
वन प्राविधिकों ने मंत्री और सचिव से प्रशासन सुधार की मांग की
१६ बैशाख, बुटवल। वन प्रशासन को सुशासनपूर्ण, प्रभावकारी और परिणाममुखी बनाने के लिए प्रदेश सरकार अनिच्छुक दिख रही है, इस पर वन प्राविधिकों ने असंतोष व्यक्त किया है। नेपाल वन प्राविधिक संघ लुम्बिनी द्वारा आयोजित कार्यक्रम में वन तथा वातावरण मंत्री देवकरण कलवार के साथ प्रदेश के १२ जिलों के वन प्राविधिकों ने नीतिगत देरी और सरकार की उदासीनता के प्रति खुलकर विरोध जताया।
संघ के अध्यक्ष केशव खड्काले कार्यक्रम में कहा कि वन क्षेत्र सुधार के लिए आवश्यक कई नीतिगत और कानूनी विषय प्रदेश सरकार के पास ही अटके हुए हैं। उन्होंने कहा कि काठ–दाउरा लिलाम बिक्री में ई–टेंडर प्रावधान सहित की गई कार्यविधि पर रोक लगी है, खड़ा वृक्ष लिलाम संबंधी कानून आगे नहीं बढ़ाया गया है और निजी वन में पाए जाने वाले साल प्रजाति की कटाई जैसे मुद्दों पर सरकार गंभीर नहीं है। ‘वन प्रशासन सुधार एवं सुशासन के लिए प्राविधिक क्षेत्र में सक्रिय हैं, लेकिन सरकार की ओर से अपेक्षित तत्परता नहीं दिखाई दे रही,’ अध्यक्ष खड्काले कहा।
बर्दिया के वन कार्यालय प्रमुख विजय सुबेदी ने वन प्रबंधन को और प्रभावकारी बनाने के लिए ऑनलाइन टेंडर, खड़ा वृक्ष लिलाम और प्रबंधन सुधार से जुड़े नीतिगत निर्णयों में देरी के कारण कार्यक्षमता प्रभावित होने की बात कही। वन महानिदेशक ईश्वरी पौडेल ने वन प्रशासन सुधार के प्रयास जारी हैं और इसके लिए आवश्यक कानूनी व्यवस्थाएं समय पर पूरी होनी चाहिए, इस बात पर ज़ोर दिया।
वन सचिव प्रमोद भट्टराई ने स्वीकार किया कि कुछ विषय अंतर मंत्रालय समन्वय में अटके रहते हैं और उनके गंभीरता को समझने में कमी के चलते निर्णय प्रक्रिया प्रभावित होती है। उन्होंने कहा कि ऐसे विषयों को शीघ्र निष्कर्ष तक पहुंचाने के प्रयास किए जाएंगे। वन मंत्री देवकरण कलवार ने कहा कि मंत्रालय द्वारा प्रस्तुत कानूनों का रुक जाना असामान्य है और वन क्षेत्र सुधार को प्राथमिकता देते हुए आगे बढ़ाया जाएगा।