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महावीर पुन ने संसद में केवल पाँच मिनट बोलने का समय मिलने पर जताई असंतुष्टि

सम्पादकीय समीक्षा सहित समाचार सारांश। स्वतंत्र सांसद महावीर पुन ने संसद में बोलने के लिए केवल पाँच मिनट का समय मिलने पर असंतोष जताया है। उन्होंने बताया कि जब वे मंत्री थे तब जो तीन अध्यादेश लाना चाहते थे, वे अभी तक सरकार द्वारा लाए नहीं गए हैं। पुन ने विश्वविद्यालय में कुलपति के प्रधानमंत्री बनने की व्यवस्था हटाने एवं विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय को अलग से बनाने की मांग की है। २९ वैशाख, काठमांडू। स्वतंत्र सांसद महावीर पुन ने संसद में बोलने के लिए सिर्फ पांच मिनट मिलने पर असंतोष व्यक्त किया है। सभापति डोलप्रसाद अर्याल ने उन्हें आज पाँच मिनट का वक्त दिया था। रोस्टम से सांसद पुन ने कहा, ‘म एकलौता माननीय कहलाकर अपमानित न किया जाए। अन्य सांसदों को १०, १५, २०, ३० मिनट दिए जाते हैं, तो मुझे पाँच मिनट भी कम है।’ उन्होंने दावा किया कि उन्हें पार्टी सांसदों से अधिक समर्थन प्राप्त है और सभापति को याद दिलाया, ‘मेरे समर्थक पूरे नेपाल में हैं। मैं अकेला नहीं हूं। पूरी नेपाली जनता मुझे जानती है। पाँच मिनट का समय स्वीकार्य नहीं है।’ इसके बाद उन्होंने बताया कि मंत्री रहते जब वे तीन अध्यादेश लाना चाहते थे, वे अभी तक सरकार द्वारा लागू नहीं हुए हैं। ‘मैं तीन अध्यादेश लाना चाहता था, लेकिन वह संभव नहीं हो पाया,’ उन्होंने कहा, ‘सरकार ने आठ अध्यादेश लाए, लेकिन जो मैं लाना चाहता था वह उनमें शामिल नहीं है।’ उन्होंने बताया कि उन्होंने विश्वविद्यालय से कुलपति के प्रधानमंत्री बनने की प्रावधान खत्म करने वाला अध्यादेश लाने का प्रयास किया था, लेकिन वर्तमान अध्यादेश में यह विषय शामिल नहीं है। ‘विश्वविद्यालय को राजनीति से मुक्त करने की बात तो कही गई है, लेकिन वर्तमान में भी कुलपति प्रधानमंत्री बनने का प्रावधान मौजूद है,’ उन्होंने स्पष्ट किया। साथ ही, उन्होंने विज्ञान और प्रौद्योगिकी के विकास के लिए विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी मंत्रालय अलग से बनाने की मांग भी की।

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