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ऑपरेशन से पहले ‘इम्यूनोथेरेपी’ ने कोलन कैंसर मरीजों को 3 वर्षों तक कैंसर मुक्त रखा सफल

यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन के शोधकर्ताओं ने आंत्र कैंसर में ऑपरेशन से पहले 9 हफ्तों तक इम्यूनोथेरेपी के जरिए तीन साल तक कैंसर से मुक्त रहने में सफलता प्राप्त की है। 59 प्रतिशत मरीजों में ऑपरेशन के समय कैंसर के कोई अवशेष नहीं पाए गए और 33 महीने बाद भी कैंसर पुनः विकसित नहीं हुआ। डॉ. काई-किन सियू ने पेम्ब्रोलीजुमाब को सुरक्षित और प्रभावशाली उपचार बताया है। 23 वैशाख, काठमांडू।

आंत्र कैंसर के उपचार में एक अत्यंत उत्साहजनक सफलता मिली है। यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन के नेतृत्व में किए गए क्लिनिकल परीक्षण में ऑपरेशन से पहले सीमित अवधि की ‘इम्यूनोथेरेपी’ ने मरीजों को लगभग तीन वर्षों तक कैंसरमुक्त रखने में सफलता दिखाई। इस सफलता ने पारंपरिक उपचार विधि, जिसमें पहले ऑपरेशन और उसके बाद महीनों तक कीमोथेरेपी की जाती है, को एक बड़ा चुनौती दी है। ‘नियोप्रिज्म-CRC’ नामक इस अध्ययन में दूसरे और तीसरे चरण के आंत्र कैंसर वाले मरीज शामिल थे।

भागीदारों को ऑपरेशन से पहले 9 हफ्तों तक ‘पेम्ब्रोलीजुमाब’ नामक इम्यूनोथेरेपी दवा दी गई थी। प्रारंभिक परिणामों में 59 प्रतिशत मरीजों के ऑपरेशन के दौरान कैंसर के कोई अवशेष नहीं मिले और 33 महीने बाद फॉलोअप में कैंसर की पुनरावृत्ति नहीं हुई। यह परिणाम सामान्य उपचार विधि की तुलना में अत्यंत प्रभावशाली पाया गया। सामान्यतः पहले ऑपरेशन और बाद में कीमोथेरेपी प्राप्त करने वाले लगभग 25 प्रतिशत मरीजों में तीन वर्षों के भीतर कैंसर वापस आ सकता था। लेकिन यह नई विधि कैंसर को पूरी तरह ठीक करने और पुनरावृत्ति से सुरक्षित रखने में सक्षम दिख रही है।

शोधकर्ताओं ने उपचार की सफलता के आधार पर रक्त के नमूने से ‘व्यक्तिगत परीक्षण’ विकसित किया है, जो रक्त में कैंसर की डीएनए मौजूदगी की प्रारंभिक अवस्था में पहचान कर सकता है। इस तकनीक की मदद से डॉक्टर यह निर्णय कर सकेंगे कि किस मरीज को कितनी उपचार आवश्यकता है और किसे अतिरिक्त थेरापी की जरूरत नहीं है। ट्रायल के मुख्य शोधकर्ता डॉ. काई-किन सियू ने तीन वर्षों तक किसी भी मरीज में कैंसर न लौटने को बेहद उत्साहजनक बताया और कहा कि इस परिणाम ने उच्च जोखिम वाले आंत्र कैंसर वाले मरीजों में पेम्ब्रोलीजुमाब के सुरक्षित और प्रभावशाली उपचार होने की विश्वसनीयता को और मजबूत किया है।

ट्रायल में शामिल 73 वर्षीय मरीज क्रिस्टोफर बर्स्टन ने अपना अनुभव साझा किया, उन्होंने बताया कि ऑपरेशन के बाद डॉक्टरों ने कहा कि ‘कैंसर पिघलकर समाप्त हो गया’। इम्यूनोथेरेपी ने तुरन्त प्रभाव दिखाया और तीसरे चरण के कैंसर से मुक्ति दिलाकर वे अब सामान्य जीवन जी रहे हैं। यह उपचार विशेषकर ‘MMR डिफिशिएंट/MSI-हाई’ नामक आनुवंशिक प्रकार के आंत्र कैंसर वाले मरीजों में अत्यधिक प्रभावकारी साबित हुआ है। वैज्ञानिकों के अनुसार, इम्यूनोथेरेपी शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कैंसर के खिलाफ सक्रिय करती है, इसलिए इसका प्रभाव दीर्घकालिक और मजबूत होता है।

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