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लछारपछार पारियो, बुट बजार्दै ह्विलचियर मिल्काइयो – Online Khabar

लछारपछार के बाद ह्वीलचेयर टूटा, बूट से ह्वीलचेयर पर हमला किया गया

समाचार सारांश

संपादन द्वारा समीक्षा गरिएको ।

  • अपंगता महासंघ नेपाल के 10वें महाधिवेशन में ह्वीलचेयर उपयोगकर्ताओं के प्रति अमानवीय व्यवहार हुआ है।
  • महाधिवेशन में नेतृत्व चयन को लेकर विवाद और बल प्रयोग करके चुनाव कराने का आरोप लगा है।
  • प्रतिनिधि राज्य तंत्र का उपयोग कर आवाज दबाने की बात करते हुए मानवाधिकार आयोग में शिकायत की तैयारी कर रहे हैं।

7 वैशाख, पोखरा। जन्म के 18 महीने में पोलियो इंफेक्शन के कारण दोनों पैर चलने लायक नहीं रहे हेमबहादुर गुरुङ का जीवन 25 वर्षों तक घिसटते हुए बीता।

पिछले 25 वर्षों से वे ह्वीलचेयर के माध्यम से अपंगता क्षेत्र में काम करते हुए अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। अब तक कभी विक्षिप्त नहीं रहे हेमबहादुर को इस बार अभूतपूर्व अमानवीय व्यवहार का सामना करना पड़ा।

उनका शरीर अब भी कम्पकंपाता है, दर्द है, लेकिन मन का दर्द सबसे बड़ा है। अपंगता क्षेत्र की संस्था के नेतृत्व द्वारा किए गए दमन को याद करके हेमबहादुर भावुक हो गए हैं।

उनके साथ लछारपछार की गई, ह्वीलचेयर पर बूट मारे गए। लोग एक तरफ और ह्वीलचेयर दूसरी तरफ टूट गई। आत्मसम्मान की बात करें तो यहां तक कि पेशाब के लिए जाने की अनुमति भी नहीं मिली।

‘अमानवीयता ने सभी सीमाएं पार कर दीं। अपंग व्यक्तियों पर बेरहमी से हमला हुआ। जीवन के 50वें वर्ष में पहले कभी न सहने वाला अपमान सहना पड़ा। वह सोचकर मन भर आता है, आंखें भर आती हैं,’ हेमबहादुर भावुक होकर कहते हैं।

यह घटना चैत 28 को राष्ट्रीय अपंगता महासंघ नेपाल के 10वें महाधिवेशन और 23वें सामान्य सभा में हुई। बुटवल के दरबार लर्न पार्टी पैलेस में महासंघ से जुड़े 425 संघ-संस्थाओं के प्रतिनिधि मौजूद थे।

अपंगता महासंघ नेपाल के गण्डकी प्रदेश अध्यक्ष भी रहे हेमबहादुर नीति संबंधी चर्चा, अपंग व्यक्तियों के अधिकार और सहभागिता, संस्थागत सुधार और सक्षम नेतृत्व चयन के एजेंडा के साथ महाधिवेशन में पहुंचे थे। लेकिन वे संस्था के 23 वर्षों के इतिहास में सबसे अमानवीय व्यवहार के गवाह और पीड़ित बने।

हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में सुरक्षा कर्मियों को ह्वीलचेयर सहित हेमबहादुर को लछारपछार करते और उनकी ह्वीलचेयर टूटते हुए देखा जा सकता है। उस ह्वीलचेयर में बैठे व्यक्ति हेमबहादुर ही हैं।

महासंघ के महाधिवेशन में हेमबहादुर सहित अधिकांश अपंग व्यक्तियों ने नेतृत्व के अमानवीय व्यवहार और राज्य के आतंक का अनुभव किया। ‘बाउंसर’ का उपयोग कर ह्वीलचेयर उपयोगकर्ताओं को जबरदस्ती हटाया गया।

अन्धा महिला के साथ भी अमानवीय व्यवहार होने की जानकारी दी गई है। सुरक्षा कर्मी, स्वयंसेवक और पुलिस द्वारा भी अपंग व्यक्तियों के साथ अत्याचार हुआ।

महासंघ सदस्य दृष्टिहीन विरोध खतिवडा, सक्षम नेपाल संस्था के अध्यक्ष न्यून दृष्टि विरुकमल श्रेष्ठ, भोजराज श्रेष्ठ और विमला सदाशंकर आदि अपंग व्यक्तियों ने संस्थान में विधि-प्रक्रिया का उल्लंघन होने पर राज्य तंत्र का उपयोग कर आवाज दबाने का आरोप लगाया है।

बल प्रयोग से संस्था को गैरकानूनी तरीके से कब्जा करने की शिकायत के बावजूद उनका मुख्य ग़म राज्य की उपेक्षा पर है। पुलिस प्रशासन ने शिकायत दर्ज नहीं करना और दमन न होना दिखाया है, इसलिए वे मानवाधिकार आयोग जाने को तैयार हैं।

अपंगता महासंघ के महाधिवेशन में ऐसी स्थिति कैसे बनी, इस पर विस्तार से गण्डकी के अध्यक्ष भी रहे हेमबहादुर से संवाद किया गया है।

महासंघ के महाधिवेशन का उद्घाटन सत्र 27 तारीख को बुटवल के दरबार लर्न पार्टी पैलेस में हुआ। महाधिवेशन की मुख्य अतिथि गण्डकी प्रदेश सभा सांसद सुनिता थापा थीं। सभापतित्व महासंघ अध्यक्ष देवीदत्त आचार्य कर रहे थे।

‘महाधिवेशन कब और कहां होगा इसकी चर्चा कार्यसमिति में नहीं हुई, एकतरफा निर्णय होकर संचालन किया गया, इस कारण शुरू से ही प्रतिनिधि असंतुष्ट थे,’ हेमबहादुर ने बताया। ‘देवीदत्त पुनः अध्यक्ष बनने की इच्छा रखते थे।

उद्घाटन सत्र के बाद बंद सत्र शुरू हुआ। बंद सत्र में रिपोर्ट ऑडियो रिकॉर्डिंग से पढ़ी गई। महासचिव को रिपोर्ट प्रस्तुत करना एक माह पहले ही निलंबित कर दिया गया था। कोषाध्यक्ष, बहिरा अपंगता वाले कुमार रेग्मी ने आर्थिक रिपोर्ट ऑडियो में प्रस्तुत की, श्रेष्ठ ने बताया।

प्रतिनिधि विरोध खतिवडा ने विधिक प्रक्रिया का उल्लंघन होने पर महाधिवेशन को अवैध कहा। निर्वाचन अधिकारी के चयन की भी आपत्ति जताई, क्योंकि इसे कार्यसमिति को विकल्प रूप में करना चाहिए था, लेकिन उन्होंने स्वयं किया।

श्रेष्ठ ने फर्जी संघ-संस्था महासंघ में आवद्ध कर कागजात छिपाने का आरोप लगाकर सुधार की मांग की। नेतृत्व पर झूठे संस्थाओं से मतदान कर योजना बनाने का आरोप लगाया।

कई लोगों ने नेतृत्व का विरोध किया तो सुरक्षा कर्मी (बाउंसर), स्वयंसेवक बहिरा और पुलिस को बुलाया गया। सहभागी को बोलने नहीं दिया गया, माइक्रोफोन भी छीन लिया गया। सार्वजनिक वीडियो में बाउंसर के कपड़े पहने युवक और पुलिस के अमानवीय व्यवहार देखे जा सकते हैं।

ठेलमठेल और धक्का-मुक्की हुई। भोजराज, विरुकमल सहित कई को पुलिस ने हिरासत में लिया और शाम को हाजिरी लगाने के बाद छोड़ा। 28 तारीख को कार्यक्रम पूरी तरह ठप पड़ा और उनके विरोध की वजह से चुनाव प्रभावित हुआ।

23 तारीख की शाम 7 बजे चुनाव संयोजक शालिकराम बञ्जाडे और कर्मी ने इस्तीफा दिया। अगले दिन जोगबहादुर खत्री के नेतृत्व में नई चुनाव समिति बनाई गई। समिति की वैधता पर भी विवाद हुआ। पदाधिकारियों ने सभा में जवाब दिया।

‘पुरानी चुनाव समिति के इस्तीफा देने पर नई समिति बनी, यह सभा में चर्चा नहीं हुई और गलत है,’ हेमबहादुर ने कहा। ‘हमें कोई एजेंडा चर्चा करने नहीं दिया गया, इसलिए निर्वाचित समिति की कोई बात नहीं होगी।’

बञ्जाडे ने कहा, ‘अदालत में मामला है, कार्यसमिति विवादित होने पर इस्तीफा दिया था, बाद में दूसरी समिति बनाकर नेतृत्व चुना गया, यह हमें पता चला।’

प्रतिनिधि नेताओं का विरोध करते हुए धरने पर बैठे, सुरक्षा व्यवस्था कड़ी थी। कार्यक्रम हॉल में केवल अपंग मित्रवत शौचालय था। ह्वीलचेयर उपयोगकर्ताओं को सुरक्षित शौचालय का इस्तेमाल नहीं करने दिया गया।

‘हिड़डुल में मदद करने वाले लोग अंदर-बाहर कर रहे थे, हम दरवाजे पर पेशाब करने को तैयार थे, फिर भी नहीं जाने दिया। ऊपर से आदेश का हवाला दिया गया,’ हेमबहादुर ने कहा। ‘हमने अपंगता की संवेदनशीलता समझाने की कोशिश की लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। फिर बेरहमी से हमला हुआ।’

ह्वीलचेयर उपयोगकर्ताओं पर धक्का दिया गया, सुरक्षा कर्मियों ने ह्वीलचेयर पर बूट से हमला कर उसे तोड़ दिया।

वीडियो में देखा जा सकता है कि सुरक्षा गेट के पास सुरक्षा कर्मी ह्वीलचेयर उठाकर धकेल रहे हैं, रिसेप्शन के पास कुर्सी की ओर खींच रहे हैं और फिर दूसरी दिशा में समेट रहे हैं।

हेमबहादुर ने कहा, ‘मैं अमानवीय व्यवहार से अर्थोपचार अवस्था में पहुंच गया। कुछ सोच भी नहीं पाया। सांस लेने में दिक्कत हुई, थोड़ी देर वहीं धड़का। फिर सामान्य होने की कोशिश करते हुए ह्वीलचेयर मांगी लेकिन नहीं मिली। मुझे घिसटकर चढ़ना पड़ा।’

पार्टी पैलेस के कर्मचारियों के सहयोग से शौचालय पहुंचे तो सिर, शरीर और भुजाएँ दर्द करने लगीं।

‘मेरा अस्वाभाविक दर्द देखकर सुरक्षा कर्मियों में से एक बड़े व्यक्ति ने सीसी कैमरे के सामने ले जाने का आदेश दिया। लेकिन कैमरा पास में नहीं था। ह्वीलचेयर को धकेलकर हॉल के द्वार के नीचे ले गए, जहां कैमरा था,’ हेमबहादुर भावुक होकर बोले, ‘बहुत गर्मी थी, ऐसा लगा जैसे हॉल फिर बंद हो गया।’

महासंघ में देवीदत्त के नेतृत्व में नई कार्यसमिति चुनी गई। लेकिन बहुसंख्यक सदस्य बहिष्कार कर रहे हैं और बल प्रयोग कर सत्ता कब्जा करने का आरोप लगा रहे हैं। हिंसा और अमानवीय व्यवहार की शिकायत न लेकर नेतृत्व चुनाव जांच नहीं होगी, इस पर कई लोगों ने शक जताया है।

‘अगर राज्य में विधि, प्रक्रिया और न्याय है तो मामले की जांच हो। दोषियों को सख्त सजा मिलनी चाहिए। बल प्रयोग कर भंग की गई समिति को भंग कर तदर्थ समिति बनाकर निष्पक्ष चुनाव कराए जाएं,’ हेमबहादुर मांग करते हैं। ‘वैध चुनाव समिति भी कार्रवाई की भागीदारी लेगी।’

महाधिवेशन में नेतृत्व स्वेच्छाचारी होने से कई लोगों ने बहिष्कार किया। गण्डकी के 126 प्रतिनिधियों में से 84 ने बहिष्कार में हस्ताक्षर किए और 8 अनुपस्थित थे। हेमबहादुर के अनुसार 44 मत पड़े जो फर्जी हैं।

रूपन्देही के सहायक मुख्य जिल्ला अधिकारी मेघनाथ पाध्ये ने इस घटना में किसी ने शिकायत नहीं की प्रतिक्रिया दी। महासंघ काठमांडू में पंजीकृत है, वहां शिकायत करने और पुलिस को सबूत इकट्ठा करने को कहा।

‘हमें तो महाधिवेशन की अनुमति और शांति सुरक्षा की जानकारी दी गई थी। अन्याय हुआ तो कानूनी उपचार ले सकते हैं,’ पाध्ये ने कहा।

कानूनी परीक्षा होगी, फैसला अदालत का होगा: अध्यक्ष देवीदत्त

अपंगता महासंघ के पुनः अध्यक्ष निर्वाचित देवीदत्त आचार्य ने इस विवाद को केवल वर्तमान महाधिवेशन की समस्या नहीं माना। नवम महाधिवेशन नेपालगंज में समाप्त होने के 22 दिन में प्रशासन, भ्रष्टाचार निरोधक और अदालत में 193 से अधिक शिकायतें होने से विवाद बिगड़ा बताया।

उनके अनुसार असार में 10वें महाधिवेशन के लिए मंसिर 26 और 27 तारीख तय किया गया था लेकिन जेएनजी आंदोलन और जिला प्रशासन के कागजात नष्ट होने के कारण चैत 27 और 28 को चुनाव कराने की घोषणा की गई।

संस्थाओं का नवीनीकरण समय पर न करने के कारण कई छूट गए और शिकायतें शुरू हुईं। सदस्य संख्या 24 से बढ़कर 424 हुई। बाद में अध्यक्ष ने फर्जी संस्था में सदस्यता दिलाई, जिससे विवाद बढ़ा।

संस्था के सामान्य सभा में तोड़फोड़ और भीड़ के कारण सुरक्षा मुखर करवाई गई। ‘स्वयंसेवक और बाउंसर की व्यवस्था सुरक्षा के लिए की गई थी।’

30 से 40 लोग विरोध तो कर रहे थे मगर महाधिवेशन रोकना संभव नहीं था। प्रतिनिधि कार्ड लेकर गए और बहिष्कार से कोई फायदा नहीं होगा, ऐसा उन्होंने कहा।

‘अभी भी तीन रिट अदालत में चल रहे हैं। वे न्यायालय जाने की बात करते हैं। अब कानूनी तौर पर जांच होगी कि यह अवैध है या नहीं, यह अदालत तय करेगी।’

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