित कई पत्रकारों, विशेष रूप से यूट्यूबरों ने असंबंधित और अनावश्यक प्रश्नों के कारण कार्यक्रम को असहज बना दिया। अविरल थापा न केवल फिल्म निर्माता हैं बल्कि पत्रकारिता पढ़ाने वाले कॉलेज ‘पोलिगन’ के प्रिंसिपल भी हैं। ऐसी पृष्ठभूमि वाले व्यक्ति को कुछ यूट्यूबर ही पत्रकारिता सिखाने की स्थिति देखी जा रही है।

चलचित्र पत्रकारिता में हो रही हालिया गतिविधियां एक गंभीर प्रश्न उठाती हैं – हम चलचित्र पत्रकारिता कहते हैं, क्या यह वास्तव में पत्रकारिता है? या पत्रकारिता के नाम पर एक अलग व्यापार चल रहा है? हर किसी के लिए वीडियो बनाने, यूट्यूब और फेसबुक पर तुरंत अपलोड कर वायरल बनाने, और डॉलर कमाने की मानसिकता हावी हो गई है। यह न केवल कलाकारों और निर्माताओं के लिए बल्कि पूरे क्षेत्र की विश्वसनीयता पर सवाल उठाता है। चलचित्र पत्रकारिता की इन समस्याओं के मुख्य कारणों में संस्थागत कमजोरियां भी शामिल हैं। चलचित्र पत्रकार संघ, जो इस क्षेत्र को आगे बढ़ाने का काम करता है, स्वयं असहज और प्रभावहीन नजर आता है।

आज चलचित्र पत्रकार महासंघ की दसवीं महाधिवेशन हो रही है। नेतृत्व परिवर्तन के इस समय में पद वितरण मात्र नहीं, बल्कि आत्ममूल्यांकन करने, गलतियाँ स्वीकार करने और नई दिशा निर्धारित करने का भी अवसर है। सवाल अब भी कायम है – क्या नया नेतृत्व इसे गंभीरता से लेगा? यदि सच्चे बदलाव की आवश्यकता है तो सबसे पहले आत्म-अनुशासन से शुरुआत करनी होगी। पत्रकारिता सीखनी होगी, समझनी होगी और नियमित अभ्यास करना होगा।

चलचित्र पत्रकारिता अभी खत्म नहीं हुई है, लेकिन यह एक गंभीर मोड़ पर खड़ी है। अब आने वाले निर्णय से ही तय होगा – क्या यह क्षेत्र पुनः गरिमा प्राप्त करेगा या भीड़-भाड़ के शोर में खो जाएगा।

जवाफ लेख्नुहोस्

तपाईँको इमेल ठेगाना प्रकाशित गरिने छैन। अनिवार्य फिल्डहरूमा * चिन्ह लगाइएको छ