
महिला आरक्षण विधेयक असफल होने पर मोदी ने कहा राजनीतिक भ्रूण हत्या है?
समाचार सारांश संपादकीय समीक्षा सहित। भारतीय लोकसभा में महिला आरक्षण और निर्वाचन क्षेत्र पुनर्निर्धारण से जुड़ा संविधान संशोधन विधेयक आवश्यक दो तिहाई बहुमत प्राप्त न कर पाकर असफल रहा। विधेयक असफल होने पर प्रधानमंत्री मोदी ने विपक्षी दलों पर ‘राजनीतिक भ्रूण हत्या’ का आरोप लगाते हुए महिला अधिकारों की हत्या का दावा किया। विधेयक की असफलता से दक्षिण भारत की राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर प्रभाव पड़ने का डर और आगामी डिलिमिटेशन प्रक्रिया में नए चुनौतियां उत्पन्न होने की आशंका बनी है। ६ चैत, काठमाडौँ। भारतीय संसदीय इतिहास में एक दुर्लभ राजनीतिक घटना हुई है। शुक्रवार को लोकसभा में प्रस्तुत ‘‘एक सौ एकतीसवाँ संविधान संशोधन विधेयक, २०२६’’ आवश्यक बहुमत हासिल न कर पाने के कारण असफल हो गया। शक्तिशाली बहुमत वाली सरकार द्वारा प्रस्तुत यह संविधान संशोधन विधेयक सदन में असफल होना भारतीय लोकतंत्र के लिए एक महत्वपूर्ण और दुर्लभ क्षण माना जा रहा है। यह विधेयक सन् २०२३ में पारित ‘नारी शक्ति वन्दना अधिनियम’ के क्रियान्वयन से सीधे जुड़ा था। उक्त अधिनियम द्वारा निर्धारित ३३ प्रतिशत महिला आरक्षण को तुरंत लागू करने के लिए निर्वाचन क्षेत्र पुनर्निर्धारण यानी डिलिमिटेशन प्रक्रिया को नया एवं संशोधित स्वरूप देने का प्रस्ताव इस विधेयक में था। विधेयक असफल होने का मुख्य कारण विपक्षी गठबंधन (इंडिया ब्लॉक) की अभूतपूर्व एकता और कड़ी प्रतिक्रिया रही। संविधान संशोधन के लिए आवश्यक सदन का दो तिहाई बहुमत जुटाने में सरकार विफल रही। विपक्षी दलों ने निर्वाचन क्षेत्र पुनर्निर्धारण के कुछ प्रस्तावित प्रावधानों को संघीय संतुलन बिगाड़ने और दक्षिणी राज्यों के प्रतिनिधित्व में अन्याय करने वाला करार देते हुए एकजुट विरोध किया। विधेयक असफल होते ही महिला आरक्षण लागू करने के भविष्य और इस प्रक्रिया से जुड़े नए कानूनी तथा राजनीतिक प्रश्न उठने लगे हैं। मतदान में ५२८ सांसद मौजूद थे, जिनमें से २९८ ने समर्थन में और २३० ने विरोध में मतदान किया। संविधान संशोधन के लिए न्यूनतम ३५२ मत आवश्यक थे, जो ५४ मतों से कम पड़े इस वजह से विधेयक असफल हुआ। पराजय के बाद सरकार ने संबंधित अन्य दो विधेयक – ‘‘डिलिमिटेशन विधेयक, २०२६’’ और ‘‘संघ राज्य क्षेत्र कानून (संशोधन) विधेयक, २०२५’’ वापस ले लिए। यह घटना मोदी सरकार के १२ वर्ष के शासनकाल में पहली बार संवैधानिक संशोधन विधेयक की असफलता का प्रतीक है।