
विश्वप्रकाश शर्मा
समाचार सारांश
समीक्षा के बाद बनाया गया।
- नेपाली कांग्रेस के उपसभापति विश्वप्रकाश शर्मा ने कहा कि सर्वोच्च अदालत की व्याख्या सभी को माननी चाहिए।
- शर्मा ने संवैधानिक परिषद में तीन सदस्यों की सहमति को बहुमत मानने वाले अध्यादेश की ओर संकेत किया और संविधान की धारा १२८(४) का हवाला दिया।
- शर्मा ने राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी के अध्यक्ष रवि लामिछाने को उत्तर कोरिया का उदाहरण देते हुए न्यायिक इतिहास में पंचायती नहीं किए कार्य का दाग न उठाने को गंभीरता से विचार करने का आग्रह किया।
२४ वैशाख, काठमांडू। नेपाली कांग्रेस के उपसभापति विश्वप्रकाश शर्मा ने कहा कि सर्वोच्च अदालत की व्याख्याओं का सभी को पालन करना अनिवार्य है।
उन्होंने ६ सदस्यीय संवैधानिक परिषद में तीन सदस्यों की सहमति को बहुमत मानने वाले अध्यादेश की तरफ संकेत किया है।
“संविधान की धारा १२८(४) कहती है– सर्वोच्च की व्याख्या सभी का पालन करनी होगी,” उपसभापति शर्मा ने ‘एक्स’ पर लिखा, “अर्थात बहुमत होना ही आवश्यक है।”
१४ जेठ ०८१ को सर्वोच्च ने ६० सदस्यीय गण्डकी प्रदेशसभा में बहुमत के लिए कम से कम ३१ सदस्य होना जरूरी बताया था।
उपसभापति शर्मा ने कहा कि उत्तर कोरिया को छोड़कर विश्व स्तर पर लोकतंत्र की यही मान्यता है।
शर्मा ने राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी (रास्वपा) के अध्यक्ष रवि लामिछाने से भी सवाल किया है।
“शब्दों में कहते हैं– ‘पिछली गलतियों को सुधारना’। फिर कर्म में उत्तर कोरिया की ओर क्यों जाता है?” उन्होंने लामिछाने को ‘मेन्शन’ करते हुए लिखा, “जिम्मेदार साथियों से गंभीर विचार करने का आग्रह है। ८० वर्षों के न्यायिक इतिहास में पंचायती ने जो नहीं किया, वह कर्म का दाग किसी ने न उठाया हो।”