WordPress database error: [Disk got full writing 'information_schema.(temporary)' (Errcode: 28 "No space left on device")]
SHOW FULL COLUMNS FROM `nw_options`

WordPress database error: [Disk got full writing 'information_schema.(temporary)' (Errcode: 28 "No space left on device")]
SHOW FULL COLUMNS FROM `nw_options`

WordPress database error: [Disk got full writing 'information_schema.(temporary)' (Errcode: 28 "No space left on device")]
SHOW FULL COLUMNS FROM `nw_options`

वर्डप्रेस डाटाबेस त्रुटि: [Disk got full writing 'information_schema.(temporary)' (Errcode: 28 "No space left on device")]
SHOW FULL COLUMNS FROM `nw_options`

वर्डप्रेस डाटाबेस त्रुटि: [Disk got full writing 'information_schema.(temporary)' (Errcode: 28 "No space left on device")]
SHOW FULL COLUMNS FROM `nw_options`

बालेन्द्र सरकार से प्रवासी नेपालीहरू की उम्मीदें – Space4k Television News Update
Skip to main content

बालेन्द्र सरकार से प्रवासी नेपालीहरू की उम्मीदें

समाचार सारांश भदौ २३ और २४ को जेनजी आंदोलन ने नेपाली राजनीति के पारंपरिक रुझानों को बदला और रास्वपा को एकल सरकार बनाने में मदद दी। रास्वपा के वरिष्ठ नेता बालेन्द्र शाह ३६ वर्ष की उम्र में प्रधानमंत्री बने हैं, और टाइम्स मैगजीन ने उन्हें विश्व के १०० प्रभावशाली व्यक्तियों की सूची में शामिल किया है। बालेन्द्र सरकार ने प्रशासनिक पुनर्गठन, डिजिटल शासन, पारदर्शिता, भ्रष्टाचार नियंत्रण और तेज सेवा प्रदान करने के लिए १०० बिंदुओं वाली सुधार योजना जारी की है। विक्रम संवत २०८२ अर्थात् सन् २०२५–२६ में नेपाली राजनीति ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक ध्यान आकर्षित किया।

२३ और २४ भदौ को हुए जेनजी आंदोलन ने न केवल नेपाल की पारंपरिक राजनीतिक रुझान बदल दी, बल्कि पुराने राजनीतिक दलों को भी कमजोर किया। छह माह बाद हुए चुनाव परिणाम उन दलों के लिए अप्रत्याशित और अकल्पनीय रहे। तीन दशकों से तीन दलों के शीर्ष नेताओं के बीच सीमित सत्ता की प्रतिस्पर्धा पर अब कम से कम पाँच वर्षों का विराम लग गया है। रास्वपा के वरिष्ठ नेता बालेन्द्र शाह शक्तिशाली सरकार के साथ प्रधानमंत्री बने हैं। वर्तमान में रास्वपा की एकल सरकार ऐतिहासिक जनसम्मति प्राप्त कर तीन सप्ताह से कार्यरत है। सरकार ने सेवाओं को चुस्त, सहज और सरल बनाने के लिए विभिन्न पहलें शुरू की हैं। जनता की अपेक्षाओं को पूरा करने वाले शुरुआती कदमों का कार्यान्वयन भविष्य में स्पष्ट होगा, लेकिन वर्तमान में सरकार के काम को सकारात्मक नजरिए से देखना चाहिए।

बालेन्द्र की विश्वव्यापी चर्चा

३६ वर्षीय प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह को विश्व के १०० प्रभावशाली व्यक्तियों की सूची में शामिल किया जाना उनकी वैश्विक प्रशंसा का प्रमाण है। प्रतिष्ठित टाइम्स मैगजीन ने उन्हें २०२६ के विश्व के १०० प्रभावशाली व्यक्तियों की सूची में शामिल किया। प्रजातंत्र स्थापना के बाद नेपाल के सबसे युवा जननिर्वाचित प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह अब बड़ी जनसंख्या की उम्मीद का केंद्र बन चुके हैं। वे चार वर्ष पूर्व काठमाडौं के मेयर पद पर स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में राजनीति में आए थे और कम समय में राजनीतिक क्षेत्र में बड़ा बदलाव लाए। मेयर के रूप में व्यापक जनसमर्थन मिलने के कारण वे प्रधानमंत्री पद के लिए भी समान समर्थन प्राप्त कर सके, जो उनकी लोकप्रियता को प्रमाणित करता है।

प्रधानमंत्री पद पर बड़ी जनता के विश्वास के साथ आना बालेन्द्र के लिए चुनौतियां लेकर आया है। काठमाडौं के कचरा प्रबंधन में विदेशी हितों के कारण काम में अड़चनें आने को उन्होंने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है। अब देश के प्रधानमंत्री होते हुए ये हित और व्यापक होंगे, जिसकी जांच बालेन्द्र की जनविश्वास में न्याय करने की क्षमता से होगी।

सरकार की प्राथमिकताएं और १०० बिंदुओं वाली सुधार योजना

यह सरकार प्रशासनिक पुनर्गठन, डिजिटल शासन, पारदर्शिता, भ्रष्टाचार नियंत्रण, सुशासन और तेज सेवा प्रदान करने को प्राथमिकता दे रही है। सरकार गठन के साथ ही बालेन्द्र सरकार ने पहली मन्त्रिपरिषद बैठक में पारित कर शासकीय सुधार की १०० बिंदुओं वाली कार्ययोजना जारी की है। ज्यादातर बिंदुओं के लिए कार्यान्वयन की समयसीमा निर्धारित की गई है। लंबे समय से जनता परिवर्तनों को अनुभव नहीं कर पाई थी, इसलिए यह कार्ययोजना महत्वपूर्ण मानी जा रही है। पिछली सरकारों को सेवा प्रदायगी में कर्मचारी तंत्र से पर्याप्त सहयोग नहीं मिलने के आरोप लगते रहे। जेनजी आंदोलन के बाद सुशीला कार्की नेतृत्व वाली सरकार ने भी कर्मचारी तंत्र से प्रत्यक्ष रूप से सहयोग न मिलने की परेशानी बताई थी। मंत्री एवं प्रधानमंत्री दोनों ने कर्मचारी तंत्र में सुधार की आवश्यकता जताई है। ऐसे में बालेन्द्र सरकार को कर्मचारी तंत्र से किस प्रकार का सहयोग मिलेगा, यह महत्वपूर्ण है।

१०० बिंदुओं वाली योजना आम नागरिकों की उम्मीदों को पूरा करने के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय को सशक्त बनाने का प्रयास करती है। सरकार की कार्यक्षमता बढ़ाने हेतु विभिन्न संयंत्र बनाए गए हैं, जो आवश्यक भी हैं। कर्मचारी तंत्र की पारंपरिक कार्यशैली में सुधार आवश्यक है, जिसमें प्रक्रिया आधारित सेवा के बजाय परिणाम आधारित सेवा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। सरकार ने इसे डिजिटल बनाने पर विशेष ध्यान दिया है। इस सुधार योजना से कर्मचारी तंत्र पर दबाव भी बढ़ा है।

प्रधानमंत्री पद ग्रहण से पूर्व बालेन्द्र ने प्रधानमंत्री कार्यालय के माध्यम से सभी मंत्रालयों से तत्काल सुधारों की महत्वपूर्ण कार्यसूची मांगी थी, जिसमें काम की समयसीमाएं भी शामिल थीं। इसी के आधार पर पहली मन्त्रिपरिषद बैठक में १०० बिंदुओं वाली सुधार कार्ययोजना लाई गई। अतीत में व्यवस्थाओं में दोष दिखाकर बार-बार होने वाले आंदोलनों ने देश और जनता की स्थिति में कोई गहरा अंतर नहीं डाला, जो अब समाप्त होना चाहिए। मंत्रियों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने विभागीय कार्यों को समय पर पूरा करें और प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करें।

प्रवास नेपालीों की अपेक्षाएं और भूमिका

प्रवास नेपाली भावनाएं विश्व के कई देशों में फैली हैं और उनकी संख्या भी बढ़ रही है। देश में राजनीतिक अस्थिरता, बेरोज़गारी, द्वंद्व, अनिश्चित भविष्य और अन्य कारणों से लोग देश छोड़ रहे हैं। हाल ही में देश के भीतर भी अधिक अवसर और सुरक्षित भविष्य के लिए लोग विदेश जा रहे हैं। अनधिकृत आंकड़ों के अनुसार ६० लाख से अधिक नेपाली विदेशों में हैं, जो भारत को छोड़कर हैं। जहां भी वे हैं, उनका नेपाल प्रेम और जिम्मेदारी कम नहीं हुई है। वे चाहते हैं कि अपनी कर्मभूमि नेपाल में आर्थिक विकास, सेवा वितरण और डिजिटल सेवाएँ उपलब्ध हों।

इसी कारण से वर्तमान राजनीतिक परिवर्तन और चुनावी परिणाम में विदेशों में बसे नेपालीों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह नेतृत्व वाली सरकार ने संसद में छह राष्ट्रीय प्रमुख पार्टियों के घोषणापत्र, वचनपत्र और प्रतिबद्धताओं का अध्ययन कर १८ बिंदुओं वाली ‘राष्ट्रीय प्रतिबद्धता’ का मसौदा सार्वजनिक किया है। इस मसौदे में विदेशों में रहने वाले नेपालीों को भी संबोधित किया गया है, जो स्वागत योग्य है।

विदेशों में रहने वाले नेपालीों की पूंजी, अनुभव और श्रम को देश के विकास में लगाने हेतु वार्षिक एक खरब रुपये के ‘डायस्पोरा बांड’ योजना भी शामिल है। इसके साथ ही विदेशों में रहने वाले नेपालीों को मतदान का अधिकार सुनिश्चित करना और उन्हें ‘सर्वोच्च जैविक निवेशक’ का दर्जा देना भी इस प्रतिबद्धता में है। सरकार ने ‘एक बार नेपाली, हमेशा नेपाली’ की धारणा कायम रखने का संकल्प लिया है। दोहरे कर के अन्याय को समाप्त कर निवेश को सुविधाजनक बनाने के लिए फास्ट ट्रैक नीति भी बनाई जाएगी, जो प्रवासियों को निवेश हेतु प्रोत्साहित करेगी। हालांकि ये योजनाएं मात्र कागज पर सीमित रहेंगी या व्यवहार में लागू होंगी, यह आने वाला समय बताएगा।

साथ ही बालेन्द्र सरकार को कर्मचारी तंत्र से मिलने वाले सहयोग का पक्ष भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि कर्मचारी तंत्र की कार्यशैली और सक्रियता सरकार की सफलताका निर्धारण करेगी। भदौ २३ और २४ के जेनजी आंदोलन से मिले जनादेश अनुसार बनी सरकार को देश और विदेश में बसे नेपालीों के विश्वास को कमजोर नहीं पड़ने देना चाहिए। पिछले गठबंधन सरकारों की तरह इस बार जनता ने प्रायः दो-तिहाई बहुमत से रास्वपा को समर्थन दिया है।

देश का बड़ा हिस्सा अपने नेतृत्वकर्ता माने बालेन्द्र शाह वर्तमान के शक्तिशाली प्रधानमंत्री हैं। वे चाहे तो आवश्यक कानूनी, प्रशासनिक, संरचनागत और कार्यशैलीगत सुधार शीघ्र कर सकते हैं। जनता ने रास्वपा और इस सरकार पर विश्वास जताया है। अतीत में व्यवस्था के दोष दिखाकर होने वाला आंदोलन और देश-जनता की स्थिति में कोई मूलभूत परिवर्तन न आने वाली परिस्थितियां अब खत्म होनी चाहिए। आशा है कि जनता का विश्वास और मजबूत होगा और सभी की सहभागिता से नेपाल समृद्ध की ओर बढ़ेगा।

जवाफ लेख्नुहोस्

तपाईँको इमेल ठेगाना प्रकाशित गरिने छैन। अनिवार्य फिल्डहरूमा * चिन्ह लगाइएको छ