
सरकार ने अध्यादेश के जरिए १५०० से अधिक राजनीतिक नियुक्तियां रद्द कीं
सरकार ने अध्यादेश के तहत लगभग साढे १५०० राजनीतिक नियुक्तियों को एक साथ हटा दिया है। इस अध्यादेश के तहत विभिन्न विश्वविद्यालयों, नियामक निकायों और आयोगों के पदाधिकारियों की नियुक्तियां समाप्त कर दी गई हैं। सरकार ने अब प्रतिस्पर्धात्मक आधार पर दक्ष एवं योग्य नए पदाधिकारियों की नियुक्ति करने की चुनौती स्वीकार की है। २० वैशाख, काठमांडू।
तत्कालीन प्रधानमंत्री सुशीला कार्की की प्रमुख निजी सचिव की पसंद न होती, तो आदर्शकुमार श्रेष्ठ राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण कोष के अध्यक्ष पद पर नियुक्त नहीं हो पाते और उन्हें डेढ़ महीने के भीतर हटाया जाता। जीव-जंतु, प्रकृति और पर्यावरण क्षेत्र में अनुभवहीन श्रेष्ठ को तत्कालीन प्रधानमंत्री कार्की ने मंत्री स्तर के कोष के अध्यक्ष पद पर पांच वर्षों के लिए नियुक्त किया था। किन्तु पद से हटाए जाने में डेढ़ महीने भी नहीं लगे और उनकी बर्खास्तगी पर किसी ने सहानुभूति नहीं दिखाई।
सरोजकुमार शर्मा भी ऐसी ही स्थिति में हैं, जिन्हें प्रमुख निजी सचिव की पसंद और दबाव में समाज कल्याण परिषद में सदस्य सचिव नियुक्त किया गया था। शनिवार को जारी अध्यादेश के बाद सदस्य सचिव शर्मा भी पदमुक्त हो गए हैं। राष्ट्रीय सूचना आयोग, जो नागरिकों के सूचना अधिकार के क्रियान्वयन में सहायता प्रदान करता है, राजनीतिक भागीदारी का शिकार बना है। सरकार ने ११० कानूनों में संशोधन कर लगभग साढे १५०० से अधिक नियुक्तियों को एक साथ रद्द कर दिया है।
वरिष्ठ अधिवक्ता हरि उप्रेती का कहना है, ‘यदि प्रक्रिया पूरी किए बिना पदमुक्त किया गया होता तो सवाल उठता, लेकिन अध्यादेश के माध्यम से विदाई की गई लगती है। अध्यादेश कानून के समान कार्य करता है इसलिए प्रक्रिया पर ज्यादा सवाल खड़े नहीं होंगे, लेकिन इसकी संवैधानिकता की जांच आवश्यक है।’ अब आगे की नियुक्ति प्रक्रिया कैसी होगी, इस पर ध्यान दिया जा रहा है।