
डेढ़ हजार वर्ष पुराने सामूहिक कब्रिस्तान ने जस्टिनियन प्लेग के रहस्य खोले
दक्षिण फ्लोरिडा विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने लगभग डेढ़ हजार वर्ष पहले ‘जस्टिनियन प्लेग’ महामारी के कारण सैकड़ों लोगों की मृत्यु से जुड़े एक सामूहिक कब्रिस्तान का पता लगाया है। जर्नल ऑफ आर्कियोलॉजिकल साइंसेज में प्रकाशित अध्ययन ने भूमध्यसागर क्षेत्र में पहली ब्यूबोनिक प्लेग महामारी की पुष्टि की है। इस शोध ने यह दिखाया है कि महामारी के कारण घुमंतू समुदाय एक स्थान पर इकट्ठा हुए थे और इसे एक सामाजिक घटना भी माना जा सकता है।
११ वैशाख, काठमाडौं। जॉर्डन के प्राचीन शहर जेरास में खोजे गए इस सामूहिक कब्रिस्तान ने पुष्टि की है कि किसी भी महामारी केवल रोग फैलाती नहीं, बल्कि यह समाज की संरचना और पतन को भी पुनःपरिभाषित करती है। दक्षिण फ्लोरिडा विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं के अनुसार, लगभग डेढ़ हजार वर्ष पहले ‘जस्टिनियन प्लेग’ महामारी ने एक साथ सैकड़ों लोगों की जान ले ली थी।
जर्नल ऑफ आर्कियोलॉजिकल साइंसेज में प्रकाशित इस अध्ययन ने भूमध्यसागर क्षेत्र में दर्ज की गई पहली ब्यूबोनिक प्लेग महामारी की पुष्टि की है। शोध टीम के प्रमुख रेज एच.वाई. जियांग के अनुसार यह कब्र सामान्य नहीं, बल्कि कुछ ही दिनों के अंदर सैकड़ों लोगों को एक ही स्थान पर दफनाए जाने की एक विशेष घटना है। यह अध्ययन महामारी के समय लोगों की जीवनशैली और संकट के दौरान शहर की स्थिति के मानवीय पहलू को उजागर करता है।
पुरातात्विक साक्ष्य और जेनेटिक परीक्षणों से पुष्टि हुई है कि यह प्लेग से जुड़ा इतिहास का पहला सामूहिक कब्रिस्तान है। यह अध्ययन एक रोचक तथ्य भी सामने लाया है कि सामान्य परिस्थितियों में अलग-अलग क्षेत्रों में बिखरे हुए घुमंतू समुदाय महामारी के दौरान एक स्थान पर एकत्रित हुए थे। इससे यह स्पष्ट होता है कि बसावट और लोगों की आवाजाही ने महामारी को शहर के विभिन्न कोनों तक फैलाया। दक्षिण फ्लोरिडा विश्वविद्यालय के नेतृत्व में ऑस्ट्रेलिया के सिडनी विश्वविद्यालय और फ्लोरिडा एटलांटिक विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों के साथ मिलकर किया गया यह शोध इस बात का निष्कर्ष निकालता है कि महामारी केवल जैविक घटना नहीं बल्कि एक सामाजिक घटना भी थी, जिसने समाज की कमज़ोरियों को उजागर किया। शोध दल ने चेतावनी दी है कि वर्तमान समय में घनी आबादी और बढ़ती यात्रा के कारण ऐसी महामारियों का जोखिम अभी भी बना हुआ है।