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प्राचीन कीटों के विशाल आकार का रहस्य अभी भी अनसुलझा

नए शोध से पता चला है कि ऑक्सीजन की उपलब्धता कीटों के विशाल आकार को निर्धारित करने वाला मुख्य कारक नहीं है। कीटों की उड़ने वाली मांसपेशियों में ऑक्सीजन पहुंचाने वाली नलिकाएं कुल मांसपेशी का केवल १ प्रतिशत हिस्सा ही घेरती हैं। ऑक्सीजन की भूमिका कम होने के बाद वैज्ञानिक प्राचीन कीटों के विशाल आकार के रहस्य को समझने के लिए अन्य संभावनाओं पर ध्यान केंद्रित करने लगे हैं। १३ वैशाख, काठमाडौं।

लगभग ३० करोड़ वर्ष पहले पृथ्वी पर आज की तुलना में कहीं अधिक विशाल कीट पाए जाते थे। उस समय ‘ड्रैगनफ्लाई’ जैसे कीटों के पंख २७ इंच तक फैलते थे। दशकीय युगों तक वैज्ञानिकों का मानना था कि उस युग के वातावरण में ऑक्सीजन की मात्रा वर्तमान से ४५ प्रतिशत अधिक होने के कारण ये कीट इतने विशाल हो सके। लेकिन हाल ही में ‘नेचर’ पत्रिका में प्रकाशित एक नए अध्ययन ने इस विश्वास को चुनौती दी है।

ऑक्सीजन और श्वसन प्रणाली के नए विश्लेषण से पता चला है कि कीटों की श्वसन प्रणाली हमारे फेफड़ों जैसी नहीं होती, बल्कि उनके शरीर में फैली सूक्ष्म नलिकाओं (ट्रैकीअल सिस्टम) के माध्यम से ऑक्सीजन पहुंचती है। प्रिटोरिया विश्वविद्यालय के सहप्राध्यापक एडवर्ड स्नेलिंग के नेतृत्व में किए गए शोध में यह पाया गया कि कीटों की उड़ने वाली मांसपेशियों में ऑक्सीजन पहुंचाने वाली नलिकाएँ कुल मांसपेशी का केवल १ प्रतिशत या उससे भी कम हिस्सा घेरती हैं।

यह प्रमाणित करता है कि ऑक्सीजन की उपलब्धता कीटों के आकार को निर्धारित करने वाला मुख्य कारण नहीं है। विशाल आकार का रहस्य अभी भी अनसुलझा है। ऑक्सीजन की भूमिका कम होने के बाद वैज्ञानिक अन्य संभावनाओं की ओर देख रहे हैं। कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि नव उद्भूत शिकारी जीवों या कीटों की बाह्य कंकाल की भौतिक सीमाओं के कारण उनका आकार कम हुआ होगा। उनके ‘दानव’ आकार का वास्तविक रहस्य खोजने के लिए अभी और शोध आवश्यक है। (स्रोत: साइंस डेली)

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