
नींद न आने की समस्या? दवा नहीं, जीवनशैली में बदलाव करें
२४ वैशाख, काठमाडौं। एक तिहाई अमेरिकी वयस्क रात में कम से कम सात घंटे की नींद नहीं ले पाते, यह एक शोध में उजागर हुआ है। विश्वभर में अनिद्रा और नींद सम्बंधित समस्याएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। इस संदर्भ में, लोग बेहतर नींद पाने के लिए सप्लीमेंट्स और दवाओं पर अधिक निर्भर हो रहे हैं, लेकिन विशेषज्ञों ने रोजाना नींद की गोलियों या सप्लीमेंट्स पर निर्भर रहने से परहेज करने की चेतावनी दी है।
न्यूयॉर्क टाइम्स में प्रकाशित एक लेख के अनुसार, अमेरिकी स्वास्थ्य एजेंसी CDC की नवीन रिपोर्ट में बताया गया है कि आठ में से एक अमेरिकी वयस्क नींद पूरी करने या सोने के लिए सप्लीमेंट्स या दवाओं का उपयोग करता है। एक अन्य रिपोर्ट ने भी दिखाया है कि एक तिहाई अमेरिकी वयस्क रात को कम से कम सात घंटे की नींद से वंचित हैं।
ड्यूक विश्वविद्यालय मेडिकल सेंटर के नींद विशेषज्ञ डॉ. सुजय कंसगर के अनुसार, कई लोग मेलाटोनिन और मैग्नीशियम जैसे सप्लीमेंट्स को जादुई उपाय मानते हैं, लेकिन उन्हें अपनी नींद खराब होने के वास्तविक कारणों की पहचान करनी चाहिए। उनके मुताबिक, “मैग्नीशियम से नींद में सुधार के प्रमाण सीमित हैं।” हालांकि, मांसपेशियों के खिंचाव या पैरों में ऐठन जैसी समस्याओं के कारण इसका इस्तेमाल करने वालों को कुछ राहत मिल सकती है।
विशेषज्ञों ने अत्यधिक सप्लीमेंट पर निर्भरता से वास्तविक बीमारियों और समस्याओं को छुपाने का खतरा बताया है। तनाव, देर रात तक स्क्रीन देखने की आदत, अनियमित दिनचर्या और कार्य दबाव भी नींद खराब होने के प्रमुख कारण हैं। डॉक्टरों ने सुझाव दिया है कि बेहतर नींद के लिए दवाओं की बजाय बुनियादी जीवनशैली की आदतों पर ध्यान देना जरूरी है। जैसे: प्रतिदिन समान समय पर सोना और जागना, सुबह सूरज की रोशनी में समय बिताना, नियमित व्यायाम करना, सोने से पहले स्क्रीन का उपयोग सीमित करना और सोने के कमरे को अंधेरा तथा ठंडा बनाना।