
पहली सट्टेबाजी के कारोबार के बाद कागजी नोट दिखाकर ठगी
१४ वैशाख, काठमाडौं। काठमाण्डौ उपत्यका अपराध अनुसन्धान कार्यालय ने ठगी के आरोप में ६ लोगों को गिरफ्तार करके जांच शुरू की है। गिरफ्तार व्यक्तियों से पूछताछ में ऐसा तथ्य सामने आया है जिसने जांच अधिकारियों को भी हैरान कर दिया है। ठगी से पहले ही उन्होंने स्पष्ट रूप से ठगी करने की बात स्वीकार कर दी थी। ‘सच्चे नोट के साथ नकली नोट भी बदले जाएंगे।’ अर्थात सच्चा नोट देकर उसके दोगुने नकली नोट वापस लेने होंगे। इस तरह पहले सच्चा नोट लेकर नकली नोट देने का काम सामान्य और भरोसेमंद लगता था। शुरू में विश्वास करना मुश्किल हो सकता था, लेकिन जांच से पता चलता है कि ठगी खुलकर हो रही है।
ठगी के आरोप में गिरफ्तार लोगों में उदयपुर के ताप्ली गाउँपालिका–३ के रहने वाले २६ वर्षीय योगबहादुर तामाङ, वहीं के ३८ वर्षीय मिलन कुमार तामाङ, ३६ वर्षीय भविंद्र कुमार तामाङ, चितवन के रत्ननगर गाउँपालिका–५ के ३४ वर्षीय प्रविन महतो, रौतहट के गजुरा नगरपालिका–१ के २८ वर्षीय मुना धामी और चितवन के कालिका नगरपालिका–५ के ३८ वर्षीय सत्यनारायण चौधरी शामिल हैं। पुलिस ने बताया कि इन्हें टौदह के नजदीक से गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तारी के समय उनके कब्जे से दो प्रकार के थैलों में ४० बंडल नकली नोट (कागजी बिटो), पीछे की नंबर प्लेट हटाया हुआ और सामने शैक्षिक भ्रमण का बैनर लगा नंबर प्लेट से छिपाया हुआ एक EV वाहन (मिनी हाइस) और नं. ना ४७ प ५४११ की पल्सर मोटरसाइकिल बरामद हुई है। बरामद EV वाहन की नंबर बा. प्र. ०१–०३२ च ७३१२ होने की पुष्टि हुई है।
ठगी का तरीका कैसा था? इस समूह ने बताया कि सच्चा नोट देने के बदले दोगुनी मात्रा में नकली नोट दिए जाते थे, जिसकी जानकारी बाद में मिलने या व्हाट्सएप पर दी जाती थी। आमतौर पर कोई नकली नोट के बदले सच्चा नोट लेने के लिए तैयार नहीं होता इसलिए वे कहते थे, ‘यह नकली कहलाए भी, लेकिन असल में सच्चा ही है। इसमें कोई फर्क नहीं पड़ता, कोई पकड़ नहीं पाएगा और कारोबार में कोई दिक्कत नहीं होगी।’ जो लोग इस बात पर भरोसा नहीं करते थे, उनके लिए वे नकली बताए गए हजार के नोट का बिल दिखाते थे जो देखकर सच जैसा लगता था। इस तरह ठगी का समूह लाखों रुपये का कारोबार करके ग्राहक का विश्वास जीत लेता था। ऑनलाइन वीडियो के माध्यम से हजार के बंडल के नोट के बिल दिखाकर अलग विश्वास दिलाया जाता था। लेकिन बाहर से सच्चा नोट रखा जाता और अंदर कागजी बिटो छिपाई जाती थी। एसएसपी संतोष खड़का के अनुसार, “शुरू में विश्वास जीतने के लिए पहले नकली नोट बताते हुए दोगुने सच्चे नोट देने का तरीका अपनाते थे, बाद में बड़ी रकम के लेन-देन के समय कागजी बिटो थमाने की प्रवृत्ति दिखती है।” अब तक दो पीड़ित आरोपियों के खिलाफ संपर्क में आए हैं जबकि अन्य पीड़ितों को पुलिस से संपर्क करने की अपील की गई है।