
संयुक्त अरब अमीरात का ओपेक और ओपेक प्लस से बाहर निकलने का निर्णय
संयुक्त अरब अमीरात ने पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात करने वाले देशों के संगठन ओपेक और ओपेक प्लस से बाहर निकलने की घोषणा की है। इस निर्णय से ओपेक अपनी उत्पादन क्षमता का लगभग १५ प्रतिशत हिस्सा खो सकता है और यह सऊदी अरब पर बड़ा प्रभाव डाल सकता है। विश्व बैंक ने मध्य पूर्व के युद्ध के कारण तेल की आपूर्ति में कमी आने और ऊर्जा की कीमतों में लगभग एक चौथाई तक बढ़ोतरी होने की चेतावनी दी है।
यूएई की सरकारी समाचार एजेंसी द्वारा जारी बयान में कहा गया है, ‘‘यह निर्णय यूएई की ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ी दीर्घकालीन रणनीति और आर्थिक दृष्टिकोण को दर्शाता है।’’ यूएई के ऊर्जा मंत्री सुहैल मोहम्मद अल माजरुई ने बताया कि यह निर्णय क्षेत्रीय ऊर्जा रणनीतियों के गहन मूल्यांकन के बाद लिया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि इस विषय में उन्होंने अन्य देशों से कोई चर्चा नहीं की है।
यूएई सन् १९६७ में ओपेक का सदस्य बना था। यूएई के बाहर निकलने के बाद सदस्य देशों की संख्या ११ रह जाएगी। विश्लेषकों का मानना है कि यूएई का यह कदम ओपेक के ‘‘अंत की शुरुआत’’ की ओर संकेत कर सकता है। ऊर्जा अनुसंधान प्रमुख शाउल कावोनिक के अनुसार, ‘‘यूएई के बाहर निकलने से ओपेक अपनी उत्पादन क्षमता का लगभग १५ प्रतिशत हिस्सा खो देगा।’’
अर्थशास्त्री मोनिका मलिक के अनुसार, युद्ध के बाद स्थिति सामान्य होने पर यूएई विश्व बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ा सकता है। इससे उपभोक्ताओं और वैश्विक अर्थव्यवस्था को कुछ राहत मिलने की संभावना है। विश्व बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री इंदरमित गिल के अनुसार, इस निर्णय का सबसे बड़ा प्रभाव गरीब आबादी पर पड़ेगा, जो अपनी आय का बड़ा हिस्सा खाद्य और ईंधन पर खर्च करती है।