
गिजा रोग के लिए नई उपचार पद्धति का पता चला
मिनेसोटा विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने मुख के भीतर बैक्टीरिया के संचार में बाधा डालकर गिजा रोग नियंत्रण करने की नई विधि खोजी है। अध्ययन में दांत के प्लाक में बैक्टीरिया रासायनिक संकेतों के माध्यम से वृद्धि दर को संतुलित रखते हैं, और संचार रोकने पर हानिकारक बैक्टीरिया की संख्या कम होती है। सह-प्राध्यापक मिकेल इलियास ने बताया कि ‘ल्याक्टोनेज’ एंजाइम की मदद से बैक्टीरिया के संचार को रोका जा सकता है, जिससे मुँह के स्वास्थ्य को बिगड़ने से बचाया जा सकेगा। २५ वैशाख, काठमांडू।
वैज्ञानिकों ने हमारे मुख में मौजूद बैक्टीरिया को नष्ट करने की बजाय, उनके बीच ‘संचार’ में रुकावट डालकर गिजा रोग को नियंत्रित करने की एक अनोखी विधि खोजी है। मिनेसोटा विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए इस नए अध्ययन में पाया गया कि दांत के प्लाक में मौजूद बैक्टीरिया रासायनिक संकेतों का उपयोग कर अपनी वृद्धि को नियंत्रित करते हैं। वैज्ञानिकों ने जब इन रासायनिक संकेतों को अवरुद्ध किया तो गिजा रोग उत्पन्न करने वाले हानिकारक सूक्ष्मजीवों की संख्या घट गई और स्वास्थ्यवर्धक बैक्टीरिया की वृद्धि हुई।
पहले एंटीबायोटिक्स या कीटाणुनाशक दवाएं खराब और अच्छे दोनों तरह के बैक्टीरिया को मारती थीं। लेकिन इस नई पद्धति से मुँह के स्वस्थ माइक्रोबायोम को संरक्षित करते हुए उपचार संभव हो पाया है। मुँह में लगभग ७०० प्रजातियों के बैक्टीरिया रहते हैं, जो एक-दूसरे से ‘कोरम सेंसिंग’ नामक प्रक्रिया द्वारा संदेश भेजते हैं। शोधकर्ताओं ने यह भी पता लगाया कि गिजा के ऊपरी हिस्से (जहाँ ऑक्सीजन होता है) तथा गिजा के भीतरी हिस्से (जहाँ ऑक्सीजन नहीं होता) में बैक्टीरिया की संचार प्रक्रिया अलग-अलग होती है।
जहाँ ऑक्सीजन होता है, वहाँ बैक्टीरिया के संचार को रोकने पर स्वस्थ बैक्टीरिया की बढ़ोतरी हुई, जबकि जहाँ ऑक्सीजन नहीं था, संचार से रोग उत्पन्न करने वाले बैक्टीरिया सक्रिय हुए। अध्ययन के वरिष्ठ लेखक और सह-प्राध्यापक मिकेल इलियास के अनुसार दांत के प्लाक का पारिस्थितिक तंत्र जंगल के पर्यावरण की तरह विकसित होता है। प्रारंभ में आने वाले बैक्टीरिया हानिकारक नहीं होते, लेकिन बाद में आने वाले ‘रेड कॉम्प्लेक्स’ नामक बैक्टीरिया गिजा के गंभीर रोगों का कारण बनते हैं। इनका संचार ‘ल्याक्टोनेज’ नामक एंजाइम की मदद से रोका जा सकता है, जो मुँह की स्वास्थ्य खराब होने से बचाता है। इस खोज से भविष्य में दंत चिकित्सा के साथ-साथ शरीर के अन्य हिस्सों में होने वाले संक्रमण के उपचार में भी महत्वपूर्ण बदलाव आ सकता है। शरीर में बैक्टीरिया के असंतुलन से कैंसर जैसे रोग हो सकते हैं, इसलिए वैज्ञानिक बैक्टीरिया को मारने के बजाय उनके व्यवहार को नियंत्रित कर स्वस्थ अवस्था में वापस लाने की रणनीति को अधिक प्रभावी मानते हैं।