
अमेरिका के तकनीकी व्यापार में नया प्रस्ताव चीन में हलचल का कारण बना
१८ वैशाख, काठमाडौं । अमेरिका के नियामक संस्था ने तकनीकी व्यापार से जुड़ा एक नया प्रस्ताव सामने लाए जाने पर चीन ने कड़ी आपत्ति जताई है। खासतौर पर चीनी प्रयोगशालाओं को अमेरिकी बाजार के लिए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच करने से रोकने की योजना के कारण द्विपक्षीय व्यापारिक संबंधों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने की आशंका जताते हुए बीजिंग ने प्रतिकार का चेतावनी जारी की है। अमेरिकी फेडरल कम्युनिकेशन कमीशन (एफसीसी) ने गुरुवार को जो प्रस्ताव रखा है, उसके मंजूर होने पर स्मार्टफोन से लेकर कैमरों तक के उपकरण प्रभावित होंगे।
एफसीसी के आंकड़ों के अनुसार वर्तमान में अमेरिका में उपयोग किए जाने वाले लगभग ७५ प्रतिशत प्रमाणित उपकरणों की जांच चीन स्थित मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं में होती है, जिससे इस प्रस्ताव का व्यापक प्रभाव देखने को मिलेगा। चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि ऐसा कदम “अंतरराष्ट्रीय आर्थिक और व्यापार प्रणाली को गंभीर रूप से कमजोर करेगा।” मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यदि अमेरिका अपने निर्णय पर अडिग रहता है, तो चीन अपने उद्यमों के वैध अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कार्रवाई करेगा।
चीन ने एफसीसी पर बार-बार चीनी कंपनियों और उत्पादों को लक्षित करने वाले प्रतिबंधात्मक कदम उठाने का आरोप लगाया है। मंत्रालय का दावा है कि ये कदम दोनों देशों के बीच मेहनत से स्थापित व्यापारिक स्थिरता को खतरे में डालते हैं और उच्च स्तरीय समझौतों के विपरीत हैं। एफसीसी ने कहा है कि इसका प्रस्ताव “राष्ट्रीय सुरक्षा प्राथमिकताओं को ध्यान में रखकर” बनाया गया है। इससे पहले भी विदेशी स्वामित्व या नियंत्रण वाली परीक्षण प्रयोगशालाओं को सीमित करने वाले नियम लागू किए जा चुके हैं।
नया प्रस्ताव अमेरिका को उन देशों में स्थित प्रयोगशालाओं की मान्यता रद्द करने का लक्ष्य देता है जिनके साथ समान व्यापार समझौते नहीं हैं। एफसीसी के अनुसार चीन के साथ ऐसा कोई समझौता नहीं है। यदि प्रस्ताव पारित हो जाता है, तो चीनी प्रयोगशालाओं में परीक्षण और प्रमाणीकरण कराए गए उपकरणों को दो साल के भीतर अमेरिकी बाजार से हटाया जाएगा। इससे तकनीकी आपूर्ति श्रृंखला, अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रथाओं और अमेरिका-चीन संबंधों में नए तनाव के संकेत मिलते हैं। विश्लेषकों के अनुसार यह केवल व्यापार संघर्ष नहीं, बल्कि रणनीतिक प्रतिस्पर्धा का भी एक नया चरण है।