
चितवन के सौराहा में एकसिंघे गैंडे की मनोरम यात्रा
७ वैशाख, चितवन। चितवन के सौराहा में पर्यटकों का झुंड केवल जंगल सफारी के लिए ही नहीं आता, बल्कि वे एक ऐसे एकसिंघे गैंडे से मिलने भी आते हैं जो अब घर जैसा ही लगने लगा है। उस गैंडे का नाम है, ‘राम’। बाघमारा सामुदायिक वन में मां से अलग होकर बाघ के हमले में घायल होकर लगभग एक महीने पहले बचाए गए राम अब तीन वर्ष के हो चुके हैं। शुरू में कमजोर और डरपोक लगने वाला यह गैंडा अब इंसानों के साथ घुलने-मिलने, खेलने और पर्यटकों के साथ रमण करने की आदत डाल चुका है।
राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण कोष परिसर के आसपास दिनभर चरता हुआ राम सुबह लगभग ५:३० बजे खुला छोड़ा जाता है। शाम ६:३० बजे के करीब उसे फिर से खोर में वापस लाया जाता है। दिनभर हरी घास और आसपास की वनस्पतियों को खाने में मग्न रहने वाले राम को शाम को मकई का भुसा देना पसंद है, ऐसा उसकी देखभाल करने वाले लालबहादुर महतराले ने बताया। राम साथ में बड़ा हुआ उसका साथी ‘देव’ भी था, लेकिन पिछले दिसंबर में देव के निधन के बाद राम अब अकेला है। तब से उसकी देखभाल और पालन-पोषण की जिम्मेदारी लालबहादुर महतराले संभाल रहे हैं।
महटराले के अनुसार, राम अभी भी बाघ के हमले से लगी चोट के कारण चलने में असुविधा महसूस करता है। उसका पैर थोड़ा टेढ़ा है। उम्र बढ़ने के साथ यह समस्या बढ़ सकती है, जो उनकी चिंता है। इसके बावजूद, राम पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन चुका है। उसके इतने करीब जाकर तस्वीरें लेना, उसकी गतिविधियों को देखना और कुछ समय के लिए ‘जंगल का साथी’ महसूस करना पर्यटकों को एक अनोखा अनुभव प्रदान करता है। पर्यटन के नजरिए से गैंडा चितवन का प्रमुख आकर्षण है। जंगल सफारी पर निकले पर्यटक गैंडे को पास से देखना कभी न भूलने वाला अनुभव मानते हैं। इसलिए गैंडा संरक्षण और पर्यटन के बीच संतुलन बनाए रखना वर्तमान में प्रमुख चुनौती बन चुका है।