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प्रधानमन्त्री वालेन्द्र शाह की ‘राजनीति रोकने’ की योजना पर उपकुलपतियों की तैयारी

विभिन्न विश्वविद्यालयों और प्रतिष्ठानों से राजनीतिक दलों से जुड़े संगठनों की संरचना हटाने का ‘निर्णायक चरण’ अब शुरू होने वाला है। कुलपति के रूप में प्रधानमंत्री वालेन्द्र शाह ने सोमवार को उपकुलपतियों के साथ बैठक के बाद इसके लिए रास्ता खोल दिया है। बैठक में उन्होंने विश्वविद्यालयों और स्वास्थ्य शैक्षिक संस्थानों में मौजूद दलीय विद्यार्थी एवं कर्मचारी संगठनों की संरचनाएं तत्काल हटाने के निर्देश ‘किसी भी कीमत पर लागू करने’ का आदेश दिए।

विद्यार्थी संगठन सरकार की नियत पर संदेह व्यक्त करते हुए विरोध जताए हैं। कुछ ने तो प्रतिरोध की चेतावनी भी दी है। इस कारण विशेषकर शैक्षिक संस्थानों में झड़प की स्थिति पैदा होने की आशंका जताई जा रही है। बैठक में शामिल काठमाडौं विश्वविद्यालय के उपकुलपति अच्युत वाग्ले के अनुसार प्रधानमंत्री वालेन्द्र ने शैक्षिक संस्थानों में तालाबंदी नहीं होने का माहौल बनाए रखने पर जोर दिया है।

नियमावली में ‘कर्मचारियों के पेशेवर हितों और संस्थागत विकास के लिए केवल एक कर्मचारी यूनियन बन सकती है’ का उल्लेख है। उपकुलपति दिलीप सुब्बा के अनुसार आंतरिक चर्चाएं प्रारंभ हो चुकी हैं। उन्होंने कहा, “सरकार के प्रशासनिक सुधार योजना के अनुसार आगे बढ़ना आवश्यक है, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।”

सुदूरपश्चिम विश्वविद्यालय के उपकुलपति हेमराज पन्त के अनुसार उस विश्वविद्यालय में न तो किसी दल का संगठन है, न बोर्ड और न ही कार्यालय। उन्होंने कहा, “पांच-छह महीने से राजनीतिक दलों का कोई खास हस्तक्षेप नहीं दिखा है। फिलहाल सब सामान्य है।” काठमाडौं विश्वविद्यालय में छात्र कल्याण परिषद का चुनाव होता है। उपकुलपति के अनुसार कुलपति के पद पर प्रधानमंत्री ने सरकार परिवर्तन के साथ कोई मार्गदर्शन देने का संकेत नहीं दिया है।

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