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प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह द्वारा एक महीने में किए गए प्रमुख कार्यों का सारांश

देश के कार्यकारी प्रमुख बने एक महीने बाद प्रधानमंत्री बालेन्द्र ‘बालेन’ शाह ने काठमांडू महानगर के मेयर रहते अपने कार्यकाल में निपटा न पाने वाली उपत्यका की नदियों के किनारे बसे सुकुम्बासी बस्तियों को हटाने का काम शुरू किया है। शनिवार को थापाथली और सिनामंगल क्षेत्र में भूमिहीन लोगों को हटाकर उनके घरों पर डोजर चलाया गया। यह अभियान रविवार को भी जारी रहने की जानकारी प्रधानमंत्री कार्यालय ने दी है। दशकों से संघीय और स्थानीय सरकारों द्वारा हल नहीं की जा सकी सुकुम्बासी समस्या के समाधान का वादा करते हुए बालेन सरकार द्वारा उठाए गए इस कदम ने मिश्रित प्रतिक्रिया प्राप्त की है।

काठमांडू महानगरपालिका के मेयर से इस्तीफा देकर प्रधानमंत्री बनने की घोषणा कर संसदीय चुनाव लड़ने वाले बालेन शाह की राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी ने फाल्गुन महीने में हुए चुनाव में लगभग दो-तिहाई बहुमत हासिल कर एकल बहुमत सरकार बनाई। चैत्र १३ से सरकार की अगुवाई संभालने के साथ ही शाह ने पारंपरिक शासन संरचनाओं में महत्वपूर्ण परिवर्तन लाने का प्रयास किया है, जैसा की नेपाल खुला विश्वविद्यालय के सह-प्राध्यापक हरीप्रसाद ढुंगाना ने बताया है। उन्होंने कहा, “सरकार कैसे संचालित होती थी और उसके कामकाज में कुछ नई परिवर्तन के प्रयास दिखते हैं। यह एक नए आत्मविश्वास के साथ आया है,”।

हालांकि, राष्ट्रीय जनमोर्चा के अध्यक्ष चित्रबहादुर केसी, जो कुछ समय उपप्रधानमंत्री भी रह चुके हैं, ने नई सरकार को प्रजातांत्रिक चरित्र से वंचित बताते हुए कहा है, “जनता की आवाज उठाने वाले छात्र संगठनों पर प्रतिबंध लगाना यह दर्शाता है कि इस सरकार ने लोकतांत्रिक तत्वों की कोई परवाह नहीं की है।”

सरकार के कुछ कदम अभी सफल नहीं हो पाए हैं, और बालेन की अगुवाई वाली सरकार हर क्षेत्र में पूर्ण सफलता प्राप्त नहीं कर पाई है। प्रधानमंत्री द्वारा नियुक्त दो मंत्रियों के लेकर उठे सवालों के बाद उन्हें मंत्रिपरिषद से हटाना पड़ा। अपनी ही पत्नी द्वारा लिए गए विवादित नियुक्ति के कारण दीपक कुमार साह को मंत्री बनने के दो सप्ताह के भीतर पद छोड़ना पड़ा। इसके अलावा, संपत्ति विवरण खुलासे के बाद विवादित व्यवसायी के साथ साझेदारी पाए जाने पर गृहमंत्री सुधन गुरुङ ने 27वें दिन में इस्तीफा दे दिया।

नई सरकार ने संपत्ति शोधन के मामले में पूर्व प्रधानमंत्री शेरबहादुर देउवा और पूर्व विदेश मंत्री आरजू राणा के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। ये दोनों हांगकांग में हैं और अभी तक देश लौटे नहीं हैं। राजनीतिक हस्तियों के अलावा वित्तीय अपराध और संपत्ति शोधन में कई व्यापारी भी गिरफ्तार किए गए हैं।

प्रधानमंत्री शाह ने 100 दिनों की योजना के तहत कई नीतिगत सुधारों की घोषणा कर चुके हैं। सरकार द्वारा विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में छात्र संगठन समाप्त करने के साथ-साथ कर्मचारी ट्रेड यूनियन के समाप्ति के फैसलों को लेकर विरोध और समर्थन दोनों प्रतिक्रियाएँ सामने आई हैं। पूर्व उपप्रधानमंत्री केसी ने कहा, “यह सरकार प्रगति के लिए नहीं है यह साफ दिखता है। डोजर चलाकर सुकुम्बासी को हटाने का दृश्य इसका प्रमाण है।”

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