
पाँचथर में लिम्बु साहित्य की 12 पुस्तकें एक साथ लोकार्पित
पाँचथर के फिदिम में लिम्बु भाषा में लिखी गई 12 साहित्यिक कृतियों का सामूहिक लोकार्पण किया गया है। किरात याक्थुङ चुम्लुङ के संघीय अध्यक्ष गोविन्द आङबुङ ने मातृभाषा साहित्य को इतिहास और सांस्कृतिक स्मृतियों को जीवंत रखने में सहायक बताया। याक्थुङ प्रज्ञा प्रतिष्ठान द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में लक्ष्मीकुमार सेर्मा, नरेन्द्रराज केरुङ, भीम कुरुम्बाङ सहित सात लेखकों की कृतियों का विमोचन किया गया। 28 वैशाख, पाँचथर।
लिम्बु भाषा में रचित 12 साहित्यिक पुस्तकों का लोकार्पण पाँचथर के मुख्यालय फिदिम में ‘याक्थुङ साहित्य का सिन्थेसिस’ नामक कार्यक्रम के तहत सात लेखकों की 12 कृतियाँ एकसाथ प्रकट की गयीं। इस अवसर पर किरात याक्थुङ चुम्लुङ के संघीय अध्यक्ष गोविन्द आङबुङ ने कहा कि मातृभाषा साहित्य इतिहास, अस्तित्व और सांस्कृतिक स्मृतियों को जीवंत रखता है।
लक्ष्मीकुमार सेर्मा की मुन्धुम ग्रंथ ‘युमा? साम्माङ–थेबा? साम्माङ थान्छिङमा मुन्धुम’, नरेन्द्रराज केरुङ की कविता संग्रह ‘चो?लुङबा लाङगाङहा’, भीम कुरुम्बाङ की ‘थाङबेन्’, पुष्पहाङ लोवा की ‘मिराक्को केभेक्पा फुङ’, योगी एल.वि. नेम्बाङ का निबंध ‘मुयेङ केएप्पा याप्मिहा’, मचिन्द्र लोवा ‘सेमी’ की गजल ‘पक्कन्दी’ का विमोचन किया गया।
इसके अतिरिक्त, सागर केरुङ की 6 कृतियों का भी विमोचन हुआ। जिनमें ‘मुन्चइत्–हेन्जिला’, ‘मुक्सी नु परिक्हा’, ‘थङ’, ‘सिलाम्साक्मा’, ‘आबु साम्लो–हेन्जिला’, ‘मुक्सी नु परिक्हा’, ‘याक्थुङ पाङ–पाङवाइला’ और बालगीत संग्रह ‘फुङ’ शामिल हैं। पुस्तक प्रकाशन को भाषा एवं संस्कृति संरक्षण और मातृभाषा साहित्य पुनर्जागरण की एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में माना गया। यह कार्यक्रम याक्थुङ प्रज्ञा प्रतिष्ठान द्वारा आयोजित किया गया था।