Skip to main content
‘सुपर मिनिस्ट्री’ ले दिन सक्छ सुशासनको सन्देश – Online Khabar

‘सुपर मिनिस्ट्री’ से सुशासन का संदेश मिल सकता है

नए पीढ़ी के युवाओं द्वारा किये गए जनजीवन आंदोलन के बाद राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी को लगभग दो-तिहाई जनादेश मिला है। प्रधानमंत्री तथा मंत्रिपरिषद् कार्यालय की कार्यशैली पिछले समय से अस्थिर और प्रभावशाली नहीं रही है। २०७९ वैशाख में गठित कार्यदल ने प्रधानमंत्री कार्यालय में सचिवों की संख्या सीमित करने और कार्य प्रणाली को चुस्तदुरुस्त बनाने का सुझाव दिया था। शासन व्यवस्था में गड़बड़ी के विरुद्ध युवाओं द्वारा किये गए जनजीवन आंदोलन के बाद राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी को लगभग दो-तिहाई का अभूतपूर्व जनादेश प्राप्त हुआ है। यह गहरा जनविश्वास केवल सत्ता के चेहरे या नेतृत्व परिवर्तन के लिए नहीं, बल्कि वर्षों से जड़ जमा चुकी कुप्रशासन को उखाड़ फेंक सुशासन लाने के उद्देश्य के लिए है। सुशासन सिर्फ भाषणों के मधुर शब्दों में नहीं, बल्कि परिणाममुखी कार्यों में नजर आना चाहिए। परिवर्तन की वास्तविक शुरुआत के लिए सबसे पहले मौजूदा राज्य व्यवस्था की कमजोरियों और उनकी कार्यशैली को गहराई से समझना आवश्यक है। इन व्यवस्थाओं की सच्ची तस्वीर सामने लाने तथा सुशासन का मार्गचित्र तैयार करने के लिए हमने ‘जनादेश सुशासन’ नामक समाचार और विचार श्रृंखला की शुरुआत की है। ६ चैत, काठमांडू। दो सप्ताह पहले हुए चुनावों के दौरान प्रधानमंत्री तथा मंत्रिपरिषद् कार्यालय के कर्मचारी तीन महत्वपूर्ण कार्यों में व्यस्त थे। पहला, भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्ययोजना बनाना। दूसरा, सुशासन नीति का विकास। और तीसरा, जनजीवन आंदोलन द्वारा उठाए गए मांगों को संबोधित करने के संबंध में सुशासन मार्गदर्शन तैयार करना। संयोग से चुनौती यह रही कि प्रधानमंत्री सुशीला कार्की ने अपनी निजी सचिव आदर्श श्रेष्ठ को कार्यशैली और अनुभव न मिलते हुए राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण कोष का अध्यक्ष नियुक्त करने के लिए आगे बढ़ीं, लेकिन सुशासन से जुड़ी इन तीनों दस्तावेजों को पारित करने या इनके प्रति अपनत्व दिखाने में कोई रुचि नहीं दिखाई। ‘ईमानदार कर्मचारियों के लिए उन्होंने जैसा सहज प्रधानमंत्री का पद संभाला है, वह पिछले समय में कहीं और नहीं था, इसलिए कर्मचारी प्रणाली ने उन्हें पूरी मदद दी,’ प्रधानमंत्री कार्यालय के एक सूत्र ने कहा, ‘यदि उन्होंने स्वयं प्रतिबद्धता व्यक्त किये गए विषयों को अनदेखा न किया होता और अपनत्व दिखाया होता तो काम और भी सुगम हो जाता।’

जवाफ लेख्नुहोस्

तपाईँको इमेल ठेगाना प्रकाशित गरिने छैन। अनिवार्य फिल्डहरूमा * चिन्ह लगाइएको छ